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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में 11 साल बाद आज आ सकता है फैसला, कोर्ट लाया गया आरोपी असीमानंद

3 वर्ष पहले
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हैदराबाद.  तेलंगाना के मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की नामापल्ली स्पेशल कोर्ट ने सोमवार को 11 साल बाद फैसला सुनाया। कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत 5 आरोपियों को बरी कर दिया। देर शाम फैसला सुनाने वाले स्पेशल एनआईए जज रवींद्र रेड्डी ने इस्तीफा दे दिया। इस फैसले पर गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने कहा कि ब्लास्ट केस के सारे सबूत झूठे थे और इसमें हिंदू आतंकवाद जैसी कोई बात नहीं थी। कांग्रेस ने भ्रम फैलकर लोगों की छवि धूमिल की। बता दें कि 18 मई, 2007 को हुए ब्लास्ट में 9 लोगों की मौत और करीब 58 जख्मी हुए थे। सीबीआई के द्वारा शुरुआती जांच के बाद केस 2011 में एनआईए को ट्रांसफर किया गया था।

 

 

जज बोले- निजी कारणों से दिया इस्तीफा

- जज रवींद्र रेड्डी ने इस केस का फैसला सुनाने के कुछ घंटे बाद ही अपना इस्तीफा मेट्रोपोलिटन सेशंन जज को सौंप दिया। 

- उन्होंने न्यूज एजेंसी से कहा कि वे निजी वजहों से इस्तीफा दे रहे हैं। इसके पीछे आज के फैसले का कोई संबंध नहीं है।

 

सारे सबूत गढ़े गए थे: पूर्व अवर सचिव

- न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने कहा- ''मुझे इसी फैसले की उम्मीद थी। सारे सबूत मनगढ़ंत थे, इसके अलावा ब्लास्ट केस में हिंदू आतंकवाद जैसा कोई एंगल नहीं था।'' 

- ''इस मामले में जिन लोगों की छवि धूमिल हुई, उसकी भरपाई कैसे करेंगे? क्या कांग्रेस या कोई और जिन्होंने यह झूठ फैलाया, इन लोगों को मुआवजा देगी।''

- बता दें कि आरवीएस मणि गृह मंत्रालय में अवर सचिव रहे हैं। मणि वही पूर्व अफसर हैं, जिन्होंने 2016 में दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान उन पर दबाव डालकर इशरत जहां मामले में दूसरा हलफनामा दाखिल कराया गया था। उनका आरोप था कि दूसरे हलफनामे में इशरत और साथियों के लश्कर से संबंधों की बात दबाव डालकर हटा दी गई थी।

 

सरकार फैसले पर गौर करे: कांग्रेस 

- कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने कहा कि अब यह केंद्र सरकार पर निर्भर करता है कि वो ब्लास्ट केस में आरोपियों को बरी करने वाले फैसले पर गौर करे। देखा जाए कि क्या इस पर आगे कोई अपील की जा सकती है। यह मामला न्याय व्यवस्था से जुड़ा है, इसलिए मैं कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।

 

टूजी का फैसला सही था, आज गलत कह रहे हैं- भाजपा

- भाजपा नेता संबित पात्रा ने कहा, "हम न्याय प्रणाली पर टिप्पणी नहीं करते हैं। जब टूजी का जजमेंट आया था, तब आप (कांग्रेस) कह रहे थे कि कोर्ट सही है। आज कोर्ट को गलत कह रहे हैं। मापदंड तो सही होना चाहिए। क्या राहुल गांधी आज भी रात 12 बजे क्षमा याचना करने इंडिया गेट पर आएंगे?"

 

क्या जांच एजेंसी का गलत इस्तेमाल हुआ?
- न्यूज एजेंसी ने ब्लास्ट केस में सभी आरोपियों को बरी करने के फैसले पर एनआईए से जांच एजेंसी के गलत इस्लेमाल पर सवाल पूछा।

- इस पर एनआईए की ओर से कहा गया, ''हम पहले कोर्ट से फैसले की कॉपी मिलने के बाद इस पर गौर करेंगे। इसके बाद ही आगे कोई फैसला लेंगे।''

 

कौन-कौन लोग आरोपी थे?

- ब्लास्ट केस में जांच एजेंसियों ने कुल 10 लोगों को आरोपी बनाया था। इनमें से 5 आरोपी देवेंद्र गुप्ता, लोकेश शर्मा, स्वामी असीमानंद, भरत मनोहरलाल रत्नेश्वर और राजेंद्र चौधरी की गिरफ्तारी हुई थी। यही पांचों मुकदमे में बरी हुए हैं। असीमानंद और भरत रत्नेश्वर जमानत पर और बाकी 3 जेल में हैं।  

- बाकी आरोपियों में संदीप वी दांगे और रामचंद्र कलसांगरा फरार हैं। एक आरोपी सुनील जोशी की मौत हो चुकी है। अन्य दो आरोपियों के लिए जांच चल रही है।

- बता दें कि मार्च, 2017 में राजस्थान कोर्ट ने अजमेर दरगाह ब्लास्ट केस में देवेंद्र गुप्ता को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

 

कर्नल पुरोहित ने बदला अपना बयान

- इस मामले में कुल 226 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, जिनमें से 54 गवाह मुकर चुके हैं। करीब 411 दस्तावेज पेश किए गए। 

- मालेगांव धमाकों के आरोपी कर्नल पुरोहित भी इस मामले में गवाह थे। उन्होंने 15 फरवरी 2018 को अपने बयान पलट दिए थे।

 

टाइमलाइन: कब, क्या हुआ? 

- 18 मई, 2017: मक्का मस्जिद में शुक्रवार को ब्लास्ट: 9 की मौत 58 जख्मी। 

- जून 2010: आरएसएस एक्टिविस्ट सुनील जोशी को सीबीआई ने अहम आरोपी बनाया था। जोशी की 29 दिसंबर, 2007 को तीन अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।   
- 19 नवंबर, 2010: अभिनय भारत संगठन के सदस्य स्वामी असीमानंद को सीबीआई ने अरेस्ट किया। इसी दौरान जांच एजेंसी ने देवेंद्र गुप्ता और लोकेश शर्मा को भी गिरफ्तार किया गया। 
- 18 दिसंबर, 2010: असीमानंद ने कोर्ट के सामने ब्लास्ट में शामिल होने की बात कबूली। 
- अप्रैल 2011: इस केस की जांच सीबीआई से एएनआई को सौंप दी। 
- 23 मार्च, 2017: हैदराबाद कोर्ट ने असीमानंद को इस शर्त पर जमानत दी थी कि वह हैदराबाद और सिकंदराबाद नहीं छोड़ सकते। वह सात साल तक जेल में रहे। 

- 31 मार्च, 2017: असीमानंद जेल से रिहा।

 

कौन है असीमानंद?

- असीमानंद का जन्म पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में हुआ था। उनके पिता देश के स्वतंत्रता सेनानी थे। छात्र जीवन में ही वह आरएसएस से जुड़ गए। असीमानंद साल 1977 में आरएसएस के फुल टाइम प्रचारक बने। 

- 2007 में राजस्थान के अजमेर शरीफ में हुए ब्लास्ट केस में एटीएस ने देंवेंद्र गुप्ता नाम के आरोपी को गिरफ्तार किया तो उसने असीमानंद और सुनील जोशी पर आरोप लगाया कि अजमेर शरीफ और हैदराबाद के मक्का मस्जिद में ब्लास्ट करने के लिए उसपर इन लोगों ने दबाव डाला। हालांकि, जयपुर हाईकोर्ट ने अजमेर शरीफ ब्लास्ट में असीमानंद को बरी कर दिया।

- असीमानंद पर समझौता एक्सप्रेस, मक्का मस्जिद और मालेगांव ब्लास्ट में भी शामिल होने के आरोप हैं।

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