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नगरवासियों ने हर्बल गुलाल व प्राकृतिक रंगों से होली खेलकर पानी बचाने का दिया संदेश

एक वर्ष पहले
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शहर में सोमवार को होली दहन के बाद मंगलवार को धुलेंडी मनाई गई। शहर सहित अंचल में लोगों ने सूखे रंग-गुलाल, प्राकृतिक रंग और फूलों से होली खेली। नगरपालिका ने दोपहर 2.30 बजे पूरे शहर में एक साथ 45 मिनट तक जल सप्लाय किया। नगरपालिका ने 15 मिनट कम पानी का सप्लाय कर पानी बचाया। धुलेंडी को लेकर बच्चों और महिलाओं सहित युवाओं में उत्साह देखा गया।

धुलेंडी पर बच्चों, महिलाओं और युवाओं ने सुखे रंग, गुलाल और फूलों से होली खेलकर एक-दूसरे को पर्व की बधाई दी। सूखे रंग से होली खेलकर पानी बचाने का संदेश भी दिया। वहीं धुलेंडी पर गमी के बाद पहली होली होने पर समाजजन गमी वाले परिवारों के घर रंग लगाने के लिए गए। नगरपालिका ने पूरे शहर में एक साथ दोपहर 2.30 बजे पानी का 45 मिनट सप्लाय किया। नपाकर्मियों ने जानकारी देते हुए बताया कि पानी सप्लाई एक दिन छोड़कर जाेन के हिसाब से एक घंटे तक किया जाता है लेकिन धुलेंडी पर सिर्फ 45 मिनट पानी सप्लाई कर 15 मीनट पानी की बचत की गई। धुलेंडी पर भगवती कॉलोनी में महिलाओं ने होली की गीतों पर नृत्य कर हर्बल गुलाल से होली खेली। वहीं शहर थाना परिसर में बुधवार को शहर एवं ग्रामीण थाना पुलिस ने होली खेलकर पर्व मनाया। गायत्रीधाम जामली में लोगों को होली का वास्तविक महत्व बताने के लिए प्राकृतिक रंगों से होली खेली गई। इसमें हल्दी, चंदन, अष्टगंध, नीम, मुल्तानी मिट्टी, टेसू, काली मिट्टी, नागरमोथा, गुलाबजल आदि से बने सुगंधित उबटनों से साधकों ने होली खेली।

ग्रामीणों ने सूखे रंग से खेली होली, लोगों को दिया पानी बचाने का दिया संदेश

वरला/बलवाड़ी | वरला, बलवाड़ी सहित ग्रामीण अंचलों में होली पर्व मनाया गया। होली दहन के अगले दिन धुलेंडी पर बच्चों, महिलाओं सहित युवाओं ने एक-दूसरे को रंग लगाकर पर्व की बधाई दी। युवाओं ने सूखे रंग से होली खेलकर पानी बचाने का संदेश दिया। इस दौरान विभिन्न जगहों पर फागोत्सव भी मनाया गया।

जामनिया गांव में मांदल की थाप पर नृत्य कर सूखे रंग से खेली होली

बिजासन घाट | जामनिया गांव में मंगलवार रात होली दहन के बाद बुधवार को धुलेंडी मनाई गई। इसमें ग्रामीणों ने मांदल व बैंड पर नाचते हुए गुलाल लगाकर होली मनाई। ग्रामीणों ने पानी बचाने के लिए सूखे रंग से होली खेली। बजारिया रावत, रामा कनोजे, शोभाराम रावत, सकाराम डावर, सुरेश, रामजीलाल, हजारिया सहित ग्रामीण मौजूद रहे।

पर्यावरण संरक्षण के लिए जलाई कंडों की होली

निवाली | सोमवार व मंगलवार को दो दिन होली जलाई गई। दोनों ही दिन लोगों ने कंडों की होली जलाई। मंदिर चौक में सोमवार रात 11.20 बजे होलिका दहन किया गया। इसमें कंडों की होली जलाकर व लोंग-कपूर की आहुति डालकर पर्यावरण को स्वच्छ बनाने का प्रयास किया गया। मंगलवार रात 9 बजे आदिवासी समाज के पटेल फलिए के पटेल ने होलिका दहन किया।

कंडों की होली जलाई

अंजड़ | नगर में सोमवार रात में होलीटवड़ा में सार्वजनिक होलिका दहन का आयोजन हुआ। होलिका दहन से पूर्व नगर के पटेलों ने स्थानीय गढ़ी मोहल्ला स्थित श्रीराम मंदिर से ढोल के साथ चल समारोह निकाला। होलिका दहन स्थान पर पहुंचकर होली की सामूहिक विधिवत पूजा-अर्चना की गई। इसके बाद कंडों की होली का दहन किया गया। इस साल प्रकृति को बचाने के उद्देश्य से लकड़ी की बजाय कंडों की होली का दहन किया गया। इसमें कई क्विंटल लकड़ी की बचत हुई। वहीं पर्यावरण को बचाने की अनुकरणीय पहल की गई।

नहरा समुदाय के 100 लोगों ने पूरी रात किया नृत्य, अंगारों पर भी चले

_photocaption_धनोरा | आदिवासी समाज में होली दहन की अलग परंपरा है। इसमें गांव के मुखिया व बुजर्गों की मौजूदगी में होली दहन का दिन तय कर होली दहन की जाती है। मंगलवार रात को गांव पटेल सहित समाजजनों की मौजूदगी में पारंपरिक तरीके से होली दहन की गई। जिसमें महाराष्ट्र से आए नहरा समुदाय के 100 लोगों ने होलिका के पास मांदल की थाप पर नृत्य किया। नहरा समुदाय की टोली ने विभिन्न प्रकार के स्वांग रचकर ग्रामीणों का मनोरंजन किया। जलती होली के धधकते हुए अंगारों पर चलकर सबको आश्चर्यचकित कर दिया। रात 10 बजे से सुबह 7 बजे तक नहरा समुदाय के साथ ग्रामीण मांदल की थाप पर थिरकते रहे। महाराष्ट्र से आए झीना ने बताया वह होलिका दहन पर इस तरह का नृत्य 25 सालों से कर रहे है। होली के 5 दिन तक अलग अलग गांवों में बुलाया जाता है। वहां जाकर नृत्य करते है। रंग पंचमी के बाद ही घर लौटते है। इस आयोजन में ग्राम पटेल सहित 2 हजार से अधिक लोग शामिल रहे।*photocaption*

नगरपालिका ने शहर में 45 मिनट पानी सप्लाई किया, 15 मिनट का बचाया पानी

भगवती कॉलोनी में महिलाओं ने नृत्य कर हर्बल गुलाल से खेली होली।
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