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वह मीठी आवाज सुनकर उन्होनें सारथी से रथ धीमा करने को कहा और बांसुरी के स्वर के पीछे जाने का इशारा किया।

Danik Bhaskar | May 11, 2018, 11:31 AM IST

रिलिजन डेस्क। किसी समय भारत में समुद्रगुप्त नाम के प्रतापी राजा थे। वे अपने राज्य का पालन अच्छी तरह से करते थे। एक बार उनके राज्य में भयानक अकाल पड़ गया। प्रजा की दुर्दशा देख राजा भी चिंतित रहने लगे। एक दिन राजा इसी चिंता में वन की ओर निकल पड़े। तभी उन्हें कहीं से बांसुरी का स्वर सुनाई दिया।

बांसुरी की मीठी आवाज सुनकर राजा ने सारथी को उस ओर जाने के लिए कहा। कुछ दूर जाने पर राजा ने देखा कि एक युवक पेड़ों के नीचे बैठकर बांसुरी बजा रहा था और उसके कुछ साथी खेत में बीज बो रहे थे। राजा ने बांसुरी बजा रहे युवक से पूछा कि तुम लोग ये क्या कर रहे हो? उस युवक ने बताया कि जल्दी ही बारिश का मौसम शुरू होने वाला है, इसलिए हम बीज बो रहे हैं। ताकि फसल अच्छी हो।

राजा ने उस युवक से पूछा कि क्या तुम्हें यकीन है, इस बार बारिश होगी? युवक ने कहा कि ये तो हमें नहीं पता, लेकिन जो हमारा काम है, उसे हम पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं। बारिश होना या न होना तो ईश्वर के हाथ में है। युवक की बात सुनकर राजा को भी अपने कर्तव्य का ज्ञान हुआ और उसने सोचा कि व्यर्थ चिंता करने से कुछ नहीं होगा। मुझे इस समय अपना कर्तव्य पूरा करते हुए प्रजा की मदद करनी चाहिए। तब राजा ने अपनी प्रजा के लिए अपना खजाना खोल दिया और जगह-जगह कुएं खुदवाए। जल्दी ही बारिश भी होने लगी और अकाल खत्म हो गया। प्रजा को सुखी देख राजा की चिंता भी खत्म हो गई।

सीख

जिस समस्या का हल आपके हाथ में नहीं, उसके लिए व्यर्थ चिंतित नहीं होना चाहिए। बस अपना काम ईमानदारी से करते रहें। जल्दी ही समस्या समाप्त हो जाएगी।

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