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डाउनलोड करेंनई दिल्ली. केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान ने शुक्रवार को कहा कि सरकार एससी- एसटी कानून को कमजोर नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ अध्यादेश लाएगी। इससे पहले केंद्र सरकार ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एससी-एसटी एक्ट पर उसके हालिया फैसले ने कानून के प्रावधानों को कमजोर किया है। इससे देश को भारी नुकसान उठाना पड़ा। बता दें कि कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एससी-एसटी एक्ट के कुछ प्रावधानों में बदलाव किया था। इसके विरोध में 3 मार्च को भारत बंद बुलाया गया था। प्रदर्शन के दौरान 10 से ज्यादा राज्यों में हिंसा हुई थी और 15 लोगों की मौत हो गई थी।
हर संभव प्रयास उठाएगी सरकार
- लोक जनशक्ति पार्टी के अध्यक्ष और खाद्य- आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान ने कहा कि सरकार इस कानून के तमाम प्रावधानों को जस का तस बनाये रखने के लिए हर संभव कदम उठायेगी और जरुरत होने पर अध्यादेश भी जारी करेगी। उन्होंने कहा कि इस कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया है। उससे लोगों में सही संदेश नहीं गया और अशांति फैली।
- उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति या जनजाति के लोगों पर अत्याचार से संबंधित मामले में अगर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से अनुमति मिलने के बाद उन पर कार्रवाई की जाएगी तो लोग रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराएंगे।
मोदी दलितों के हितैषी
- पासवान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दलितों के हितैषी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार क प्रयास से इस कानून में कुछ संशोधन किए गए हैं और इसे व्यापक बनाया गया।
- उन्होंने कहा कि हाल ही में गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों और अफसरों की बैठक में इस बात को माना गया है कि एससी-एसटी एक्ट दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए विशेष कानून है। इसकी तुलना किसी कानून से नहीं की जा सकती।
पदोन्नति और निजी क्षेत्र में आरक्षण पर अपनी स्थिति स्पष्ट करे विपक्ष
- पासवान ने कहा कि सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने , निजी क्षेत्र में आरक्षण को लागू करने तथा न्यायपालिका में जजों की नियुक्ति के लिए भारतीय न्यायिक सेवा के गठन को लेकर विपक्षी दलों को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
कोर्ट के फैसले से देश में गुस्सा- सरकार
- सरकार ने गुरुवार को लिखित जवाब दायर कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद संवेदनशील मुद्दे पर जो फैसला दिया, उससे देशभर में लोगों के बीच हलचल, गुस्सा और असहजता बढ़ी है। इसके अलावा कोर्ट के आदेश से जो भ्रम की स्थिति पैदा हुई है, उसे ठीक करने के लिए फैसले पर पुनर्विचार जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को एक्ट में किया था बदलाव
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसले के साथ आदेश दिया कि एससी/एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी न की जाए। इस एक्ट के तहत दर्ज होने वाले केसों में अग्रिम जमानत मिले। पुलिस को 7 दिन में जांच करनी चाहिए। सरकारी अधिकारी की गिरफ्तारी अपॉइंटिंग अथॉरिटी की मंजूरी के बिना नहीं की जा सकती।
कोर्ट ने सरकार की रिव्यू पिटीशन पर क्या कहा?
सुप्रीम कोेर्ट ने केंद्र सरकार की रिव्यू पिटीशन पर 3 मार्च को खुली अदालत में सुनवाई की। जहां कोर्ट ने अपने फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। सुनवाई में बेंच ने कहा- "हमने एससी-एसटी एक्ट के किसी भी प्रावधान को कमजोर नहीं किया है। लेकिन, इस एक्ट का इस्तेमाल बेगुनाहों को डराने के लिए नहीं किया जा सकता।"
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद हुआ था आंदोलन
- एससी/एसटी एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दलित संगठनों ने भारत बंद का बुलाया था। इसका असर सबसे ज्यादा 12 राज्यों में देखने को मिला। हिंसा में 15 लोगों की जान चली गई। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा 7, यूपी और बिहार में तीन-तीन, वहीं राजस्थान में 2 की मौत हुईं।
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