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महिला टी-20 टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर की बीए की डिग्री फर्जी निकली, जा सकती है डीएसपी की नौकरी

हरमनप्रीत ने इस साल मार्च में पंजाब पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी। वे 80 बटालियन पीएपी जालंधर डीएसपी के पद पर तैनात हैं।

Dainik Bhaskar

Jul 03, 2018, 06:42 PM IST
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  • हरमनप्रीत कौर को 2017 में अर्जुन अवार्ड से भी पुरस्कृत किया गया था
  • हरमनप्रीत कौर 87 वनडे और 81 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुकी हैं

मेरठ. भारतीय महिला टी-20 क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत कौर की पंजाब में पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) की नौकरी पर तलवार लटक रही है। पंजाब पुलिस ने सत्यापन के लिए उनकी मार्कशीट मेरठ स्थित चौधरी चरण सिंह (सीसीएस) यूनिवर्सिटी भेजी थी। जांच के बाद उनकी बीए फाइनल की मार्कशीट फर्जी पाई गई है। उनकी मार्कशीट का यूनिवर्सिटी में कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। विश्वविद्यालय ने अपनी रिपोर्ट भेज दी है। इसके बाद उन पर कार्रवाई की जा सकती है।

सीसीएस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार ने पुष्टि की

सीसीएस यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रार जीपी श्रीवास्तव ने मंगलवार को बताया कि हरमनप्रीत सिंह ने पंजाब पुलिस में जो बीए फाइनल साल 2011 की मार्कशीट दाखिल की थी, वह फर्जी है। उन्होंने बताया, "जांच में पाया गया कि मार्कशीट में अंकित अनुक्रमांक और नामांकन संख्या हमारे रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।"

हरमनप्रीत कौर ने मामले में साधी चुप्पी

उधर, मोहाली में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के एक कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची हरमनप्रीत ने फर्जी डिग्री को लेकर पूछे गए सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। कार्यक्रम स्थल पर जब उन्होंने मीडियाकर्मियों को अपनी ओर आता देखा तो वैनिटी वैन में जाकर बैठ गईं। बाद में आयोजकों ने मीडियाकर्मियों को इस बात के लिए राजी किया कि हरमनप्रीत कार्यक्रम खत्म होने के बाद उनके सवालों का जवाब देंगी। लेकिन बाद में भी हरमनप्रीत ने फर्जी डिग्री को लेकर पूछे गए सवालों को टाल गईं।

पंजाब पुलिस से पहले रेलवे में कार्यरत थीं हरमनप्रीत

मोगा की रहने वाली हरमनप्रीत को 1 मार्च, 2018 को पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पुलिस महानिदेशक सुरेश अरोड़ा ने प्रदेश पुलिस में डीएसपी के रूप में ज्वाइन कराया था। पंजाब पुलिस ज्वाइन करने से पहले वे पश्चिम रेलवे में कार्यरत थीं। वहां उनका 5 साल का बॉंड था। इसके बावजूद उन्होंने पिछले साल नौकरी से त्यागपत्र दे दिया था। हरमनप्रीत को रेलवे में नौकरी करते हुए 3 साल ही हुए थे। ऐसे में बॉंड की शर्तों के अनुसार, उन्हें पांच साल का वेतन रेलवे को वापस देना था, इसके चलते उन्हें रिलीव नहीं किया गया था। हालांकि कैप्टन अमरिंदर सिंह ने रेल मंत्री पीयूष गोयल के समक्ष उठाया, इसके बाद ही हरमनप्रीत पंजाब पुलिस में नौकरी ज्वाइन कर सकी थीं।

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