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दुनिया में सालाना 21 लाख लोग किडनी रोग से जान गंवाते हैं

एक वर्ष पहले
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दर्द निवारक व आयुर्वेदिक दवाओं से बचकर रहें

Expert

डॉ. श्रद्धा गोस्वामी

नेफ्रोलॉजिस्ट व रीनल ट्रांसप्लांट स्पेशलिस्ट, इंदौर

क्रॉनिक किडनी डिसीज वह स्थिति है, जब व्यक्ति की दोनों किडनियां धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती हैं। किडनी फेल होने की दशा में डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट का सहारा लेना पड़ता है। हर 7 में से 1 व्यक्ति इससे ग्रसित है।

ब्लड प्रेशर व डायबिटीज किडनी की बीमारी की बड़ी वजह होते हैं। ऐसे में बीपी और शुगर की मात्रा को कंट्रोल करें।

}वजन को नियंत्रित रखें व नियमित रूप से व्यायाम करें।

}ज्यादा नमक व तेल-मसाले वाले खाने से बचें।

}सिगरेट व तंबाखू जैसे व्यसनों से दूर रहें। दर्द निवारक दवाओं व आयुर्वेदिक दवाओं के ज्यादा उपयोग से भी बचकर रहें।

}रोग की आशंका होने पर समय-समय पर अपनी जांच कराते रहें व डॉक्टर से कंसल्ट करते रहें व दवाएं समय पर लें।

25

से 45 वर्ष के लोग गुर्दे की पथरी की बीमारी से ज्यादातर पीड़ित होते हैं। महिलआों की तुलना में पुरुषों को यह रोग सबसे ज्यादा होता है।

10

गु‌‌ना ज्यादा आशंका है, अमेरिकियों की तुलना में भारतीयों में किडनी रोग होने की। दुनिया की 10 फीसदी आबादी को किडनी संबंधित रोग हैं।

विश्व किडनी दिवस आज

किडनी की पथरी

पथरी की बीमारी में किडनी में कुछ खास तरह के साल्ट्स जमा हो जाते हंै। जिससे पहले स्टोन का निडस बनता है, जिसके चलते चारों तरफ सॉल्ट जमा हो जाता है। इसके अलावा जेनेटिक कारण, हाइपरटेंशन, मोटापा, जैसी कई चीजें भी किडनी स्टोन के लिए जिम्मेदार होती हैं।

शोध में निकला परिणाम

जॉन हॉपकिन यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता मैथ्यू फेड्रिक ब्लम के अनुसार उच्च वायु प्रदूषण स्तर वाले वातारवण में किडनी रोग की आशंका सबसे ज्यादा है व भारत और चीन इन देशों में प्रमुख हैं। 10,997 लोगों पर शोध कर उन्होंने पाया कि हवा में मौजूद कण मानव शरीर के रक्त में एल्ब्युमिन नामक प्रोटीन के स्तर को बढ़ाते हैं और यह मूत्र में आ जाएं, तो इस अवस्था को एल्ब्युमिनेरिया कहते हंै। मतलब किडनी रोग। ये प्रदूषण के कण होते हैं, जो सांस के द्वारा शरीर में प्रवेश कर फिर फेफड़ों के साथ-साथ किडनियों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं। इस शोध को क्लिनिकल जर्नल ऑफ अमेरिकन सोसायटी ऑफ नेफ्रोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

ये कारण भी हैं जिम्मेदार

किडनी की खराबी के कारण रक्त में यूरिया का स्तर बढ़ जाता है, जिसके कारण मुंह से बदबू आना, जीभ का स्वाद बिगड़ना जैसे लक्षण प्रकट होते हैं। बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल के इस वर्तमान दौर में हाइपर टेंशन व डायबिटीज भी किडनी रोग के लिए जिम्मेदार हैं। इस दशा में विषाक्त पदार्थों के जमा होने के कारण शरीर पर रैशेज निकलना शुरु हो जाते हंै।

किडनी फेल होना

किडनी फेल होना एक घातक स्थिति होती है, ऐसी स्थिति में किडनी डायलिसिस (फिल्टर करने वाला कृत्रिम उपकरण) लगाकर शरीर से बाहर न निकल पा रहे अपशिष्ट द्रव को क्रत्रिम माध्य से बाहर निकालने की व्यवस्था की जाती है या मरीज में किडनी अंग को प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) करके ही रोगी की जान बचाई जाती है। दर्द निवारक दवाओं का ज्यादा उपयोग भी किडनी के लिए खतरनाक होता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांट करवाने वालों की तादाद में हर वर्ष भारत में 10 से 15 फीसदी का इजाफा दर्ज किया किया जा रहा है। फिटनेस को लेकर ज्यादा सचेत लोग, जो मांसपेशियां और शरीर बनाने के लिए एक्स्ट्रा सप्लीमेंट्स लेते हैं, उनमें किडनी की बीमारी का खतरा अन्य के मुकाबले ज्यादा होता है। व्यस्त जीवन शैली में सही खान-पान न करने वाले लोग किडनी रोग के प्रति ज्यादा संवेदनशील होते हैं।

यह भी जानें

}अध्ययन कहते हैं कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं के डायलिसिस में जटिलताएं ज्यादा होती हैं।

}भारत के लिहाज से देखा जाए तो महिलाओं और पुरुषों में वायु प्रदूषण के अलावा हाइपर टेंशन और डायबिटीज किडनी रोग के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं।

}2019 में कलेक्ट किए गए डेटा के अनुसार इस बीमारी से ग्रस्त कई रोगियों में तो (ESKD) यानि एंड स्टेज किडनी डिसीज अवस्था में इस बीमारी की पहचान हो पाती है, जिन्हें डायलिसिस या ट्रांसप्लांटेशन की जरूरत होती है, उनकी संख्या प्रति वर्ष 1 लाख तक है।

}एक रोचक आंकड़ा यह भी है कि पुरुषों की तुलना में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर के तौर पर महिलाएं ज्यादा आगे रहती हैं। मां या प|ी, पति या पिता की तुलना में फौरन किडनी दान के लिए तैयार रहती हैं।

}कुछ मामलों में महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर क्रॉनिक किडनी डिजीज का नकारात्मक प्रभाव भी देखा गया है। यह उस दौरान दी गईं दवाओं के असर के कारण भी होता है।

}विशेषज्ञों का कहना है कि क्रॉनिक किडनी डिसीज का पूर्ण हल नहीं है, क्योंिक ये किडनी के फंक्शन को खराब कर चुकी होती है। लेकिन उपचार और परहेज से इस रोग के बढ़ने की रोकथाम की दिशा में काम किया जा सकता है।

सूजन क्यों आती है

मानव शरीर में किडनी का मुख्य काम होता है शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालना। रोग या किसी प्रकार की रुकावट की दशा में शरीर में अधिक फ्लूइड जमने लगता है। इसके चलते शरीर का नमक बाहर नहीं निकल पाता और फलस्वरूप हाथ-पैर और चेहरे में सूजन आना शुरू हो जाती है। जो रोग के मुख्य संकेत हैं।

लक्षण

हर बीमारी अपने विशेष लक्षणों से पहचानी जाती है और किडनी के रोग के भी ऐसे ही लक्षण होते हैं। किडनी की बीमारी के लक्षण व संकेतों में शरीर के किसी भाग में खुजली, हाई ब्लड प्रेशर, मांसपेशियों में खिंचाव या टखनों व पैरों में सूजन तथा मरोड़ आदि शामिल है। किडनी संबंधी रोगों का पता लगाने के लिए डॉक्टर खून टेस्ट व पेशाब टेस्ट करते हैं और इसकी रिपोर्ट के आधार पर तय किया जाता है कि वास्तव में किसी को किडनी का रोग है या नहीं।

क्या है किडनी रोग

दरअसल हमारे शरीर में अपशिष्ट द्रव को बाहर निकालने वाला अंग है किडनी, जो क्षतिग्रस्त हो जाए, काम करना बंद कर दे या ठीक तरह से काम न कर पाए, तो इस तरह की समस्या को किडनी की बीमारी क्रॉनिक किडनी डिसीज (CKD) कहा जाता है। शरीर में से जब ये अपशिष्ट द्रव बाहर नहीं निकल पाता तो इस कारण से शरीर में तरल का असंतुलन हो जाता है। किडनी की बीमारी में कई रोग शामिल हैं, जैसे किडनी की पथरी, किडनी का कैंसर, किडनी की सूजन, पॉलिसिस्टिक किडनी डिसीज और मूत्र पथ में संक्रमण आदि। यदि किसी को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या परिवार में पहले किसी को किडनी संबंधी बीमारी है, तो उनमें किडनी संबंधित रोग होने की आशंकाएं ज्यादा हैं।

छू त की बीमारी नहीं है किडनी संबंधित रोग, लेकिन जानलेवा जरूर है। आंकड़ों पर गौर किया जाए तो विश्व में करीब 850 करोड़ लोगों को किडनी संबंधित बीमारियां घेर रही हैं। दुनिया में बांग्लादेश इस बीमारी से सबसे ज्यादा चपेट में है। बांग्लादेश की स्वास्थ विभाग की रिपोर्ट को मानें, तो वहां 60 फीसदी लोग किडनी संबंधित रोग से ग्रसित हैं और ये सब मिलावटी खाने की वजह से है। ये चौंकाने वाले आंकड़े सेफ फूड एंड कंज्यूमर प्रोडक्शन मूवमेंट (SFCPM) नेशनल प्रेस क्लब द्वारा बनाई गई एक मानव श्रृंखला के दौरान वहां सामने आए। इस बीमारी का यही हाल रहा तो विशेषज्ञों की चेतावनी है कि 2040 तक विश्व में व्यक्ति की जान लेने वाले 5 आम कारणों में से 1 होगा किडनी रोग। दुनिया में करीब 21 लाख लोग हर साल किडनी रोगों की गंभीरता के चलते अपनी जान गंवाते हैं। किडनी फेल होने की दशा में डायलिसिस और किडनी ट्रांसप्लांटेशन की प्रोसेस बहुत जटिल और महंगी है, लेकिन निम्न आय वर्ग वाले देशों के बीमारों और पीड़ितों के लिए इस बीमारी के इलाज का खर्च वहन करना हर तरफ से तोड़ देने वाला होता है।

वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर के कारण हालिया शोध में भारत को किडनी रोगों के प्रति हाई रिस्क जोन में रखा गया है। 12 मार्च को किडनी दिवस भी है, इसलिए इस बीमारी के प्रति जागरुकता और जानकारी बेहद जरूरी है।
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