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मेंटेनेंस के लिए 8 कराेड़ देकर 13 काॅलाेनियां ट्रांसफर करेगा बीडीए...सड़क, पानी-सीवेज अाैर स्ट्रीट लाइट संभालेगा निगम
बीडीए की 13 काॅलाेनियाें के करीब 40 हजार रहवासियाें के लिए राहत भरी खबर है। नगर निगम अाैर बीडीए के बीच दस साल से चल रही खींचतान के बाद अाखिरकार अब इन काॅलाेनियाें के नगर निगम काे ट्रांसफर हाेने का रास्ता साफ हाे गया है। तय हुअा है कि बीडीए इन काॅलाेनियाें के मेंटनेंस के लिए 8.32 कराेड़ रुपए निगम काे चुकाएगा। इसके बाद इन काॅलाेनियाें के मेंटनेंस का जिम्मा निगम संभालेगा। इससे बीडीए की काॅलाेनियाें में रहने वाले लाेगाें काे सड़क, सीवेज, स्ट्रीट लाइट अाैर पीने के पानी के लिए निगम की मदद मिल सकेगी।
अभी तक यह कॉलोनियां निगम को ट्रांसफर इसलिए नहीं हो पा रहा थीं, क्योंकि निगम ने बीडीए से 32 करोड़ रुपए मेंटेनेंस शुल्क जमा करने की बात कही थी। नगर निगम की प्रशासक और बीडीए की अध्यक्ष कल्पना श्रीवास्तव ने दोनों एजेंसियों के अफसरों की बैठक बुलाई। तय किया गया कि दोनों एजेंसी के अफसर संयुक्त भ्रमण कर हकीकत का पता लगाएंगे। इसके आधार पर नगर निगम डिमांड लेटर तैयार कर बीडीए को भेजेगा। दोनों एजेंसियों के भ्रमण के बाद 8 करोड़ 32 लाख 59 हजार रुपए मेंटेनेंस शुल्क लेने पर बात बनी है। अब नगर निगम यह डिमांड लेटर बीडीए को भेजेगा, इसके आधार पर दोनों एजेंसियों के बीच कॉलोनियों को हैंडओवर करने का अनुबंध होगा। बीडीए द्वारा राशि चुकाने के साथ ही कॉलोनी का रखरखाव निगम के हवाले हो जाएगा। इसमें अधिकतम एक माह का समय लगने की संभावना है।
अफसरों के तर्क-
अनुबंध होना बाकी...इसके
बाद पूरा जिम्मा निगम का
कल्पना श्रीवास्तव, प्रशासक नगर निगम
इन कॉलोनियों में ये परेशानी
ये हैं कॉलोनी- एमजी रूसिया नगर, मुंशी प्रेमचंद नगर, वेदवती स्कीम, अमरावद खुर्द स्कीम, रवींद्रनाथ टैगोर परिसर, साकेत नगर, स्वामी विवेकानंद परिसर कटारा हिल्स, प्यारेलाल खंडेलवाल परिसर सलैया, गौरीशंकर कौशल परिसर, शहीद भगत सिंह नगर, पीसी नगर, सिद्धेश्वरी नगर, दुर्गा नगर। इन कॉलोनियों में मेंटेनेंस संबंधित शिकायत अभी बीडीए के संबंधित क्षेत्र के इंजीनियर के पास होती थी। इसके बाद बीडीए मेंटेनेंस काम कराता था। इसमें कई बार देरी भी होती थी।
अब यह फायदा-यह कॉलोनी हैंडओवर होने के बाद यहां पर रहने वाले रहवासी सीधे नगर निगम के जोन दफ्तर में शिकायत दर्ज करा सकेंगे। चूंकि नगर निगम के पास हर एक काम के लिए अलग शाखा है। इसलिए काम तेजी से होंगे। भविष्य में जो भी मेंटेनेंस होना है वो नगर निगम अपने स्तर पर करेगा।
निगम ने पहले...32 करोड़ रुपए मांगा था मेंटेनेंस शुल्क, इसलिए अटका था मामला
एक माह में पूरी होगी हैंडओवर की प्रक्रिया
ये हैं 13 कॉलोनियां...जाे होंगी निगम को हैंडओवर
वेदवती स्कीम- यहां पार्क डेवलप नहीं हैं, सीवेज खुले
में बहता है, नालियां भी खुली हुई हैं।
रवींद्रनाथ टैगोर परिसर, कटारा - पीने के पानी की दिक्कत है, जो घर बने हैं। उसकी भी रहवासी शिकायत कर चुके हैं।
स्वामी विवेकानंद परिसर, कटारा हिल्स- यहां पर लंबे समय से सड़क निर्माण नहीं हुआ है, ईडब्ल्यूएस में पानी सप्लाई की ठीक व्यवस्था नहीं है। इस कॉलोनी में हर गर्मी में पीने के पानी की आपूर्ति प्रभावित होती है।
गौरीशंकर कौशल परिसर, बर्रई - करीब डेढ़ किमी का पहुंच मार्ग नहीं है। इससे बारिश के समय ज्यादा दिक्कत होती है। बाउंड्रीवॉल कई जगह से टूटी है। सफाई काम एक निजी एजेंसी के हवाले है, इसकी शिकायत कई बार रहवासी कर चुके हैं। कई दिनों तक सफाई भी नहीं होती।
प्यारेलाल खंडेलवाल परिसर, सलैया- सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट ओवरफ्लो हाे जाता है, इससे कॉलोनी में बदबू आती है। सड़कें खराब हैं। एप्रोच रोड पर स्ट्रीट लाइट नहीं है। पानी प्रेशर से नहीं आता है। हर माह हर घर से 590 रुपए मेंटेनेंस चार्ज देने के बाद सुविधाओं के लिए परेशान होना पड़ता है।
निगम अपनी डिमांड भेज
दे तो कोई दिक्कत नहीं है
एमपी सिंह, एडिशनल सीईओ, बीडीए