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मॉक ड्रिल: 9 मिनट में कोरोना के मरीज काे अस्पताल पहुंचाया

एक वर्ष पहले
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कोवीड-19 को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से जो गाइडलाइंस जारी की गई है उसको लेकर पुलिस-प्रशासन भी स्वास्थ्य विभाग के साथ
मुस्तैद हो गया है। यदि कोई करोना का मरीज पाया जाता
है तो उसको किस प्रकार से उसके घर से अस्पताल में बने आइसोलेशन बार्ड में शिफ्ट किया जाना है। इसकी मॉकड्रिल शुक्रवार को की गई।

पुलिस तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने इस ड्रिल को अंजाम दिया। कुल 9 मिनट में करोना के नकली मरीज को फेज-7 में उसके घर से सिविल अस्पताल फेज-6 स्थित करोना आइसोलेशन बार्ड में एंबुलेंस के माध्यम से पहुंचाया गया। इस एंबुलेंस के आगे पुलिस की पायलेट एस्कॉर्ट करती हुई रास्ता बनाती जा रही थी। दोपहर को एकाएक पुलिस ने फेज-7 में स्थित 6 मरला मकानों व 7 मरले की कोठियों के डिवाइडिंग रोड को बंद कर दिया। पूरे रोड को खाली करवा लिया गया। वाहनाें का आवागमन बंद कर दिया गया। लोगों को इस एरिया से हटाया गया।

देखते ही देखते तेज रफ्तार एक एंबुलेंस आई जो एक घर के आगे अाकर रुकी।
एंबुलेंस के बीच से डॉक्टर्स की टीम निकली और उन्होंने घर के अंदर से करोना के नकली मरीज को लाकर एंबुलेंस में डाला। पूरे एरिया को सेनेटाइजड किया गया। इसके साथ ही एंबुलेंस में जब मरीज को डाल दिया
गया तो उसके आगे पुलिस की एक जिप्सी एस्कार्ट करती हुई गई और कुछ ही मिनटों में यह गाड़ी फेज-6 सिविल अस्पताल पहुंचा दी गई।

एपिडेमोलॉजिस्ट डॉक्टर हरमनदीप कौर ने बताया कि पंजाब में करोना का कोई मरीज नहीं है। यह नकली मरीज अस्पताल से ही एक फोर्थ क्लास कर्मचारी को बनाकर लेकर आए थे। जिसको पूरी मुस्तैदी के साथ अस्पताल पहुंचाया गया है।

मॉकड्रिल आदि-अधुरी दिख रही थी: भले ही पुलिस ने अपना काम पूरा करने का दिखावा किया हुआ था लेकिन एंबुलेंस के आसपास आम लोग घूमते हुए दिखाई दे रहे थे। इसी प्रकार स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी मुस्तैद नहीं दिख रही थी। जिस नकली मरीज को घर से निकाल एंबुलेंस में डाला जाना था।

उसे घर के अंदर से पैदल लाया जा रहा था। स्ट्रैचर का उपयोग भी नहीं किया गया। इसके साथ ही सभी ने सिंवल मास्क लगाए हुए थे और किस प्रकार का कोई ऐसा अप्रैरन या गाउन नहीं डाला हुआ था जो यह दिखाता हो कि करोना वायरस से स्वास्थ्य कर्मचारियों को भी खतरा है।

सड़के खाली करवा घर से सिविल अस्पताल आइसोलेशन वार्ड में पहंुचाया
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