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जंगल नष्ट करके हम घातक बीमारियों को ला रहे हैं करीब

Sagar News - जंगली जानवर हैं अनजाने वायरस और बैक्टीरिया के भंडार, बर्ड फ्लू जैसे विषाणु उनमें अब भी हैं दुनियाभर को पीड़ित...

Mar 27, 2020, 06:31 AM IST
BAREHATA News - mp news by destroying the forest we are bringing deadly diseases closer
जंगली जानवर हैं अनजाने वायरस और बैक्टीरिया के भंडार, बर्ड फ्लू जैसे विषाणु उनमें अब भी हैं

दुनियाभर को पीड़ित करने वाला कोरोना वायरस प्रकृति से ‘जूनोटिक’ है। इसका मतलब यह है कि जानवर से मनुष्यों में फैलता है, लेकिन कोविड-19 जैसे कुछ कोरोना वायरस मनुष्यों से मनुष्यों में भी फैलते हैं। ये वायरस कभी खत्म नहीं होते, क्योंकि जंगली जानवर इनके लिए भंडार (रिजरव्याॅयर) का काम करते हैं। बर्ड फ्लू से भले ही पालतू पक्षियों को छुटकारा मिल गया हो, लेकिन जंगली पक्षियों मंे आज भी यह मौजूद है। कोरोना एक खास तरह का वायरस होता है, जिसकी सतह पर कांटे होते हैं और यह सेल्स पर हमला करता है। इस महामारी से पहले केवल छह तरह के ही कोरोना वायरसों की जानकारी थी। कोविड-19 सातवां काेरोना वायरस है, जिसकी पहचान हुई है।

जंगली जानवर उन बैक्टीरिया और विषाणु के भंडार हैं, जिन्हें हमने कभी पहले नहीं देखा। जैसे-जैसे हम जंगली जानवरांे के रहने के आखिरी स्थानों को नष्ट कर रहे हैं, हम नई-नई बीमारियों के संपर्क में आ रहे हैं। आप जब पशुपालन के लिए अमेजन के वर्षा वन को जलाते हैं और वहां हल जाेतते हैं तो आप उस बीमारी के पास चले जाते हैं, जाे अब तक बिना हलचल के वहां पड़ी थी। जब अफ्रीका के जंगलों की आखिरी झाड़ियों को खेतों में बदला जाता है या चीन के जंगली जानवरों का इस हद तक शिकार होता है कि वे लुप्त होने की स्थिति में आ जाते हैं, तो मनुष्य वन्य जीवन व उनकी बीमारियों के बहुत ही निकट संपर्क में आ जाते हैं। इनसे उनका पहले कभी पाला नहीं पड़ा होता। चमगादड़ों की ऐसी बीमारियों को अपने में रखने की एक खास प्रवृत्ति होती है जो मनुष्यों को प्रभावित करती हैं। लेकिन वे एेसा करने वाले एकमात्र जानवर नहीं हैं। इसलिए इस तरह की आपदाएं आती रहेंगी और ये आपदाएं ऐसे दूरस्थ इलाकों से आएंगी, जो अब कम दूरस्थ रह गए हैं।

क्वारंटाइन और यात्रा प्रतिबंध इस तरह की महामारी को रोकने का महत्वपूर्ण साधन है, लेकिन ये अपने आप काम नहीं करते। अगर इन्हें सफल बनाना है तो इन्हें बहुत तेजी से लागू करना पड़ता है। ऐसा करने के लिए संक्रमित लोगों का सही डेटा होना जरूरी है। हमें हेल्थ केयर के मुख्य कार्यों का समर्थन करना चाहिए। हमें यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि गरीब देशों सहित सभी देश नए प्रभावितों की पहचान और इलाज तेजी से कर सकें। मैं जानती हूं कि कोविड-19 को लेकर चीन के जवाब की भारी आलोचना हुई, लेकिन सोचिए अगह यह बीमारी अफ्रीकी देश चाड से शुरू होती, तो क्या हुआ होता? जहां एक लाख लोगों पर औसत तीन से साढ़े तीन डॉक्टर हैं। चाड अथवा हाल ही में इबोला के प्रकोप से उभरे कांगो में किसी भी नई बीमारी के आने पर क्लिनिक और हेल्थ केयर सेवा देने वालों में शायद ही यह क्षमता होती कि वे इसकी तेजी से पहचान कर पाते और इसकी सूचना राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों को दे पाते। क्या वे अकेले ही बीमारांे का इलाज कर पाते जिससे यह बीमारी आगे न फैलती। कोविड-19 ने हेल्थ केयर तंत्र पर एक भारी दबाव डाल दिया है।

अगर हम कोविड-19 से निपटने को पूरी तरह तैयार होते तो चीन के पास नई बीमारी की और भी तेजी से पहचान की क्षमता होती, बिना नए क्लिनिक बनाए उसने इलाज उपलब्ध कराया होता और उसने चीन के सोशल मीडिया में चल रही अफवाहाें को रोकने के लिए जनता को सही जानकारी दी होती। दुनिया के स्वास्थ्य अधिकारियों को जल्दी ही पता लग गया और तब राष्ट्रीय हेल्थ केयर तंत्र के साथ सही जानकारी को साझा किया गया। जिन्होंने अलग-अलग देशों को संक्रमण नियंत्रण, दवा व जरूरी सामान को जमा करके व अन्य तरह का प्रशिक्षण देकर महामारी से निपटने के लिए तैयार किया। यह शायद उतनी तेजी से भी नहीं फैलता और हम उतने डरे नहीं होते, जितना अब हैं। लेकिन, हमारे पास अभी भी इसका प्रकोप है।

यह डरावना समय है और हमारी अधिकतर खबरें भी डरावनी ही हैं। बहुत सारी बुरी पर आकर्षक प्रतिक्रियाओं, घबराहट, विदेशियों को पसंद न करना, खुले में न जाना या निरंकुशता में से आप किसी को भी चुन सकते हैं। अतिसरल झूठ जो हमें यह समझाता है कि घृणा और आवेश और अकेलापन हमें सुरक्षित रखेगा। ये ऐसी प्रतिक्रियाएं हैं, जो हमें अगले प्रकोप के लिए कम तैयार करती हैं। कुछ ऊबाऊ लेकिन उपयोगी प्रतिक्रियाएं हैं जो हमें आज भी मदद करती हैं और भविष्य में और भी अधिक संक्रामक बीमारियों का सामना करने के लिए तैयार करती हैं। उनके बारे में बात करना रोचक नहीं है, लेकिन वे काम करती हैं। जिन देशों में हेल्थ केयर और बीमारी निगरानी तंत्र नहीं हैं, उनकी मदद करें। हमें सप्लाई चेन में अधिक निवेश करके वैश्विक स्वास्थ्य तंत्र बनाना चाहिए, हरेक के लिए बेहतर जांच उपकरण व बेहतर इलाज उपलब्ध हो। शिक्षा को समर्थन दें, ताकि हम सब खतरों के विज्ञान और गणित पर अच्छे तरीके से बात कर सकें। हमारे निर्णय समानता से निर्देशित होने चाहिए, क्योंकि अनेक मामलों की तरह इस मामले में भी समानता और निजहित साथ चलेंगे। (यह लेखक के अपने विचार हैं।)

आलाना शेख
वर्ल्ड हेल्थ एक्सपर्ट

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