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रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की राशि जमा कराने के बाद अधिकारी नहीं देखते की बना या नहीं

Harda News - पानी बचाने के प्रति भले ही अधिकारी नागरिकों को गंभीर रहने की बात करते हैं, लेकिन नगर परिषद खुद ही जल संरक्षण की...

Mar 27, 2020, 07:51 AM IST
Khirkiya News - mp news after depositing the amount of rain water harvesting system the officials do not see whether it is made or not

पानी बचाने के प्रति भले ही अधिकारी नागरिकों को गंभीर रहने की बात करते हैं, लेकिन नगर परिषद खुद ही जल संरक्षण की दिशा में गंभीर नहीं है। नप भवन निर्माण के दौरान लाेगाें से रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की राशि जमा करा रही है। लेकिन अधिकारी अनुमति देने के बाद निरीक्षण तक नहीं करते हैं कि लाेगाें ने सिस्टम बनाया है या नहीं। ऐसे में शहर के भवनों पर हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू नहीं हो रहा है।

हर साल बारिश से पहले पानी जमा करने के लिए नप कोई इंतजाम नहीं कर पाती है। इससे बारिश का पानी बहकर निकल जाता है। वहीं इसके विपरीत जगह-जगह बोर खनन होने से जमीन का पानी खींचा जा रहा है, जबकि पहले कच्ची नालियों और सड़क होने से पानी जमीन में जाता था, लेकिन अब पक्की नाली अाैर सीमेंटेड सड़क बनने के कारण यह पानी भी जमीन में नहीं जा पा रहा है।

मकान मालिक सिस्टम नहीं लगाता है तो राशि जब्त कर सकती है नप

सिस्टम लगाने से बारिश का पानी जमीन के अंदर प्रवेश करता है। ऐसे में जलस्तर में वृद्धि हाेती है। नप भवन निर्माण की अनुमति इसी शर्त पर दी जाती है। इसमें हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने के लिए वर्गमीटर के हिसाब से अलग अलग मूल्य निर्धारित हैं। नप के पास रुपए जमा कराने का प्रावधान है। यदि मकान मालिक सिस्टम नहीं लगाता है तो नपा उस राशि का जब्त करत सकती है। नप हर साल 100 से अधिक भवन निर्माण की अनुमति देती है। इसके उलट हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू कराने पर ध्यान नहीं दे रही है। अनुमति के दौरान 1500 वर्गफीट पर 7 हजार रुपए, 2 हजार वर्गफीट पर 10 हजार रुपए व 2500 वर्गफीट पर 15 हजार रुपए की राशि मालिक से जमा कराई जाती है। इसी वित्तीय वर्ष में 60 से अधिक भवनों के निर्माण की अनुमति जारी है। इनमें से एक में भी सिस्टम लागू करने की हिदायत भवन मालिकों काे देते हैं।

एेसे बनता है रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

जमीन में 3 से 5 फीट चौड़ा और 6 से 10 फीट गहरा गड्ढा खोदना होता। सबसे नीचे मोटे पत्थर, बीच में मध्यम आकार के पत्थर और सबसे ऊपर रेत डाली जाती है। यह सिस्टम फिल्टर का काम करता है। छत से पानी पाइप के जरिए गड्ढे में उतार दिया जाता है। गड्ढे से पानी छनकर जमीन में चला जाता है। बारिश का पानी जमीन में उतरने से सालभर पानी के जलस्त्रोतों में जलसंकट की स्थिति नहीं बनती है।


बारिश के पानी काे सहेजने अपनाया जाता है यह सिस्टम


पुराने अाैर नए बन रहे मकानों में नहीं लगाया गया रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम।

पीएम अावास में भी नहीं बना रहे सिस्टम

पीएम अावास याेजना में भी सिस्टम लागू नहीं खिरकिया अाैर छीपाबड़ के सभी 15 वार्डों में पीएम आवास योजना के तह सैकड़ों आवास बनाए गए हैं। इन अावासाें में भी यह सिस्टम को लागू कराने में नप कोताही बरत रही है। जबकि इस योजना के अावास पूरी तरह से नप की देखरेख में ही बन रहे हैं। बावजूद इसके अावासाें के निर्माण के साथ ही बारिश के पानी को सहेजने सिस्टम को लागू नहीं किया जा रहा है।

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