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बड़वानी के नवलपुरा में 15, ठीकरी के मल्हार चौक में 33 गाड़े खींचे जाएंगे
जिले के ठीकरी में गाड़ा खिंचाई की परंपरा 825 साल पहले शुरू हुई थी, जिसे अब भी निभाया जा रहा है। होलिका दहन के दूसरे दिन पड़वा पर गाड़ा खिंचाई कार्यक्रम आयोजित होगा। बड़वानी के नवलपुरा में 15 व ठीकरी के मल्हार चौक में 33 गाड़े खींचे जाएंगे। सभी को एक-दूसरे से बांधा जाएगा और एक व्यक्ति (बड़वा) इन्हें एक साथ खिंचेगा। कार्यक्रम को लेकर सोमवार को अंतिम तैयारियां की गई। इन दोनों ही स्थानों के अलावा अंजड़ और पाटी में भी गाड़ा खिंचाई होगी।
आयोजनकर्ताओं ने बताया खांडेराव महाराज और बाबा फकरुद्दीन के आशीर्वाद से 825 साल पहले जिले के ठीकरी में गाड़ा खींचने की परंपरा शुरू हुई थी। इसके बाद से ये परंपरा बड़वानी, अंजड़ सहित जिले के अन्य कुछ गांवों में शुरू हुई। ठीकरी में इस परंपरा को निभाने में एक ही परिवार की 15 पीढ़ियां बीत चुकी हैं। 16वीं पीढ़ी के एडू यादव मंगलवार को गाड़ा खिंचेंगे। एडू यादव 39 साल से बड़वा के रूप में गाड़ा खिंचाई कर रहे हैं। वहीं बड़वानी में राकेश यादव गाड़ा खिंचाई करेंगे। ये पिछले 11 साल से गाड़ा खिंचाई कर रहे हैं।
एक ही परिवार की 15 पीढ़ियां बीती, 16वीं पीढ़ी के एडू यादव खिंचेंगे गाड़ा
गाड़ा खिंचाई को लेकर तैयारी करते हुए।
ठीकरी : ताम्रपात्र में लिखी है पूजन विधि
खांडेराव महाराज और बाबा फकरुद्दीन के आशीर्वाद से 825 साल पहले जिले के ठीकरी में गाड़ा खींचने की परंपरा शुरू हुई थी। इस परंपरा को निभाने में एक ही परिवार की 15 पीढ़ियां बीत चुकी है। 16वीं पीढ़ी के एडू यादव अब भी इस परंपरा को निभा रहे हैं। यादव परिवार के पास एक ताम्रपात्र है, जो महाराज के सामने लिखा गया था। इसमें पूरी पूजन विधि लिखी गई थी। आयोजनकर्ताओं ने बताया मल्हार चौक पर गाड़ा खिचाई कार्यक्रम होगा। घर पर पूजन करने के साथ गाड़ों का पूजन किया जाएगा। मकड़ी का पूजन करने के साथ ही गाड़ा खिंचाई शुरू होगा। इस कार्यक्रम को देखने के लिए नगर सहित आसपास के 100 गांवों को लोग पहुंचेंगे। आयोजन को लेकर सोमवार को ही अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई थी। यहां पर सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस जवान तैनात रहेंगे। जाम की स्थिति न बने। इसलिए कार्यक्रम स्थल के कुछ दूर से ही वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी। यहां से पैदल ही लोग आयोजन स्थल तक पहुंचेंगे।
बड़वानी : परंपरा, सपने से हुई थी शुरुआत
बड़वा राकेश बाबा ने बताया राजा के समय ये परंपरा निभाई जाती थी, जो बीच में बंद हो गई थी। पूर्वजों ने सपने में आकर परंपरा शुरू करने का कहा था। तभी से परंपरा फिर से शुरू की गई। 2009 से गाड़ा खिंचाई की परंपरा फिर से शुरू की गई। नवलपुरा में गाड़ा खिंचाई होगी। बड़वा राकेश बाबा ने बताया एक साथ 15 गाड़ों को 500 फीट से ज्यादा दूरी तक खींचा जाएगा। आयोजन के दिन सुबह 8 बजे से बड़वा के घर पूजन शुरू होगा, जो शाम तक चलेगा। इसके अलावा आयोजन स्थल पर सभी गाड़ों का पूजन होगा। उन पर हल्दी का लैप लगाया जाएगा। हनुमान मंदिर के पास स्थित मकड़ी का पूजन कर शाम 6 बजे गाड़ा खिंचाई होगी। इस दौरान सभी गाड़ों पर सैकड़ों की संख्या में लोग सवार रहेंगे। गाड़ा खिंचाई में उपयोग होने वाले गाड़ों में पहला गाड़ा लकड़ी का रहेगा। इसके बाद वाले सभी गाड़े लोहे के रहेंगे। सभी गाड़े करीब 25 क्विंटल के रहेंगे। कार्यक्रम देखने के लिए शहर सहित आसपास के गांवों के लोग पहुंचेंगे।
मान्यता : ऐसे हुई परंपरा की शुरुआत
825 साल पहले खांडेराव महाराज व बाबा फकरुद्दीन दोनों घोड़ो पे सवार होकर ठीकरी से गुजर रहे थे। इसी बीच रात होने व घना जंगल होने के कारण दोनों ठीकरी में यादव परिवार की विधवा महिला धनुबाई के घर रात्रि विश्राम के लिए रुक गए। धनुबाई ने महाराज से खाने के लिए पूछा तो उन्होंने कहां वह भोजन नहीं करेंगे, सिर्फ दूध पीएंगे। तभी घर के आंगन में बंधी गाय पर महाराज की नजर पड़ी और बोले- इसी का दूध निकाल लो लेकिन धनुबाई बोले- ये तो कुंवारी है। इसी दौरान गुरु ने कहा- मेरा नाम लेकर दूध निकालो, निकल जाएगा। धनुबाई ने ऐसा ही किया और उस कुंवारी गाय से दूध निकला। ये चमत्कार देख धनुबाई और उनका बेटा घनश्याम सहित गांव वाले महाराज का पूजन करने लगे। इसी दौरान महाराज ने घनश्याम को आशीर्वाद देकर गाड़ा खिंचाई कार्यक्रम करने के लिए कहा था। तभी से ये परंपरा शुरू हुई। पहली बार घनश्याम ने ही गाड़ा खींचा था।