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डाउनलोड करेंज़ुबैर अहमद
बीबीसी संवाददाता
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भारत और अमरीका के बीच संबंधों का वर्णन करते हुए कहा था कि ये \"21वीं सदी की निर्णायक साझेदारियों में से एक होगी.\"
लेकिन भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े की न्यूयॉर्क में गिरफ़्तारी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में दरार पड़ गई.
अब 26 सितम्बर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमरीका यात्रा के अवसर पर इस रिश्ते में नई जान फूंकने की कोशिश की जाएगी.
दोनों देशों में प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को लेकर काफ़ी उत्साह है.
पढ़ें ज़ुबैर अहमद का विश्लेषणइस बात की पूरी सम्भावना है कि मोदी-ओबामा शिखर सम्मलेन में अहम समझौतों का एलान हो.
लेकिन दोनों के पास एक दूसरे से मांगों की एक सूची होगी जिनकी स्वीकृति से समझौते में मदद मिल सकती है.
पांच मांगे!नरेंद्र मोदी क्या चाहते हैं बराक ओबामा से? उनकी मांगों में से पांच अहम माँगें ये हो सकती हैं:
1. नरेंद्र मोदी ने चुनाव प्रचार के समय विकास का नारा बुलंद किया था. विकास के लिए भारत को भारी अमरीकी निवेश की ज़रुरत होगी.
जापान और चीन से निवेश के समझौते के बाद मोदी अब अमरीका से भी भारी निवेश की मांग कर सकते हैं.
2. ये सबको मालूम है कि भारत संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य बनना चाहता है. अमरीका इस सिलसिले में भारत की अवश्य मदद कर सकता है.
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की तरह मोदी भी चांहेंगे कि ओबामा भारत की मदद करें.
3. मोदी निश्चित तौर पर चाहेंगे कि ओबामा पाकिस्तान स्थित चरमपंथी संगठनो के विरुद्ध निर्णायक क़दम उठाए, जिनमें उनके अवैध वित्तिय समर्थन के ज़रियों को रोकने के लिए ठोस क़दम उठाना शामिल है.
प्रधानमंत्री की ये भी मांग होगी कि मुंबई में 2008 में हुए चरमपंथी हमले के मुख्य अभियुक्त डेविड हेडली से पूछताछ की भारत को इजाज़त दी जाए. हेडली इस समय अमरीकी जेल में क़ैद हैं.
4. अमरीकी \'सीनेट बिल 744\' जापान और यूरोपीय देशों की तुलना में भारतीय आईटी कंपनियों को समानता नहीं देता है.
भारतीय आईटी कंपनियों की न्यूनतम शुल्क की मांग के विपरीत ये बिल उनके साथ दोहरा व्यवहार करता है.
प्रधानमंत्री मोदी की मांग होगी कि भारतीय कंपनियों के साथ इस दोहरे सुलूक को ख़त्म किया जाए.
5. एडवर्ड स्नोडेन के रहस्योद्घाटन के मद्देनज़र भाजपा नेताओं पर अमरीका द्वारा जासूसी के मुद्दे को भी मोदी ओबामा के साथ अपनी मुलाक़ात में उठा सकते हैं.
स्नोडेन के अनुसार अमरीका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी ने जिन छह विदेशी सियासी पार्टियों पर जासूसी की थी उनमें भाजपा भी शामिल थी.
इस मुद्दे को भाजपा सरकार ने अमरीकी अधिकारियों के सामने रखा है. अमरीका इसकी छानबीन करने पर राज़ी नज़र आता है
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