चालीसा काल का संदेश- निष्पाप थे येसु मसीह
पास्टर रेव्ह बेंजामिन टोपनो
रांची | पृथ्वी पर रहने के दौरान येसु ने अपने संपूर्ण जीवन में कोई पाप नहीं किया। केवल एक मात्र पुरुष था, जो पृथ्वी पर जीवन बीताने के दौरान निष्कलंक और निष्पाप था। वह लोगों के सामने खड़ा होकर कह सकता था- तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? येसु ने एक दीन और नम्र जीवन बिताया। उसने लोगों से कोई आदर प्राप्त नहीं किया। उसने गौशाले में जन्म लिया था। उसका पालन-पोषण नासरत नामक महत्वहीन गांव में किया गया था। वह एक बढ़ई था। वह लोगों के बीच में एक मनुष्य के रुप में चलता-फिरता था। वह लोगों में से एक था। उसने खुद को इतना दीन किया, जितना दीन किसी व्यक्ति ने खुद को कभी नहीं किया था। उसके द्वारा कहा गया प्रत्येक वचन ऐतिहासिक तौर पर सच था। उसके द्वारा कहा गया वचन वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक रूप से सच था। येसु की नैतिक धारणाओं में कोई दोष नहीं था। उसने कई ऐसी भविष्यवाणी की थी, जो पूरी हुई और कुछ अभी नहीं हुई पर भविष्य में अवश्य होगी। कानून के ज्ञाता उसे परख कर उसकी गलती निकालना चाहते थे। इसके लिए वे उससे प्रश्न पूछते थे। परंतु, वे उससे भ्रमित नहीं होते थे। उनके उत्तर काफी स्पष्ट और सटीक होते थे।