आप जैसा सोचेंगे, वैसा ही बन जाएंगे
विवेकानंदजी ने बताया मनुष्यों में अंतर
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ए क बार स्वामी विवेकानन्द के पास एक आदमी आया और पूछा कि भगवान ने हर इंसान को एक ही जैसा बनाया है फिर भी कुछ लोग अच्छे होते हैं, कुछ बुरे, कुछ सफल होते हैं, कुछ असफल ऐसा क्यों? स्वामीजी ने विनम्रतापूर्वक कहा कि मैं तुम्हें एक कहानी सुनाता हूं, ध्यान से सुनो एक बार सभी देवी -देवताओं की सभा चल रही थी कि इंसान इतना विकसित कैसे है? ऐसी कौन सी शक्ति है जिसके दम पर इंसान असंभव को संभव कर डालता है।
जय-पराजय दिमाग की शक्ति पर निर्भर
सभी में सभी देवी-देवताओं अपने विचार रखें। अंत में एक ने जवाब दिया कि हर इंसान की जय और पराजय उसके दिमाग के काम करने की क्षमता पर ही निर्भर है। ये दिमाग ही वो शक्ति है जो एक सफल और असफल इंसान में फर्क पैदा करती है जो इसकी शक्ति को पहचान लेता है वह कुछ भी कर गुजरता है उसके लिए कुछ भी असंभव नहीं है और जो लोग दिमाग की ताकत का प्रयोग नहीं करते वो लोग जीवन भर संघर्ष ही करते रह जाते हैं। स्वामी जी ने आगे कहा कि आप जैसा सोचते हैं, आप वैसे ही बन जाएंगे, आप खुद को कमजोर मानेंगे तो कमजोर बन जाओगे, खुद को शक्तिशाली मानोगे तो शक्तिशाली बन जाओगे।
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