चाइनीज रंगों से बचें, अध्यात्म की खेलें होली
रंगीन दुनिया में रंगों के अनुसार उत्साह, उमंग पूर्वक जीन को प्रयास करो। अगर एक बार भक्ति का रंग लग जाएगा तो सारे रंगों का समावेश होकर बैठे-बैठे सारी दुनिया दिखा देगा। रंगों से रंजायमना दुनिया में हर कोई रंगने का तैयार है, क्योंकि इन रंगों का संबंध तुम्हारे शरीर से है। कहा जाता है कि पंचभूत तत्वों से शरीर की रचना हुई है जिसमें लाल रंग अग्नि तत्व, पीला रंग वनस्पति, नीला रंग आकाश वायु, सफेद रंग जल तत्व, काला रंग पृथ्वी का प्रतीक है।
नेत्र शक्ति के माध्यम से काला, पीला, नीला, लाल, सफेद रंग की पहचान होती है जिसका संचार सदैव शरीर में होता रहता है। यह उद्गार घासपुरा महावीर जैन मंदिर में प्रवचन देते हुए आचार्य डा. प्रणाम सागर महाराज ने व्यक्त किए। आचार्यश्री ने कहा चीन से शुरू हुआ कोरोना अब भारत में भी हलचल मचा रहा है और हम देख रहे हैं कि दिन प्रतिदिन इस बीमारी को लेकर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं, मेले पर प्रतिबंध, अन्य कार्यक्रमों पर प्रतिबंध, धारा 144 लगाकर इस बीमारी को रोकने के प्रयास हो रहे हैं। मेरा मानना है कि सदैव शाकाहारी, सदाचारी बने रहें, कभी भी ऐसी बीमारी हमारे नजदीक भी नहीं आएगी।
प्रवचन देते हुए आचार्य डॉ. प्रणाम सागर महाराज।