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7 साल बाद समझ आया... साइड वर्ज की दीवार के कारण भर रहा था पानी इसलिए बीआरटीएस की सड़क जर्जर

News - इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टर| भोपाल बैरागढ़ से मिसरोद तक 24 किमी के बीआरटीएस रूट के निर्माण में एक बड़ी खामी सामने...

Oct 13, 2019, 06:50 AM IST
इंफ्रास्ट्रक्चर रिपोर्टर| भोपाल

बैरागढ़ से मिसरोद तक 24 किमी के बीआरटीएस रूट के निर्माण में एक बड़ी खामी सामने आई है। सड़क के दोनों ओर नाली तो बनाई गई लेकिन इसमें पानी जाने का इंतजाम नाकाफी था। साइड वर्ज की दीवार पर किए गए होल से पानी नालियों में नहीं जाने के कारण सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए। अब इस पानी की निकासी के लिए साइड वर्ज की दीवार को बीच-बीच में तोड़ने के साथ ही सड़क की ऊंचाई चार फीट तक बढ़ाई जा रही है।

इसकी शुरुआत हबीबगंज रेलवे स्टेशन के सामने से हो गई है। फिलहाल हबीबगंज रेलवे स्टेशन से दीनदयाल परिसर तक हर दस मीटर की दूरी पर साइड वर्ज को तोड़ा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि एेसा करने पर यहां पानी नहीं जमा होगा और सड़क की उम्र बढ़ जाएगी। सितंबर 2013 में 329 करोड़ रुपए में बनकर तैयार हुए बीआरटीएस रूट में सड़क और कॉरिडोर के निर्माण पर ही 110 करोड़ रुपए खर्च हुए थे।

अभी यह काम हो रहा है

बीआरटीएस रूट पर जहां भी बड़े गड्ढे हैं वहां सड़क को बेस से ही दोबारा बनाया जा रहा है। सड़क का बेस करीब दो से तीन ईंच ऊपर उठाया जा रहा है। इसके बाद डामरीकरण होगा यानि सड़क चार से पांच ईंच ऊंची हो जाएगी। पूरे 24 किमी के इस रूट में खास तौर से दीनदयाल परिसर से मिसरोद तक 9 किमी का हिस्सा अधिक खराब है और इसकी रिपेयरिंग पर पर 4 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं।

रिपेयरिंग के लिए... 8 माह पहले हो चुके थे वर्कऑर्डर

नगर निगम आयुक्त बी विजय दत्ता ने शुक्रवार को निगम के सिटी इंजीनियरों और अपर आयुक्तों के साथ बैठक कर सड़कों की रिपेयरिंग में तेजी लाने को कहा था। उन्होंने प्राथमिकता के आधार पर मुख्य मार्गों की रिपेयरिंग पहले करने को कहा था। बीआरटीएस रूट की रिपेयरिंग के लिए निगम ने लगभग आठ महीने पहले वर्क अॉर्डर जारी कर दिया था लेकिन समय पर भुगतान नहीं होने से कांट्रेक्टर ने काम बीच में बंद कर दिया और अब बरसात में इसकी हालत ज्यादा खराब हो गई। निगमायुक्त के निर्देश के बाद पुराने वर्क अॉर्डर पर ही तत्काल काम शुरू कराया गया है।

बैरागढ़ से दीनदयाल परिसर तक माइक्रो सरफेसिंग से दुरुस्त है

बीआरटीएस रूट पर बैरागढ़ से दीनदयाल परिसर तक 16 किमी के रूट पर माइक्रो सरफेसिंग कराई गई थी। कॉरिडोर के भीतर के हिस्से में हुई इस माइक्रो सरफेसिंग का फायदा यह हुआ कि बारिश में इस हिस्से में सड़क खराब नहीं हुई।


कॉरिडोर तोड़ने पर फैसले के लिए रिपोर्ट का इंतजार

राजधानी में लंबे समय से बीआरटीएस कॉरिडोर तोड़ने की मांग को देखते हुए नगरीय आवास एवं विकास मंत्री जयवर्धन सिंह के अनुरोध पर सेंट्रल रोड रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीआरआरआई) के सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. एस वेलमुरुगन ने जून के अंतिम सप्ताह में कॉरिडोर का मुआयना किया था। उन्होंने चार महीने में अपनी रिपोर्ट देने की बात कही थी। यानि इस महीने के अंत तक उनकी रिपोर्ट मिल सकती है। हालांकि प्रारंभिक तौर पर डॉ. एस वेलमुरुगन कॉरिडोर तोड़ने के पक्ष में नहीं थे। भोपाल दौरे पर पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने कॉरिडोर तोड़ने की बजाय बूम बैरियर लगाने और बसों की फ्रिक्वेंसी बढ़ाने जैसे उपाय करने जैसे सुझाव दिए थे। डॉ. वेलमुरुगन वही शख्स हैं, जिनकी सिफारिश पर दिल्ली में आफत बने बीआरटीएस को उखाड़ दिया गया था। इसके बाद दिल्ली में बीआरटीएस के विस्तार के काम पर भी ब्रेक लग गया था।

नगर निगम के सभी अपर आयुक्तों ने शनिवार को अपने- अपने प्रभार वाले विधानसभा क्षेत्रों की सड़कों की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में यह बात सामने आई कि ज्यादातर सड़कों की रिपेयरिंग के काम 17 से 25 अक्टूबर के बीच शुरू हो जाएंगे। हर स्थिति में 15 नवंबर तक काम पूरा करने को कहा गया है।

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