सांसद महेश पोद्दार का विरोधियों से सवाल ; स्थानीयता के लिए 1932 का खतियान तो नागरिकता के लिए पड़ताल क्यों नहीं

News - चैंबर भवन में बुधवार को संशोधित नागरिक कानून (सीएए) पर परिचर्चा हुई। इसमें शहर के उद्यमी, व्यापारी और बुद्धिजीवी...

Jan 16, 2020, 07:36 AM IST
Ranchi News - mp mahesh poddar questions opponents 1932 khatian for localism so why not check for citizenship
चैंबर भवन में बुधवार को संशोधित नागरिक कानून (सीएए) पर परिचर्चा हुई। इसमें शहर के उद्यमी, व्यापारी और बुद्धिजीवी शामिल हुए। परिचर्चा में राज्यसभा सांसद महेश पोद्दार ने कहा कि सभी मोर्चों पर भाजपा से पराजित हो चुका विपक्ष, अब सीएए और एनअारपी की आड़ में मोदी सरकार व देश को अस्थिर करने पर तुला है। खासकर कांग्रेस, मुस्लिम लीग व कम्युनिस्ट धर्म के नाम पर हिंदू-मुसलमान को लड़ाकर देश को अशांत करना चाहते हैं। भारत को विश्व की अग्रणी ताकत बनता देख कांग्रेस बौखला गई है। वह जाने-अनजाने प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान की मदद कर रही है। इससे पूर्व परिचर्चा की शुरुआत करते हुए सांसद संजय सेठ ने कहा, दशकों और सदियों से लंबित समस्याओं को एक के बाद एक हल करने के कारण मोदी सरकार विपक्ष की आंखों की किरकिरी बन गई है। उन्होंने कहा कि सीएए से भारत के किसी भी नागरिक की नागरिकता जाने का सवाल ही नहीं उठता। इधर, एक सवाल के जवाब में महेश पोद्दार ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन का बयान आया है कि झारखंड में 1932 के खतियान के आधार पर स्थानीयता तय होगी। सोचनेवाली बात यह है कि झारखंड का स्थानीय निवासी या दूसरे शब्दों में कहें कि नागरिक होने के लिए 1932 के खतियान की जरूरत है, लेकिन इस देश में गैरकानूनी तरीके से घुस आए हर आदमी को बगैर किसी दस्तावेज के ही नागरिकता दे दी जाए, यह कैसे हो सकता है। परिचर्चा के दौरान बुद्धिजीवियों, उद्यमियों और व्यापारियों ने कई प्रश्न भी पूछे जिनका दोनों सांसदों ने उत्तर देकर उनकी शंकाओं का समाधान किया।

भ्रम दूर करने की कोशिश...देश के किसी मुस्लिम से कोई उनका हक नहीं छीन रहा

पोद्दार ने कहा कि देश के किसी मुस्लिम से कोई उनका अधिकार नहीं छीन रहा है, लेकिन अफगानिस्तान, पाकिस्तान व बांग्लादेश का कोई मुस्लिम भी हमारे कानून के आधार पर नागरिकता के लिए आवेदन करता है, तो हम उस पर भी विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त की 2016 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में दो लाख से अधिक शरणार्थी रह रहे हैं। भारत विभाजन के बाद 1947 में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की संख्या 23 फीसदी थी, जो 2011 में घटकर 3.7 फीसदी हो गई है। इसी अवधि में बांग्लादेश में अल्पसंख्यक 22 फीसदी से घटकर 7.8 फीसदी पर पहुंच गए। दूसरी ओर, भारत में 1951 में हिंदू 84 प्रतिशत थे, जो 2011 में घटकर 79 फीसदी रह गए। जबकि, अन्य देशों में वहां के बहुसंख्यकों की संख्या बढ़ी है। 1951 में भारत में मुसलमानों की संख्या 9.8 फीसदी थी, जो आज बढ़कर 14.23 फीसदी हो गई है।

संजय बोले-सीसीए के जरिए मोदी सरकार ने कांग्रेस की गलतियां सुधारी

संजय सेठ ने कहा, सीएए के जरिए मोदी सरकार कांग्रेस की गलतियों को सुधारा है। यदि आजादी के वक्त कांग्रेस ने धर्म के आधार पर देश का विभाजन न किया होता, तो आज यह कानून लाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के मोहम्मद लियाकत अली के बीच समझौता हुआ था कि दोनों देशों में अल्पसंख्यकों को संरक्षण दिया जाएगा। भारत ने इसका पालन किया, लेकिन पाकिस्तान में पालन नहीं हुआ। वहां हिंदू, सिख, ईसाई व बौद्ध धर्म माननेवालों को प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अजीब स्थिति है कि जिस कांग्रेस ने सदैव पड़ोसी देशों में प्रताड़ना के शिकार गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने की वकालत की, वही आज वोट बैंक लिए सीएए का विरोध कर रही है।

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