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जानिए स्वामी विवेकानंद को कब और कैसे मिला मुसीबतों को दूर करने का ये मूलमंत्र

स्वामी विवेकानंद के जीवन से जुड़े प्रेरक प्रसंगों की सीख अपने जीवन में उतार लेने से हम भी परेशानियों से बच सकते हैं।

Danik Bhaskar | Apr 19, 2018, 05:08 PM IST

रिलिजन डेस्क। जीवन में मुसीबतों का आना-जाना लगा रहता है। कुछ लोग मुसीबतों से घबराते हैं और इनसे बचने की कोशिश करते हैं। ऐसे में मुसीबत तो दूर नहीं होती, बल्कि परेशानियां और अधिक बढ़ जाती हैं। यहां जानिए स्वामी विवेकानंद से संबंधित एक चर्चित प्रसंग, इस प्रसंग में ये बताया गया है कि जब हमारे सामने मुसीबत आ ही जाए तो हमें क्या करना चाहिए...

एक संन्यासी ने दिया मूलमंत्र

- एक बार स्वामी विवेकानंद मां दुर्गा के मंदिर से बाहर निकल रहे थे, तभी वहां मौजूद बहुत सारे बंदरों ने उन्हें घेर लिया। बंदर स्वामीजी से प्रसाद छिनने लगे और स्वामीजी उनसे डरने लगे।

- स्वामीजी खुद को बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। सभी बंदर भी उनके पीछे-पीछे दौड़ने लगे।

- मंदिर के पास ही एक वृद्ध संन्यासी बैठे थे। वे ये सब देख रहे थे। वृद्ध संन्यासी ने स्वामीजी को रोका और कहा- ‘रूको। डरो मत, उनका सामना करो।‘

- वृद्ध संन्यासी की ये बात सुनकर स्वामीजी भी बंदरों के ओर बढ़ने लगे। जैसे स्वामीजी बंदरों की ओर बढ़ने लगे तो सभी बंदर वहां से भाग गए।

- इसके बाद उन्होंने वृद्ध संन्यासी को धन्यवाद दिया।

- स्वामीजी को को इस घटना से गंभीर सीख मिली थी। बहुत समय बाद उन्होंने एक व्याख्यान में इस घटना का जिक्र भी किया था और कहा था कि अगर हम कभी किसी चीज से डरते हैं तो उससे भागना नहीं चाहिए, बल्कि पलटकर उसका सामना करना चाहिए।

अगर आप भी अपने जीवन में इस बात को हमेशा याद रखेंगे तो आपकी परेशानियां भी दूर हो सकती हैं और आप भी सफलता के शिखर पर पहुंच सकते हैं।