फ्लोर टेस्ट को अधिक समय तक रोककर नहीं रख सकते विधानसभा अध्यक्ष
बाकी विधायक सामूहिक रूप से इस्तीफा दें तो...
22 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद कांग्रेस के बाकी विधायक प्रजातंत्र की हत्या का आरोप लगाकर सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दें और स्पीकर इन्हें मंजूर कर ले, तो सदन की सदस्य संख्या आधी रह जाएगी। ऐसे में यदि स्पीकर विधानसभा भंग करने की सिफारिश राज्यपाल को करे तो राज्यपाल उसे मान सकते हैं या रिक्त सीटों पर उपचुनाव की सिफारिश चुनाव आयोग से कर सकता है।
भोपाल। प्रदेश सरकार अपने ही विधायकों की बगावत से कानूनी पेचीदगियों में उलझ गई है। सरकार और स्पीकर उन्हें विधानसभा में उपस्थित होने के लिए मजबूर भी नहीं कर पाए रहे हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति का सामना करने के लिए कोई कानूनी प्रावधान ही मौजूद नहीं हैं। जुलाई 2019 में जब कर्नाटक में ऐसी स्थिति बनी थी, तब सरकार सुप्रीम कोर्ट में यह मांग लेकर गई, लेकिन कोर्ट ने कह दिया मौजूदा कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं हैं।
खंडवा, शनिवार 14 मार्च, 2020
द ग्रेट एमपी पॉलिटिकल ड्रामा
2 स्पीकर विधानसभा भंग नहीं कर सकते। लेकिन राज्यपाल को इसकी सिफारिश जरूर भेज सकते हैं। सिफारिश को मानना या न मानना राज्यपाल के विवेक पर निर्भर करेगा।
1 राज्यपाल इस बात से सहमत हो जाएं कि प्रदेश में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बन गई है, तो वे विधानसभा भंग कर सकते हैं या राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं। लेकिन ऐसा होने की संभावना कम हैं।
इन परिस्थितियों में भंग हो सकती है विधानसभा
रिटायर्ड जस्टिस
रमेश कुमार गर्ग
प्रदेश की राजनीतिक स्थिति पर संवैधानिक कानूनों के विशेषज्ञ जस्टिस गर्ग ने बताया किस परिस्थिति में क्या-क्या हो सकते हैं विकल्प
भास्कर एक्सपर्ट**
विधायकों को उपस्थित होने के लिए बाध्य नहीं कर सकते
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Áस्पीकर ने विधायकों को नोटिस देकर उपस्थित होने को कहा है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट कर दिया था कि विधायकों को उपस्थिति के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। ऐसे में फ्लोर टेस्ट को भी स्पीकर अधिक समय तक रोककर नहीं रख सकते।
Áयदि कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के अपहरण का आरोप लगाकर कोर्ट जाती है, तो हैबियस काॅर्पस के तहत केस दर्ज होगा। विधायक कोर्ट में हाजिर होंगे तभी केस खारिज होगा। लेकिन कोर्ट से उन्हें सदन में हाजिर कराने के लिए फिर भी बाध्य नहीं किया जा सकेगा।
अयोग्य ठहराए जाने के बाद भी सुको ने दी थी चुनाव लड़ने की छूट
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Áयदि स्पीकर इस्तीफा स्वीकार नहीं करते हैं,
पार्टी व्हिप जारी कर उन्हें सदन में हाजिर होने को कह सकती है। यदि वे फिर भी नहीं आते तो ऐसे में पार्टी उन्हें निष्कासित कर सकती है, तो उनकी सदस्यता बच सकती है।
Á स्पीकर सदस्यों को अयोग्य ठहरा सकते हैं, लेकिन यह अयोग्यता 6 महीने से ज्यादा वक्त के लिए लागू नहीं होगी। कर्नाटक के 17 बागी विधायकों के केस में अयोग्य ठहराए जाने के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें चुनाव लड़ने की छूट दे दी थी। वह आदेश मप्र की परिस्थितियों पर भी लागू होगा।
सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था- 7 दिन में जांचें इस्तीफों की वैधता
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Áजिन 22 विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उन पर स्पीकर को ही फैसला लेना है। प्रतापगौड़ा पाटिल बनाम कर्नाटक सरकार केस में सुप्रीम कोर्ट का निर्देश था कि इस्तीफा दिए जाने के 7 दिन के अंदर स्पीकर उनकी वैधता जांचे, यदि वे सही हों तो मंजूर करें, अन्यथा खारिज कर सकते हैं।
Á यदि इस्तीफे स्वीकार हो जाते हैं तो 22 विधायकों की सदस्यता चली जाएगी और कांग्रेस सरकार में शामिल सदस्यों की संख्या 121 से गिरकर 99 पर आ जाएगी। सदन की संख्या 206 और बहुमत का आंकड़ा 104 पर आ जाएगा।