दलालों पर नहीं लगी लगाम यात्रियों पर कसता शिकंजा
टिकट की कालाबाजारी रोकने के लिए रेलवे अपनी धारा 143 का उपयोग कर रहा है। इसके तहत यात्रियों पर तो कार्रवाई हो रही है, लेकिन दलालों पर शिकंजा नहीं कस पा रहा है। पिछले एक साल के अंदर रेलवे ने लाखों आईडी बंद कर दी। इनमें ज्यादातर आईडी सामान्य व्यक्तियाें की थीं। इस कारण दलालों की चांदी हो गई है। वे मनमाने दाम पर यात्रियों को टिकट मुहैया करवा रहे हैं। रेलवे उन्हें रोकने के प्रयास तो करता है, लेकिन वे टिकट बुक करने के नए-नए तरीके खोज लेते हैं। इस मामले का रोचक पहलू यह है कि आमजन को यह भी नहीं पता है कि कौन सा एजेंट रेलवे का अधिकृत है, कौन नहीं। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान उन यात्रियों को होता है, जो बीमा के पैसे तो देते हैं, लेकिन आईडी दूसरी होने के कारण वे दावेदारी नहीं कर पाते हैं। दलाल सिर्फ टिकट बुक करने तक ही सीमित रहते हैं। बीमे में नॉमिनी का नाम भी नहीं लिखते हैं।
ऐसे निकाले तरीके
सबसे पहले तत्काल टिकट के लिए दलाल टिकट खिड़की पर रात में ही कब्जा कर लेते थे। शिकायत पर जब रेलवे ने कार्रवाई करता है तो वे सुपर स्पीड वाले कम्प्यूटर्स की मदद से टिकट बुक करना शुरू कर देते हैं। इसके बाद उन्होंने फर्जी आईडी बनाकर टिकट बुक करना शुरू कर दिया। रेलवे ने जब आईडी बंद करने की कार्रवाई शुरू की तो अब वे रेलवे के कर्मचारियों के साथ मिलकर टिकट की कालाबाजारी कर रहे हैं। प्रत्येक टिकट के बदले कर्मचारी को भी भुगतान किया जाता है।
06 करोड़ टिकट बुकिंग आईडी है देशभर में
12 से 15 करोड़ टिकट ऑनलाइन बुक होते हर माह
10 लाख आईडी बंद की गई पिछले एक साल में
केस-2
जानकी नगर निवासी ममता धाकड़ की आईडी अचानक 12 फरवरी को लॉक हो जाती है। उन्होंने जब भोपाल के स्टेशन मास्टर से संपर्क किया तो पता चला कि ज्यादा टिकट बुक करने के कारण आईडी लाॅक की गई है। ममता के अनुसार उन्होंने दो महीने में 30 टिकट बुक किए। ये एक टूर के लिए बुक किए गए थे। हालांकि ममता ने आईआरसीटीसी को मेल से स्पष्टीकरण देकर आईडी एक्टिवेट करा ली है।
केस-1
भेल निवासी अनिकेत झा ने अपनी अाईडी से बीते तीन माह में लगभग 32 टिकट बुक किए। अचानक उनकी आईडी लॉक हो जाती है। अनिकेत जब कस्टमर केयर को फोन करते हैं, तब पता चलता है कि उन्हें ऑनलाइन बुक किए गए टिकट की जानकारी देना है। इसके बाद आईडी दोबारा एक्टिवेट होगी। अनिकेत ने आईआरसीटीसी के हेल्पलाइन आईडी पर मेल किया, लेकिन आईडी चालू नहीं हो सका।
रेलवे टिकट की काला बाजारी करने वाले दलालों पर चाहकर भी लगाम नहीं लग पा रही है। वे हर सख्ती का तोड़ निकाल ही लेते हैं। एक तरह से रेलवे और दलालों के बीच तू डाल-डाल तो मैं पात-पात का खेल चल रहा है। दूसरी तरफ रेलवे उन मुसाफिरों पर शिकंजा कस रहा है, जो नि:शुल्क अपने पड़ोसियों और परिजनों के टिकट अपनी आईडी से बनाकर दे देते हैं।**
अधिकृत एजेंट से टिकट लें
रेलवे की धारा 143 के तहत उन लोगों पर कार्रवाई की जाती है, जो अपनी पर्सनल आईडी से टिकट बुक कर बेचते हैं। पिछले एक साल में करीब 10 लाख आईडी हमने बंद की हैं। लोगों को चाहिए कि वे अधिकृत एजेंट्स से टिकट लें। तभी टिकट की काला बाजारी रुकेगी।
- सिद्धार्थ सिंह, पीआरओ, आईआरसीटीसी, दिल्ली