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डाउनलोड करेंलखनऊ. सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से नोटिस देने के बाद उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री अपना सरकारी बंगला बचाने की जुगत में लग गए हैं। इसी सिलसिले में बसपा प्रमुख मायावती ने अपने सरकारी आवास के बाहर कांशीराम यादगार विश्राम स्थल का बोर्ड लगवा दिया है, ताकि उन्हें बंगला खाली न करना पड़े। उधर, पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी राज्य संपत्ति विभाग को पत्र लिखकर दो साल की मोहलत मांगी है। केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को अपना सरकारी आवास खाली कर दिया था।
मायावती ने विश्राम स्थल को अपने बंगले से जोड़ा था
- जब मायावती यूपी की मुख्यमंत्री थीं, तो उनके बंगले के पास ही कांशीराम विश्राम स्थल हुआ करता था। बाद में इसको उन्होंने अपने बंगले से जोड़ लिया। वजह यह थी कि उस वक्त इसका मासिक किराया करीब 72 हजार रुपए था, वहीं मायावती के बंगले का किराया 4212 रुपए। मायावती ने अब दोनों आवासों को एक कर दिया है। यदि इस बंगले को कांशीराम विश्राम स्थल के नाम कर दिया जाता है, तो उनको इसे खाली नहीं करना पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने दिया था आदेश
- बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 7 मई को यूपी के सभी पूर्व मुख्यमंत्री से सरकारी आवास खाली करने का आदेश दिया है। इसके बाद राज्य के संपत्ति विभाग ने सभी पूर्व मुख्यमंत्री को 15 दिन में सरकारी आवास खाली करने का नोटिस थमा दिया।
- उत्तर प्रदेश के छह पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन बंगले की सुविधा देने वाला कानून सुप्रीम कोर्ट ने रद्द करते हुए कहा कि पद छोड़ने के बाद मुख्यमंत्री और आम आदमी में कोई फर्क नहीं रहता। ऐसे में उसे बंगले की विशेष सुविधा क्यों दी जाए?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पद छोड़ने के बाद बंगले में रहना संविधान के तहत नहीं
- जस्टिस रंजन गोगोई और जस्टिस आर भानुमति की बेंच ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्थायी तौर पर सरकारी बंगला हासिल करने के हकदार नहीं हैं। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मंत्री (वेतन, भत्ते एवं अन्य प्रावधान) कानून की धारा 4(3) को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि इस तरह के कानून भेदभावपूर्ण है। यह संविधान सम्मत नहीं हैं।
- इससे पहले भी कोर्ट ने अगस्त 2016 में एक फैसला सुनाया था, जिसमें उसने कहा था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी बंगलों का आवंटन अनुचित है। ऐसे बंगले सरकार को लौटा दिए जाने चाहिए, लेकिन राज्य सरकार ने कानून में संशोधन करके पूर्व मुख्यमंत्रियों के लिए स्थायी तौर पर सरकारी बंगले का प्रावधान कर दिया था।
याचिकाकर्ता ने कहा था- दूसरे राज्यों पर भी पड़ेगा असर
- याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार का संशोधित कानून रद्द करने की मांग की थी। उसका कहना था कि ऐसा नहीं किया गया तो इसका दूसरे राज्यों पर भी असर होगा। सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सरकारी बंगला हासिल करने के हकदार नहीं हैं।
दो साल पहले कोर्ट ने बंगले खाली करने को कहा था
- सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2016 में भी उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगले खाली करने का आदेश दिया था। इस पर अखिलेश सरकार ने पुराने कानून में संशोधन कर यूपी मिनिस्टर सैलरी अलॉटमेंट एंड फैसेलिटी अमेंडमेंट एक्ट 2016 विधानसभा से पास करा लिया था। इसमें सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सरकारी बंगला आवंटित करने का प्रावधान किया गया था।
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