सिलेंडर के भरोसे बच्चों की सांसें**

News - पीसी सेठी अस्पताल की ऑक्सीजन लाइन साढ़े पांच लाख के सर्टिफिकेट में उलझ गई है। स्वास्थ्य विभाग और पीआईयू के अफसर...

Feb 15, 2020, 07:55 AM IST
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पीसी सेठी अस्पताल की ऑक्सीजन लाइन साढ़े पांच लाख के सर्टिफिकेट में उलझ गई है। स्वास्थ्य विभाग और पीआईयू के अफसर थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन पर उलझे हैं। नतीजतन, अस्पताल में भर्ती बच्चों की सांसें सिलेंडर और कॉन्सन्ट्रेटर के भरोसे हैं।

स्वास्थ्य विभाग और पीआईयू के अफसरों की आपसी खींचतान में पीसी सेठी अस्पताल में पाइप लाइन से ऑक्सीजन की सप्लाय शुरू नहीं हो सकी है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि पीआईयू किसी एजेंसी से इंस्पेक्शन कराकर सर्टिफिकेट ले। पीआईयू के अधिकारियों के मुताबिक अस्पताल में केवल ऑक्सीजन की लाइन डाली है। विभाग एनेस्थीसिया के डॉक्टरों की टीम बनाकर उनसे टेस्टिंग-चेकिंग करा ले। यदि कोई फॉल्ट होता है तो ठेकेदार से ठीक करा देंगे। इससे सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया अटकी हुई है। नतीजतन, बच्चे लाइन होने के बावजूद सुविधा से दूर हैं।

एग्रीमेंट में नहीं लाइन का क्लॉज

साढ़े नौ हजार स्क्वेयर फीट जमीन पर पांच मजिला हॉस्पिटल बनाने में 11 करोड़ का खर्च आया है। मजे की बात यह है कि अफसरों ने बिल्डिंग के टेंडर में ऑक्सीजन पाइप लाइन का क्लॉज ही नहीं रखवाया। अस्पताल बनाने वाली ग्वालियर की पालिया कंस्ट्रक्शन के एसपी दुबे का कहना है कि उनके एग्रीमेंट में गैस पाइप लाइन डालने का जिक्र नहीं है। उन्होंने पीआईयू के तत्कालीन अफसरों के कहने पर लाइन के लिए दस लाख रुपए दिए। तब पीआईयू ने किसी फर्म से लाइन डलवाई। वह राशि भी उन्हें आज तक नहीं मिली है। यानी यदि टेंडर में ही पाइप लाइन फिटिंग के साथ टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन का क्लॉज होता तो यह काम ठेकेदार की बाध्यता के कारण बिल्डिंग के साथ ही पूरा हो जाता। जानकारी यह भी है कि हैंडओवर प्रोसेस के बिना ही अस्पताल शुरू कर दिया गया।

कॉन्सन्ट्रेंटर और सिलेंडर के भरोसे

पीसी सेठी अस्पताल में एसएनसीयू, पीआईसीयू और एनएचडीयू सहित तीसरी मंजिल पर तीन ऐसी यूनिट हैं, जहां नवजातों के साथ एक महीने से ज्यादा उम्र के बच्चों का इलाज होता है। तीनों यूनिट में हर दिन चार-पांच बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। गैस पाइप लाइन चालू होने पर यह काम आसान होता। फिलहाल बच्चों को कॉन्सन्ट्रेटर (ऑक्सीजन का वॉल्यूम बढ़ाने वाली मशीन) और सिलेंडर के जरिए सांसें देना पड़ रही है। लाइन का इस्तेमाल नहीं होने से वेंटिलेटर भी बंद है, क्योंकि उसके लिए लाइन से गैस की सप्लाय चाहिए।

PIU को लिखा है

अस्पताल में ऑक्सीजन की पाइप लाइन है, लेकिन वह शुरू नहीं हुई है। टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन बाकी है। इसके लिए साढ़े पांच लाख का खर्च आ रहा है। हमने पीआईयू को लिखा है। पीआईयू द्वारा यह कार्रवाई होते ही हम लाइन का इस्तेमाल शुरू कर देंगे।

डॉ. माधव हसानी, प्रभारी, पीसी सेठी अस्पताल

पीआईयू एस्टीमेट दे

कोर्ट के गाइडेंस से ऑक्सीजन लाइन का थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन कराकर सर्टिफिकेट लेना जरूरी है। विभाग पीआईयू को बिल्डिंग की कॉस्ट की पूरी राशि दे चुका है। पीआईयू ही यह काम करा सकता है। उसे किसी एजेंसी से सर्टिफिकेट लेना चाहिए। यह काम हम नहीं कर सकते। यदि वह हमें एस्टीमेट बनाकर देगा तो विभाग से अतिरिक्त बजट की मंजूरी लेंगे।

डॉ. प्रवीण जड़िया, सीएमएचओ

भुगतान हम कर देंगे

अस्पताल में ऑक्सीजन के अलावा कोई दूसरी लाइन नहीं है। इससे इंटरचेंज होने का सवाल नहीं है। यदि हम किसी एजेंसी को बुलाएंगे तो सात से दस लाख का खर्च बैठेगा। इसलिए हमने विभाग से कहा था कि एनेस्थीसिया के लोगों की टीम बनाकर टेस्टिंग कर लें। यदि कोई दिक्कत आती है तो हम ठेकेदार से ठीक करा देंगे। इसके बावजूद हमने लिखा था कि वे सर्टिफिकेशन करा लें, भुगतान हम कर देंगे। इसमें एस्टीमेट बनाने जैसा कुछ नहीं है।

नीलेश गुप्ता, डीपीई, पीआईयू

कॉन्सन्ट्रेटर की मदद से नवजात को दी जाती है ऑक्सीजन। दूसरे चित्र में- बंद पड़ी सेंट्रल ऑक्सीजन यूनिट।

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