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हिंदू धर्म में 9 महत्वपूर्ण परिक्रमाएं, नर्मदा परिक्रमा पहली

एक वर्ष पहले
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हिंदू धर्म की 9 महत्वपूर्ण परिक्रमाएं हैं। पहली नर्मदा परिक्रमा, दूसरी गोवर्धन पर्वत, तीसरी चौरासी कोस, चौथी प्रयाग पंचकोशी, पांचवीं उत्तराखंड की छोटा चार धाम, छठवीं राजीम छोटा काशी, सातवीं तिरुमले और जगन्नाथ, 8वीं क्षिप्रा व 9वीं भरत खंड परिक्रमा है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण व पहली परिक्रमा नर्मदा जी की मानी गई है।

यह बात बागदी आश्रम की साध्वी अखिलेश्वरी देवी ने अपनी नर्मदा परिक्रमा यात्रा के दौरान अंजड़ आगमन पर कही। उन्होंने नर्मदा परिक्रमा के महत्व के बारे में बताते हुए आगे कहा कि नर्मदाजी वैराग्य की अधिष्ठात्री मूर्तिमान स्वरूप हैं। गंगाजी ज्ञान की, यमुनाजी भक्ति की, ब्रह्मपुत्रा तेज की, गोदावरी ऐश्वर्य की, कृष्णा कामना की और सरस्वतीजी विवेक के प्रतिष्ठान के लिए संसार में आई हैं। सारा संसार इनकी निर्मलता और ओजस्विता व मांगलिक भाव के कारण आदर करता है व श्रद्धा से पूजन करता है। मानव जीवन में जल का विशेष महत्व होता है। यही महत्व जीवन को स्वार्थ, परमार्थ से जोड़ता है। प्रकृति और मानव का गहरा संबंध है।

नर्मदा परिक्रमा के दौरान नगर में रुकी अखिलेश्वरी देवी।

मां नर्मदा साक्षात रूप में हैं विराजमान

मां नर्मदा साक्षात रूप में विराजमान हैं। जो मांगी गई हर मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। रेवा आश्रम समिति ने बताया कि दतवाड़ा निवासी नेपालसिंह के यहां संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होने पर नर्मदा की भक्त अखिलेश्वरी देवी ने जनकल्यणार्थ, पर्यावरण संरक्षण व नदियों को प्रदूषण मुक्त रखने के संकल्प व जनजागरण के लिए गुरुवार को ओंकारेश्वर से नर्मदाजी के पूजन-अर्चन के साथ चारपहिया वाहन से अपनी परिक्रमा शुरू की है। जो अंजड़, बड़वानी होते हुए गुजरात प्रवेश कर खंबात की खाड़ी से नर्मदा पार कर नर्मदा उदगम स्थल होते हुए वापस ओंकारेश्वर में समाप्त होगी। यात्रा में नेपालसिंह, अखिलेश्वरी देवी के सानिध्य में अपनी धर्म प|ी, दोनों बच्चों व परिवार के साथ परिक्रमा कर रहे हैं।
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