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मानता हूं तेल कीमतें बढ़ने से मिडिल क्लास को परेशानी हो रही, इससे निकलने का रास्ता खोजेंगे: पेट्रोलियम मंत्री

3 वर्ष पहले
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  • चुनाव से पहले  19 दिन तक भाव स्थिर रहे , अब 8 दिन से लगातार बढ़ोतरी 
  • एक्साइज ड्यूटी में कटौती के संकेत नहीं, पेट्रोल पर मौजूदा ड्यूटी 19.48 रुपए 

 

 

नई दिल्ली.  कर्नाटक चुनाव के बाद से लगातार 8वें दिन पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई गई हैं। सोमवार को दिल्ली में पेट्रोल 76.57 रुपए हो गया है वहीं डीजल का भाव 67.82 रुपए पहुंच गया है। 13 मई के बाद से अब तक दिल्ली में पेट्रोल 1.94 रुपए प्रति लीटर रुपए महंगा हो चुका है। यहां रविवार को पेट्रोल की कीमत सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गईं और बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। इससे पहले 14 सितंबर 2013 को दिल्ली में पेट्रोल 76.06 रुपए था। यहां डीजल पहले से ही लाइफटाइम हाई पर बना हुआ है और हर रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है। इस बीच, पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने माना कि आम जनता को परेशानी हो रही है। 

 

तेल कीमतों पर जल्द लगाम लगेगी: प्रधान 

- पेट्रोलियम मंत्री ने कहा है कि, ''मैं स्वीकार करता हूं कि तेल कीमतों में बढ़ोतरी से देश की जनता और खास तौर से मिडिल क्लास को काफी परेशानी हो रही है। इसके पीछे वजह तेल कंपनियों के प्रोडक्शन में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी है। सरकार जल्द ही इसका समाधान ढूंढ़ लेगी।''

 

एक्साइज ड्यूटी घटे, जीएसटी के दायरे में आएं पेट्रोल-डीजल: इंडस्ट्री
- पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों पर उद्योग संस्था फिक्की और एसोचैम ने चिंता जताई है। इनका कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है, ऐसे में महंगा तेल इकोनॉमिक ग्रोथ के लिए एक बड़ा जोखिम हो सकता है। तुरंत राहत के लिए सरकार के पास एक्साइज ड्यूटी में कटौती का विकल्प मौजूद है। वहीं स्थायी समाधान के लिए इन्हें जीएसटी के दायरे में लाना होगा।

 

महानगरों में पेट्रोल के दाम 

शहर सोमवार के भाव (रु./लीटर) बढ़ोतरी (14 मई से 21 मई तक) 
दिल्ली 76.57 (अब तक का उच्च स्तर) 1.94 रुपए
मुंबई 84.40 1.92 रुपए
कोलकाता 79.24 1.92 रुपए
चेन्नई 79.47 2.04 रुपए

 

पेट्रोल: 76.57 रु. में 46.70% टैक्स का हिस्सा

डीलर प्राइस 37.19 रु.
एक्साइज ड्यूटी 19.48 रु.
डीलर कमीशन  3.62 रु.
वैट 16.28 रु.
कुल 76.57 रु.

इस तरह 76.57 रुपए प्रति लीटर के भाव पर उपभोक्ताओं को मिल रहे पेट्रोल में 35.76 रुपए (19.48 एक्साइज+16.28 वैट) टैक्स के शामिल हैं जो कुल कीमत का 46.70% है।

 

 

डीजल: 67.82 रु. में 37.31% टैक्स का हिस्सा 

डीलर प्राइस 39.99 रु.
एक्साइज ड्यूटी 15.33 रु.
डीलर कमीशन 2.52 रु.
वैट 9.98 रु.
कुल 67.82 रु.

- इस तरह 67.82 रुपए प्रति लीटर के भाव पर उपभोक्ताओं को मिल रहे डीजल में 25.31 रुपए (15.33 एक्साइज+9.98 वैट) टैक्स के शामिल हैं जो कुल कीमत का 37.31% है।

 

गुजरात चुनाव के बाद भी दाम बढ़े थे

- पिछले साल गुजरात चुनाव से पहले इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन जैसी सरकारी कंपनियों ने वहां लगातार 15 दिन तक पेट्रोल के दाम में 1 से 3 पैसे की कटौती की थी। गुजरात में 14 दिसंबर को विधानसभा चुनाव हुए थे। वहां भी वोटिंग के बाद तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने शुरू कर दिए।

 

कीमतों में बढ़ोतरी की 5 वजह
1) पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) ने पिछले दिनों प्रोडक्शन घटाया है जिससे मांग बढ़ी है और तेल के दामों में इजाफा हुआ है। 
2) अंतर्राष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल के बेंचमार्क रेट 84.97 डॉलर प्रति बैरल हो गए हैं। 24 अप्रैल को ये 74.84 डॉलर प्रति बैरल थे। 
3) पिछले हफ्ते क्रूड का भाव 80 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा। नवंबर 2014 के बाद पहली बार दाम इस स्तर पर पहुंचे हैं।
4) कर्नाटक चुनाव से पहले दाम स्थिर रखने से तेल कंपनियों को 500 करोड़ के घाटे का अनुमान है। ऐसे में नुकसान की भरपाई के लिए कंपनियां लगातार कीमतें बढ़ा रही हैं। 
5) डॉलर के मुकाबले रुपया 68 के पार पहुंच गया है, जिससे तेल का इंपोर्ट महंगा हुआ है। भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा क्रूड इंपोर्ट करता है। 

 

मुंबई में 90 के पार जा सकता है पेट्रोल

- केडिया कमोडिटी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक पेट्रोल की कीमतें और ऊपर जाएंगी। घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय वजहों का तेल के दामों पर असर पड़ेगा। 

 

घरेलू वजह

- डॉलर के मुकाबले रुपए में लगातार कमजोरी बनी हुई है जिससे भारत के लिए क्रूड का इंपोर्ट महंगा हुआ है। जनवरी से अब तक रुपए में 4-5% की गिरावट आई है। इस दौरान मुंबई में पेट्रोल 6 रुपए महंगा हो चुका है। रुपए में आगे गिरावट नहीं थमती तो मुंबई में पेट्रोल 90 रुपए के पार पहुंच सकता है। 

- 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक उठापटक और कर्नाटक चुनाव के नतीजों की वजह से रुपए पर आगे भी असर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र में बीजेपी की सरकार है लेकिन कर्नाटक के नतीजों से बाजार के सेंटीमेंट पर असर पड़ा है।

 

अंतर्राष्ट्रीय वजह

 

- दो साल पहले तक अमेरिका तेल का इंपोर्टर था लेकिन अब एक्सपोर्टर हो गया है क्योंकि ओपेक देशों ने प्रोडक्शन घटाया है और अमेरिका ने बढ़ा दिया है। ऐसे में अमेरिका खुद नहीं चाहता कि क्रूड के दाम कम हों। 

- अमेरिका में आने वाले दिनों में हरीकेन सीजन के दौरान प्रोडक्शन घटेगा जिसका कीमतों पर असर पड़ेगा।

 

2 साल में सरकार ने 9 बार ड्यूटी बढ़ाई, 4 साल में सिर्फ एक बार घटाई  

- नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के बीच क्रूड के दाम घटने पर सरकार ने 9 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई। वहीं क्रूड महंगा होने पर सिर्फ एक बार ड्यूटी घटाई गई है। पिछले साल सिर्फ अक्टूबर में एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपये प्रति लीटर कटौती की गई। 

- सरकार ने एक फरवरी 2018 को बजट में भी बेसिक एक्साइज ड्यूटी 2 रुपए घटाई वहीं 6 रुपए की अतिरिक्त एक्साइज ड्यूटी खत्म कर दी। लेकिन पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई राहत नहीं मिली क्योंकि सरकार ने 8 रुपए प्रति लीटर रोड सेस लागू कर दिया।

 

पड़ोसी देशों के मुकाबले भारत में सबसे ज्यादा दाम

देश पेट्रोल (रु./लीटर) डीजल (रु./लीटर)
श्रीलंका 63.91 47.07
पाकिस्तान 51.64 58.15
बांग्लादेश 71.54 52.25
भूटान 57.02 54.45
नेपाल 67.64 54.37

 

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