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वरिष्ठ पत्रकार, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमरीका जाने से पहले सीएनएन को दिए इंटरव्यू के संबंध में चंद बातें ऐसी थीं जिनका मैं ज़िक्र करना चाहूंगा.
नरेंद्र मोदी ज़्यादा पढ़े लिखे नहीं है फिर भी वे अपना बचाव करना जानते हैं.
किसी ऐसे सवाल पर जिसका जवाब शायद उनके पास ना हो, फिर भी वे कुछ ऐसी चीज़ें बोल देते हैं जिससे लगता है उनका नियंत्रण विषय पर है.
वरिष्ठ पत्रकार आकार पटेल का विश्लेषणजैसे इंटरव्यू में जब यूक्रेन के बारे में पूछा गया तो वो पूरी तरह से बच निकले.
मुसलमानों के लिए कही गई बात उनके लिए एक नई बात थी.
अमरीका के साथ उनके वीजा को लेकर जो तनाव के हालात थे वे नहीं रहे. वे एक आत्मविश्वास वाली स्थिति में हैं जहां से वे दुनिया के साथ भारत के रिश्ते को साफ़ तौर पर देखते हैं.
आत्मविश्वासपिछले आठ महीने से मीडिया के साथ बातचीत में भी मोदी ज़्यादा आत्मविश्वास से भरे नज़र आ रहे हैं.
बारह-तेरह साल पहले मीडिया जब नरेंद्र मोदी से बात करता था तो ऐसी बात नहीं थी. एक बार करण थापर के साथ इंटरव्यू के दौरान वे गोधरा के सवाल पर नाराज़ होकर चले गए थे.
ये आत्मविश्वास इस इंटरव्यू में भी नज़र आया. इस इंटरव्यू में 10 में 10 अंक लेते हुए नज़र आए.
भारतीय मुसलमानों पर उनकी टिप्पणी पिछले 13 साल वाले मोदी की छवि से बिल्कुल अलग है. उन्होंने यह समझा कि भारत के मुसलमानों और हिंदुओं के मसले एक जैसे है. यह एक अच्छी बात रही.
मोदी की व्यवहारिकताउपचुनावों के नतीजों ने भी भाजपा के लिए मोदी की अहमियत को साबित किया है. लव जिहाद जैसे मसलों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की जो सोच है उससे मैं इत्तेफाक नहीं रखता हूँ लेकिन मोदी कहीं से भी संघ से इस मसले पर अलग नहीं नज़र आते हैं.
उन्होंने कभी भी संघ की सोच ना नकारी है और ना ही उसे दूर रखा है.
मोदी जापान के प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे के साथ
मोदी की नकारात्मक छवि लेकिन अब उस तरह से नहीं रहीं. मुख्यमंत्री के तौर पर गोधरा के साथ जो एक छवि बनी थी वो अब नहीं रही है. वे गोधरा से आगे निकल चुके हैं.
ये इंटरव्यू में भी साफ़ तौर पर देखने को मिला. अमरीका दौरे पर भी उन्हें बहुत तवज्जो मिलने वाली है. पिछले दिनों की तुलना में चीन के प्रति हाल में नरमी बरतना मोदी की व्यवहारिकता दर्शाता है.
उन्होंने इस मसले पर एक परिपक्वता दिखाई है. मैं इतने कम दिनों में उनके अंदर इतनी परिपक्वता आने पर आश्चर्यचकित हूँ.
(बीबीसी संवाददाता स्वाति बक्शी से बातचीत पर आधारित)
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