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डॉक्टर को जगाने के लिए चिल्लाए-पत्थर फेंके फिर भी गेट नहीं खोला, हुई डिलिवरी तो नवजात बचा लेकिन मां का साया छिना

3 वर्ष पहले
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चित्तौड़गढ़ (राजस्थान). गुरुवार-शुक्रवार की रात में तीन बजे एक प्रसूता हॉस्पिटल के बाहर तड़पती रही। हॉस्पिटल खुला था, लेकिन डॉक्टर नहीं थे। परिजनों ने डॉक्टर को जगाने के लिए आवाजें लगाईं, पत्थर भी फेंके, लेकिन दरवाजा नहीं खुला। मजबूरन प्रसूता को रिटायर्ड कंपाउंडर के यहां ले गए। उसने बेटे को जन्म दिया, जिससे कुछ पल के लिए परिजनों में खुशी का माहौल हो गया। प्रसूता को घर ले गए। प्रसव सही से न होने के कारण करीब तीन घंटे बाद ज्यादा ब्लीडिंग होने से प्रसूता की मौत हो गई। ये था पूरा मामला...

 

परिजनों के मुताबिक, शहर के देवपुरा निवासी 30 वर्षीय समुंदर देवी को गुरुवार रात दो बजे प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने 108 पर कॉल किया, लेकिन नेटवर्क नहीं मिलने से कॉल नहीं हो पाई। जैसे-तैसे किराए की जीप से सात किमी दूर चित्तौड़गढ़ के आदर्श पीएचसी पर करीब रात ढाई से तीन बजे के बीच पहुंचे। अस्पताल में कोई डॉक्टर नजर नहीं आया। समुंदर को पीड़ा तेज होने लगी। आनन-फानन में डॉक्टर के निवास पर लेकर पहुंचे। अंत में जावदा में ही एक सेवानिवृत्त कंपाउंडर के क्लिनिक पर लेकर पहुंचे। 

 

खून इतना बहा कि जीप की सीटें सन गई

 

जिस जीप में समुंदर देवी को जावदा से देवपुरा प्रसव के बाद लाया गया। उसके ड्राइवर हीरालाल धाकड़ ने बताया कि शुक्रवार सुबह जब जीप की सफाई करने लगा तो पाया कि जीप की सीटें खून से सनी हुई थीं। इसका कारण प्रसूता को अधिक ब्लीडिंग होना था। परिजनों का कहना है कि यदि समय रहते इलाज मिल जाता तो शायद वो बच जाती। परिजनों का आरोप है कि यह विभाग की लापरवाही से हुआ है।

 

एक्सपर्ट - डॉक्टर की मौजूदगी में प्रसव होता तो शायद बच जाती जान

 

भास्कर ने स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विशेषज्ञों से बातचीत की तो सामने आया कि यहां नियुक्त डॉक्टर की मौजूदगी में यदि समुंदर देवी का प्रसव होता तो ज्यादा ब्लीडिंग नहीं होती या फिर जटिलता होने पर रैफर भी किया जा सकता था, इससे प्रसूता की जान बच सकती थी, लेकिन डॉक्टर ने दरवाजा ही नहीं खोला तो परिजन मजबूरन प्रसूता को कंपाउंडर के यहां ले गए। जहां उचित चिकित्सा के अभाव में समुंदर देवी को अधिक ब्लीडिंग होती रही। इधर, मृतका के पति हेमराज भील सहित परिजनों ने आरोप लगाया कि काफी आवाज लगाने और दरवाजे पर पत्थर मारने के बाद भी  डॉक्टर ने दरवाजा नहीं खोला, डॉक्टर की यह लापरवाही भी समुंदर देवी मौत के लिए काफी हद तक जिम्मेदार है।

 

 

जिम्मेदारों का तर्क... स्टाफ लापरवाही मानने को तैयार नहीं, कलेक्टर ने जांच की बात कही

 

बीसीएमओ डॉ. जीजे परमार का कहना है कि पता चला कि वे लोग गर्भवती को लेकर जावदा गए थे, लेकिन पीएचसी के डॉक्टर से संपर्क नहीं किया। दूसरे दिन पता चला कि अधिक खून बहने से मौत हुई। पीएचसी के डॉ. सुधेश राघव का कहना है कि  108 पर कॉल नहीं आया। मेरे निवास पर लाने की कोई जानकारी नहीं है। कलेक्टर इंद्रजीत सिंह का कहना है कि मामला गंभीर है। पूरी रिपोर्ट ली जाएगी। जांच के आधार पर कार्रवाई भी होगी।