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सस्ता शिवनीर बंद, पेयजल के लिए भटक रहे राहगीर
एमपी नगर जोन-2 में सरगम टॉकीज के पास स्थित शिवनीर के पास खड़े रामस्वरूप जैन और लक्ष्मण भारके हाथ में पानी की बोतल लेकर शिवनीर के अासपास चक्कर लगा रहे थे। पूछा तो जवाब मिला कि लोडिंग वाहन चलाने का काम करते हैं और काफी समय बाद इस तरफ आना हुआ तो पीने के पानी लेने के लिए शिवनीर आ गए। यहां देखा तो न पानी है और न कोई बताने वाला की शुद्ध पानी कहां मिलेगा। बेचारे खाली बोतल लेकर चले गए। एक होटल पर पानी मांगा तो उन्होंने 20 रुपए की मिनरल वाटर बॉटल खरीदने के लिए कहा। दो लोगों के लिए 40 रुपए खर्च करने का सौदा रामस्वरूप व लक्ष्मण को महंगा लगा तो वे हबीबगंज रोड पर गए। वहां जिस पाइपलाइन से पानी रिस रहा था, वहीं से बोतल भर ली। इसके बाद डीबी स्टार टीम मिंटो हॉल के पास स्थित शिवनीर प्लांट देखने पहुंची तो उसमें ताले लगे मिले। इसके आसपास असामाजिक तत्वों का जमावड़ा लगा था। दूसरी तरफ नगर निगम द्वारा लगाए गए प्याऊ में तो पहले से ही साफ पानी नहीं मिलता था। शुद्ध पेयजल के लिए शुरू किए गए शिवनीर में भी पानी नहीं है। डीबी स्टार ने मामले की पड़ताल की तो पता चला कि नगर निगम ने शहर के राहगीरों, दुकानदारों के लिए छह स्थानों पर शिवनीर बांटने की योजना बनाई थी। सितंबर 2015 में विश्व हिन्दी सम्मेलन को ध्यान में रखकर मिंटो हॉल के पास आनन-फानन में एक शिवनीर सेंटर भी शुरू कर दिया था। इधर एमपी नगर में भी एक शिवनीर केंद्र बनाया गया। लेकिन यह दोनों ही पिछले एक साल से बंद पड़े हैं। इस मुद्दे पर नगर निगम का कोई भी जिम्मेदार अधिकारी बोलने को तैयार नहीं है। तब तत्कालीन मेयर आलोक शर्मा से बात की, उन्होंने बताया कि अफसरों ने अपने हिसाब से इन्हें ऐसे स्थानों पर लगवाया, जिसका आम जनता को कोई फायदा नहीं हुआ। इस कारण दोनों जगह बंद हो गए। अब हाल यह है कि गर्मी बढ़ने के साथ जनता को शुद्ध पेयजल के लिए भटकना होगा।
अफसरों ने मनमानी की थी
अफसरों ने अपने हिसाब से ही शिवनीर लगाने की योजना बनाई थी। तब मैंने कहा था कि पहले हमें भीड़-भाड़ वाले इलाकों में प्लांट स्थापित करना चाहिए। लेकिन अफसरों ने मनमानी की। -
आलोक शर्मा, पूर्व महापौर, नगर निगम भोपाल
राजधानी में आम जनता और दुकानदारों को सस्ता व साफ पानी उपलब्ध कराने के लिए शिवनीर नाम से दो आउटलेट शुरू किए गए थे, जो एक साल पहले ही बंद हो गए। लाखों रुपए खर्च कर लगाए गए ये प्लांट बंद पड़े हैं। राहगीर साफ पानी पीने के लिए भटक रहे हैं।