पिछले साल 106 लाख करोड़ रु. की रिहायशी संपत्ति बिकी

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Feb 15, 2020, 07:51 AM IST
{एजेंटों ने 5.35 लाख करोड़ रुपए का कमीशन कमाया

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इधर, जिलो, रेडफिन जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म ने खरीदारों को स्वयं सर्च की सुविधा उपलब्ध कराई है लेकिन बिचौलियों की फीस कम नहीं हुई है। संपत्ति के बाजार में घिसे-पिटे तरीकों के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। एजेंट की फीस, सरकारी टैक्स मिलाए जाएं तो संपत्ति के कुल मूल्य का 10% से अधिक खर्च पड़ता है। इस कारण लोग लंबे समय तक घर नहीं बेचना चाहते हैं। 1950 में 20% परिवार यहां से वहां होते थे। आज यह केवल 9% है। कई पुरानी प्रथाओं के प्रचलन से संपत्ति बेचने और खरीदने वाले की तुलना में एजेंट को अच्छा फायदा होता है। विक्रेता को आमतौर पर अपने और खरीदार के एजेंट को फीस देनी पड़ती है। अन्य देशों में ऐसा नहीं चलता है।

अमेरिकी सरकार के नियामकों ने 2008 में इंडस्ट्री पर गहराई से नजर डाली थी। अब फिर से जांच चल रही है। न्याय विभाग ने कुछ प्राइवेट कंपनियों से पता लगाने के लिए कहा है कि क्या संपत्ति के एजेंट फीस अधिक लेते हैं या ग्राहकों को अधिक फीस वाली संपत्ति बताते हैं। रियल एस्टेट इंडस्ट्री के खिलाफ दो मुकदमे दायर किए गए हैं। इधर, कई कंपनियां संपत्ति के बाजार में आ रही हैं। 2019 में 42 हजार करोड़ रुपए से अधिक की पूंजी टेक्नोलॉजी पर आधारित कंपनियों में लगाई गई है। ओपनडोर और जिलो के एल्गोरिथम घर का मूल्य तय करते हैं। बेचने वाले को कुछ दिन के भीतर नकद पैसा देेते हैं। अन्य कंपनियों ने एजेंट का काम बेहतर करने की टेक्नोलॉजी पेश की है।

{भारी कमीशन के कारण संपत्ति का कारोबार प्रभावित

अमेरिका में रिहायशी संपत्ति के मूल्य आसमान पर पहुंच गए हैं। विवाह और करिअर शुरू करने के बाद अधिकतर लोगों के लिए घर खरीदने या बेचने का निर्णय सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण होता है। देश की रिहायशी संपत्ति का मूल्य 2414 लाख करोड़ रुपए आंका गया है। यह पब्लिक लिस्टेड कंपनियों के बराबर है। पिछले साल लोगों ने 106 लाख करोड़ रुपए की संपत्तियों का कारोबार किया है। अमेरिका में अन्य उद्योगों और अन्य देशों की तुलना में संपत्ति खरीदना और बेचना बहुत जटिल काम है। इंडस्ट्री में टेक्नोलॉजी का उपयोग बहुत कम हो रहा है। सेलेब्रिटी एजेंट के उभरने को पिछले दस साल का एकमात्र क्रांतिकारी परिवर्तन कह सकते हैं। ये मिलियन डॉलर लिस्टिंग, फ्लिप ऑर फ्लॉप जैसे रियलिटी टीवी शो के स्टार हैं।

रियल एस्टेट इंडस्ट्री में कमीशन हैरान कर देने वाला है। किसी संपत्ति के मूल्य का 5-6% कमीशन लिया जाता है। अन्य विकसित देशों की तुलना में यह तीन गुना अधिक है। पिछले वर्ष एजेंटों के हिस्से में 5.35 लाख करोड़ रुपए से अधिक कमीशन गया है। यह जीडीपी का 0.4% है। सरकारी टैक्स, और अन्य फीस मिलाकर शेयर, किराना, एडवरटाइजिंग सहित अन्य कारोबारों में टेक्नोलॉजी से बदलाव हुआ है। लेकिन, संपत्ति के कारोबार में पुराने तौरतरीके जारी हैं। अमेरिका में 20 लाख एजेंट हैं।

इधर, जिलो, रेडफिन जैसे ऑनलाइन प्लेटफार्म ने खरीदारों को स्वयं सर्च की सुविधा उपलब्ध कराई है लेकिन बिचौलियों की फीस कम नहीं हुई है। संपत्ति के बाजार में घिसे-पिटे तरीकों के इस्तेमाल से अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ा है। एजेंट की फीस, सरकारी टैक्स मिलाए जाएं तो संपत्ति के कुल मूल्य का 10% से अधिक खर्च पड़ता है। इस कारण लोग लंबे समय तक घर नहीं बेचना चाहते हैं। 1950 में 20% परिवार यहां से वहां होते थे। आज यह केवल 9% है। कई पुरानी प्रथाओं के प्रचलन से संपत्ति बेचने और खरीदने वाले की तुलना में एजेंट को अच्छा फायदा होता है। विक्रेता को आमतौर पर अपने और खरीदार के एजेंट को फीस देनी पड़ती है। अन्य देशों में ऐसा नहीं चलता है।

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