महिलाओं में घुटनों के दर्द की आशंका ज्यादा
घुटनों का दर्द [भाग-1]
आ ज घुटनों की खराबी महिलाओं की एक आम समस्या बन गई है। आधुनिक जीवन शैली ने दिनचर्या और खानपान की आदतों में ऐसा बदलाव किया है कि युवा महिलाएं भी तेजी से इसकी शिकार हो रही हैं। जानिए
क्या हैं महिलाओं में घुटने खराब होने के कारण।
वजन अधिक होना
वजन बढ़ने से घुटनों पर दबाव ज्यादा पड़ता है। आपका वजन जितना अधिक होगा उससे पांच गुना अधिक घुटनों पर दबाव पड़ेगा। अगर आपका वजन सामान्य से 5 किलो अधिक है तो घुटनों पर 25 किलो अधिक दबाव पड़ता है।
निष्क्रिय जीवनशैली
जो महिलाएं शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं रहतीं उनकी मांसपेशियां कमजोर और कम लचीली हो जाती हैं। जब नी-कैप, हिप और पेल्विस के आसपास की मांसपेशियां शक्तिशाली होती हैं, तो ये घुटनों को स्टेबल और बैलेंस्ड रखती हैं, उन्हें बेहतर सपोर्ट देती हैं और इन पर पड़ने वाले दबावों को रोकती हैं।
दर्द की अनदेखी करना
घुटनों में अगर लगातार दर्द हो रहा हो, सूजन आ रही हो या उन्हें मोड़ने में समस्या हो रही हो तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। अधिक समय तक अनदेखा करने से घुटने खराब हो सकते हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस रिसर्च सोसायटी इंटरनेशनल के अनुसार, अगर एक वर्ष से अधिक समय तक घुटनों में दर्द रहता है तो उसका कारण सामान्यत: ऑस्टियोअर्थराइटिस होता है।
चोट भी है बड़ा कारण
अगर घुटनों पर चोट लगी है तो उसका तुरंत इलाज कराएं, समय रहते इलाज नहीं कराया तो भविष्य में दर्द का खतरा बढ़ सकता है। घुटनों के लिगामेंट्स खिंच जाना या टूट जाना भी घुटनों की खराबी का कारण बन सकते हैं।
जरूरत से ज्यादा व्यायाम
ज्यादा एक्सरसाइज और रनिंग से नी-कैप और टेंडन पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे उनके डैमेज होने की आशंका बढ़ जाती है।
अार्थराइटिस
अार्थराइटिस के कारण शरीर के सभी जोड़ प्रभावित होते हैं, लेकिन घुटनों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ता है। इसके कारण जोड़ों में सूजन के साथ तेज दर्द हो सकता है। अार्थराइटिस एक लगातार गंभीर होने वाली समस्या है। कई बार सर्जरी ही एकमात्र विकल्प बचता है।
महिलाओं में समस्या ज्यादा
महिलाओं के घुटने पुरुषों की तुलना में अधिक खराब होते हैं, इसके चार प्रमुख कारण हैं। पहला, महिलाओं की शारीरिक संरचना ऐसी होती है कि उनके जोड़ों की गतिशीलता अधिक होती है, लिगामेंट्स भी अधिक लचीले होते हैं, जिससे वो घुटनों का मूवमेंट अधिक करती हैं और दर्द होने की आशंका बढ़ जाती है। दूसरा, घुटनों को स्वस्थ रखने में फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मासिक चक्र के दौरान और मीनोपॉज के पश्चात एस्ट्रोजन के स्तर में कमी आ जाती है। एस्ट्रोजन का स्तर कम होने से घुटनों के जोड़ों को सहारा देने वाले गद्देदार कार्टिलेज की मोटाई कम होती है। तीसरा, महिलाएं, पुरुषों की तुलना में मोटापे की शिकार अधिक होती हैं, इस कारण दबाव पड़ने से घुटने खराब होते हैं। चौथा, महिलाएं पुरुषों की तुलना में बोन मास जल्दी खोती हैं, इससे उनकी हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और जोड़ों के खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
भाग दो में पढ़ें घुटनों की समस्या के निदान।
डाॅ. ईश्वर बोहरा, आर्थोपेडिक, बीएलके सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, नई दिल्ली
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