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डाउनलोड करेंइंदौर. न्यू शीतल नगर में रहने वाले 31 वर्षीय युवक ने शनिवार सुबह घर के बाथरूम में एसिड पी लिया। अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उसके पिता रमेशचंद यादव ने रेलवे के डीसीएम अजय ठाकुर और सीपीएस अनिल त्रिवेदी को बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार बताया। उनका आरोप है कि काफी समय से ये अफसर उन्हें रेलवे के काम से वंचित कर रहे थे। दो बार उनका टेंडर निरस्त कराकर किसी महिला को सौंप चुके थे। जीआरपी और ग्वालटोली थाने में उनकी झूठी शिकायतें करवा कर बार-बार हवालात में बंद करा देते थे, जिससे बेटा तनाव में रहने लगा था। इसी कारण उसने यह कदम उठाया। उन्होंने बताया कि अधिकारियों से परेशान होकर वह खुद भी राष्ट्रपति से इच्छा मृत्यु की मांग कर चुके हैं।
बाणगंगा पुलिस के मुताबिक, मृतक का नाम राजकुमार यादव था। उसे तड़पता देख मां सरिता यादव ने शोर मचाया और लोगों की मदद से उसे अरबिंदो हॉस्पिटल पहुंचाया। दोपहर में उसकी मौत हो गई।
डीसीएम बोले- मैं नहीं जानता कौन है
वहीं रतलाम मंडल के डीसीएम अजय ठाकुर का कहना था- मैं मृतक और उसके पिता को नहीं जानता। यह जानकारी जरूर है कि किसी रमेश यादव ने पार्सल में ठेके को लेकर राष्ट्रपति कार्यालय तक शिकायत की थी। इसमें रेलवे पुलिस जांच कर चुकी है। ऐसे में अगर कोई मेरा नाम लेकर मर जाता है तो उसके लिए मैं जवाबदार नहीं हूं। वहीं मामले में अनिल त्रिवेद ने फोन नहीं उठाया।
यह है मामला
रमेश यादव रेलवे में ठेका लेते थे। उनके मुताबिक उन्होंने 1992 से इंदौर रेलवे स्टेशन के पार्सल कार्यालय में लेबर कॉन्ट्रैक्टर का काम शुरू किया था। 2009 में हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे ने निर्देश जारी किया कि अब पार्सल का ठेका को-ऑपरेटिव संस्था को दिया जाएगा। 2010 में रेलवे पार्सल श्रम सहकारी संस्था को ग्रुप नंबर 70 के तहत 16 जून 2010 में एक साल के लिए ठेका दिया गया। 2012 में कुछ साथियों के साथ मिलकर देवी अहिल्या रेलवे पार्सल श्रम ठेका सहकारी संस्था का निर्माण किया और 27 अप्रैल 2012 काे जारी टेंडर में इस संस्था ने हिस्सा लिया। सबसे कम रेट होने के कारण ठेका इसे मिला। इस दौरान किसी ने पार्सल रेट को लेकर चीफ विजिलेंस को शिकायत की। रेट असेसमेंट हुआ।
बताया गया कि वर्तमान रेट 2 लाख रुपए सालाना होना चाहिए। अफसरों ने पुराने ठेकेदार के काम की समयावधि बढ़ा दी। 16 मई 2013 को ग्रुप नंबर सी 237/2/74 नाम से नया टेंडर जारी हुआ। जो बिना असेसमेंट कर पुराने नियम पर ही निकाल दिया। रमेश ने बताया कि उन्होंने आपत्ति ली और कोर्ट चले गए, लेकिन रेलवे ने टेंडर जारी कर दिया। पुराने ठेकेदार को ही 101 रुपए प्रति माह की दर से टेंडर देने की तैयारी कर ली। इसमें कोर्ट से स्टे ले लिया। 2016 तक स्टे चला और पुराने ठेकेदार को एक्सटेंशन कर देते रहे। इससे परेशान होकर राष्ट्रपति से इच्छामृत्यु की मांग थी। उस समय भी डीसीएम अजय ठाकुर, एसीएम नीला देवी झाला, सीपीएस अनिल त्रिवेदी और ठेकेदार टीना बौरासी को जिम्मेदार बताया था।
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