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पंचायतों में बनेगी प्रशासकीय समिति, पूर्व सरपंच को बनाएंगे प्रधान, अपर सचिव ने जारी किया सर्कुलर

एक वर्ष पहले
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12 मार्च को खत्म हो रहा है पंचायतों का कार्यकाल

जिले की 416 पंचायतों का कार्यकाल 12 मार्च को खत्म हो रहा है। लेकिन अभी तक त्रि-स्तरीय पंचायत चुनावों का कार्यक्रम जारी नहीं हुआ है। पंचायतों में काम प्रभावित न हो, इसके चलते पंचायतों में प्रशासकीय समिति का गठन किया जाएगा। इसकी जिम्मेदारी कलेक्टर को दी गई है। जिले में पंचायतों व निकायों की मतदाता सूची का पुनरीक्षण कार्य जारी है। लेकिन समिति गठित करने के आदेश से पंचायत चुनाव के कुछ समय और टलने के आसार है। जबकि पूर्व में मई माह तक चुनाव होने की चर्चा थी।

रविवार को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की अवर सचिव शोभा निकुंम ने प्रदेश के सभी कलेक्टर के नाम सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत अब पंचायतों में प्रशासकीय समिति का गठन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने खातों से राशि निकालने के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। जानकारी अनुसार कार्यकाल खत्म होने की तारीख से ग्राम पंचायतों के खातों के संचालन व आहरण, संवितरण पर सरपंचों के हस्ताक्षर पर रोक लगाई गई है। लेकिन ग्राम पंचायतों के कार्यों के संचालन के लिए प्रशासकीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया है, ताकि पंचायतों में काम बंद न हो। उधर, जिला पंचायत के सीईओ मनोज सरियाम ने बताया समिति बनाने के लिए सर्कुलर आया है। सर्कुलर के अनुसार ही कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व सदस्यों को बनाएंगे समिति का सदस्य

कार्यकाल खत्म होने से पहले जो ग्राम पंचायत में सदस्य रहे हैं उन्हें समिति का सदस्य बनाया जाएगा। ग्राम पंचायत के कार्यकाल (2015-2020) समाप्त होने के पूर्व सरपंच रहे व्यक्ति को इस समिति का प्रधान बनाया जाएगा। समिति में दो एेसे व्यक्ति नियुक्त किए जाएंगे, जिनका नाम संबंधित ग्राम पंचायत की निर्वाचक नामावली में शामिल हो। यह समिति नियुक्त सदस्य न होने या मनोनयन के अभाव में भी काम करती रहेगी। प्रशासकीय समिति के प्रधान व ग्राम पंचायत के सचिव मप्र पंचायत राज व ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 66 और नियमों के अनुसार पंचायत के खातों से राशि का आहरण, संवितरण कर सकेंगे। समिति के गठन की जिम्मेदार कलेक्टर को दी है।

नगर परिषदों को पंचायत बनाने पर संशय बरकरार

पिछले दिनों कमलनाथ सरकार की कैबिनेट की बैठक में शिवराज सरकार द्वारा बनाई नगर परिषदों को फिर से पंचायत बनाने का निर्णय लिया गया था। इस फैसले से जिले की निवाली व ठीकरी नगर परिषद फिर से पंचायत बन गई है, इस पर अब भी संशय बरकरार है। अफसरों की माने, तो अब तक इस संबंध में उनके पास आदेश नहीं आए हैं। एेसी स्थिति में पंचायत चुनाव के लिए अब तक निवाली की पांच व ठीकरी की दो पंचायतों में वार्ड आरक्षण की प्रक्रिया नहीं हुई है। जबकि पूर्व में नगर परिषद के अनुसार वार्ड आरक्षण हो चुका है।
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