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जिस समस्या का हल हमारे हाथ में न हो उसके बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए

प्रोफेसर ने पानी से आधा भरा गिलास उठाया और स्टूडेंट्स से पूछा कि- ये गिलास कितना भारी है?

Danik Bhaskar | May 12, 2018, 05:00 PM IST

रिलिजन डेस्क। विदेश के एक कॉलेज में मनोविज्ञान के प्रोफेसर अपने स्टूडेंट्स को तनाव कम करने के विषय पर लेक्चर दे रहे थे। प्रोफेसर ने अपनी टेबल पर रखा पानी से आधा भरा गिलास उठाया और स्टूडेंट्स से पूछा कि- ये गिलास कितना भारी है?
सभी स्टूडेंट्स ने अलग-अलग जवाब दिए। अध्यापक ने कहा- मेरी नजर में इस गिलास का कितना वजन है यह मायने नहीं रखता। बल्कि यह मायने रखता है कि इस गिलास को मैं कितनी देर पकड़े रखता हूं।
अगर मैं इस गिलास को 1-2 मिनट पकड़े रखता हूं, तो यह हल्का लगेगा, अगर मैं इसे एक घंटे पकड़े रखूंगा तो इसके वजन से मेरे हाथ में दर्द होने लगेगा। और अगर मैं इसे पूरे दिन पकड़े रखूंगा तो मेरा हाथ एकदम सुन्न पड़ जाएगा।
इसके बाद प्रोफेसर ने स्टूडेंट्स से कहा कि- हमारे जीवन की चिंताएं और तनाव भी इसी तरह हैं। इन्हें थोड़े समय के लिए सोचो तो कुछ नहीं होता, थोड़े ज्यादा समय के लिए दिमाग में रखोगे तो सिरदर्द होने लगेगा। लेकिन दिन भर सोचने से हम डिप्रेशन में चले जाएंगे।
कोई भी घटना या परिणाम हमारे हाथों में नहीं है, लेकिन हम उसे किस तरह हैंडल करते हैं, ये हमारे हाथों में है। बस जरूरत है इस बात को समझने की।

सीख
जब किसी समस्या का हल हमारे हाथ में न हो तो उसके बारे में ज्यादा नहीं सोचना चाहिए। इससे हमारी कार्यक्षमता और क्रिएटिविटी पर नेगेटिव असर पड़ेगा। और ये भी हो सकता है कि हम डिप्रेशन में आकर कोई गलत कदम उठा लें।