वन कानून में संशोधन से 10 करोड़ से ज्यादा वन आश्रितों के हक खतरे में

News - वन अधिकार रक्षा मंच ने अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर शनिवार को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। मंच का कहना है...

Oct 13, 2019, 07:50 AM IST
वन अधिकार रक्षा मंच ने अपनी चार सूत्री मांगों को लेकर शनिवार को राजभवन के समक्ष एक दिवसीय धरना दिया। मंच का कहना है कि केंद्र सरकार ने 2 बड़े नीतिगत कदम उठाए हैं जिससे 10 करोड़ से ज्यादा वन आश्रित समुदाय के परंपरागत हक और आजीविका खतरे में आ गए हैं। अंग्रेजों के जमाने से आज तक किसी सरकार ने इतनी व्यापक हमला वन आश्रित समुदायों पर नहीं किया जितना मौजूदा सरकार करना चाह रही है। मंच के संयोजक प्रेमचंद्र मुर्मू ने कहा कि आगामी विधान सभा चुनाव में राजनीतिक पार्टियां इस मुद्दे पर अपना नजरिया स्पष्ट करे। वहीं, जेएमएम के अंतु तिर्की ने कहा कि आदिवासी जल, जंगल-जमीन की रक्षा करते हैं, लेकिन अब इससे ही खतरा बताया जा रहा है। वन की रक्षा के लिए सबको एकजुट होकर नए कानून के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया।

मौके पर फादर जार्ज मनोपल्ली, प्रभाकर तिर्की, एलिना होरो, भाय भंजन महतो, संजय कुजूर, शोभा यादव, प्रभाकर नाग और संजय कुजूर सहित विभिन्न जिलों के लोग काफी संख्या में मौजूद थे।

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