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10वीं पास, लेकिन गणित विषय में फेल; 1 लाख उम्मीदवारों को नौकरी पाने में आ रही दिक्कत

एक वर्ष पहले
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अब योजना को खत्म करने की तैयारी कर रहा स्कूल शिक्षा विभाग

10वीं पास की मार्कशीट है, लेकिन गणित विषय में फेल होने की वजह से अार्मी की भर्ती में सिलेक्शन नहीं हाे सका। बैंक की प्रतिस्पर्धी परीक्षा भी नहीं दे पा रहे हैं। 2017-18, 2018-19 में 10वीं पास करने वाले कई छात्रों काे ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा। इसकी वजह- बेस्ट अॉफ फाइव याेजना है। मप्र में सत्र 2017-18 में 10वीं के विद्यार्थयाें के लिए यह याेजना शुरू की गई है। इसके तहत यदि छात्र 5 विषय में पास है और गणित में फेल है तो भी वह पास ही माना जाता है। रिजल्ट सुधारने व अात्महत्या के बढ़ते मामलाें काे राेकने के उद्देश्य से तत्कालीन सरकार ने यह याेजना लागू ताे कर दी, लेकिन अब इसके साइड इफेक्ट नजर अाने लगे हैं। इसी के चलते स्कूल शिक्षा विभाग इस याेजना काे खत्म करने की तैयारी कर रहा है। प्रदेश में 1 लाख से ज्यादा विद्यार्थी इस योजना का लाभ ले चुके हैं, जो अब परेशान हो रहे हैं।

समीक्षा ... बैठक में समिति बनाकर किया था मंथन

पिछले दिनों संचालनालय में बैठक बुलाकर इस याेजना की समीक्षा की गई थी। इस दौरान विभाग ने ज्ञानपुंज दल के सदस्याें एवं प्राचार्यों की एक समिति बनाकर विचार किया था। इसमें यह निर्णय लिया गया है कि प्रदेश में बेस्ट ऑफ फाइव स्कीम के स्थान पर विद्यार्थियों को सामान्य गणित एवं उच्च गणित विषय का विकल्प दिया जाना चाहिए।

तो फिर देना पड़ सकता है पेपर... विशेषज्ञ रमाकांत पांडे कहते हैं यदि याेजना खत्म हुई ताे माशिमं द्वारा संचालित 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों को अगले सत्र से गणित-अंग्रेजी विषय का पेपर देना पड़ सकता है। 10वीं की परीक्षा में हर साल अाैसतन 8 लाख विद्यार्थी शामिल हाेते हैं। सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद पिछले एक दशक से 10वीं का रिजल्ट सुधर नहीं पा रहा था।


मसौदा तैयार है, शासन स्तर पर ही होगा निर्णय

यह कमी...शिक्षक भी नहीं करते दायित्वों का निर्वहन

समीक्षा बैठक के दौरान यह भी पाया गया था कि दसवीं कक्षा में बेस्ट ऑफ फाइव योजना लागू होने के बाद छात्रों को जिन विषयों में कम अंक आने की संभावना होती है, वे छात्र अंग्रेजी अथवा गणित विषय में रुचि नहीं लेते हैं। इस कारण शिक्षक भी अपने दायित्वों का निर्वहन ठीक तरह से नहीं कर रहे हैं। इससे भी यह योजना प्रभावित हो रही है।

सुधार... बेस्ट ऑफ फाइव से एेसे आया था रिजल्ट में अंतर

बेस्ट ऑफ फाइव योजना लागू होने के बाद 2017-18 में 10वीं का रिजल्ट 66 प्रतिशत रहा था, वहीं पिछले वर्ष भी 10वीं कक्षा में 61.32 प्रतिशत विद्यार्थी पास हुए थे। माध्यमिक शिक्षा मंडल के अनुसार इन दो वर्षों में अधिकांश विद्यार्थियों ने गणित एवं अंग्रेजी की परीक्षा नहीं दी या उन्होंने परीक्षा तो दी पर सबसे कम अंक होने से उन्हें रिजल्ट में शामिल नहीं किया गया।

समझें...याेजना का सही मतलब- जिन 6 विषयाें में परीक्षा ली जाती है, उनमें से जिन 5 विषयाें में अधिकतम अंक हाेंगे, उन्हें महायाेग में शामिल कर परीक्षाफल घाेषित किया जाता है। इन 5 विषयाें में सैद्धांतिक एवं प्रायाेगिक/ प्राेजेक्ट में अलग-अलग पास हाेना जरूरी है। 6वां विषय, जिसमें सबसे कम नंबर मिले हाेंगे महायाेग में गणना नहीं हाेगी।


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