शहर के सांता क्लाॅज रिटायर्ड अधिकारी राठौर
लाल-सफेद कपड़े, बड़ी-सी सफेद दाढ़ी वाले, सांता क्लॉज तो क्रिसमस के मौके पर खूब दिखाई देते हैं। लेकिन शहर में एक शख्स ऐसे हैं जो सफारी सूट पहने बच्चों के बीच बारह महीने दिखाई देते हैं। कोई बच्चा उन्हें संतरे और अंगूर वाले अंकल के नाम से पुकारता है तो कोई उन्हें बिस्किट वाले अंकल के नाम से जानता है। कुछ बच्चों के परिजन उन्हें आधुनिक सांता क्लॉज भी कहते हैं। ये हैं सीआईडी से सेवानिवृत्त हैंड राइटिंग एक्सपर्ट जेएल राठौर। वे 74 वर्ष के हैं और होशंगाबाद रोड स्थित सेंचुरी इंक्लेव में रहते हैं।
इनके परिवार में प|ी और चार बेटे हैं। रिटायर होने के बाद उन्होंने खुद को समाज सेवा में व्यस्त रखा है। राठौर रोज सुबह टहलने जाते हैं। वे अपने साथ एक झोले में बिस्किट और फल लेकर चलते हैं। रास्ते में मजदूर या जरूरतमंद बच्चे मिलते हैं तो उन्हें बिस्किट, संतरे, अंगूर, केले समेत मौसमी फल बांटते हैं। इस तरह वे रोज 100 से 150 बच्चों से मिलकर बात करते हैं। उन्हें पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा राठौर को हर महीने जो पेंशन मिलती है, उसमें से आधी “दिव्यांग नारायण सेवा समिति’ को देते हैं। वे जरूरतमंद बच्चों की हर संभव मदद करते हैं। वे वकालत के लिए भी समय निकालते हैं। साथ ही गरीबों को कानूनी सलाह और सरकार की योजनाओं के बारे में जानकारी देते हैं।
रोजाना सौ से अधिक बच्चों को बांटते हैं फल और बिस्किट
इन पर अमल
होना चाहिए
राजधानी में विभिन्न जिलों के बाशिंदे रोजगार और मेहनत-मजदूरी की तलाश में परिवार समेत आते हैं। इसमें उनके बच्चे भी शामिल होते हैं। इन बच्चों के लिए निर्माण स्थल के आसपास एक कमरा बनाकर पढ़ाई की व्यवस्था करना चाहिए। उनके लिए खेल के साधन मुहैया कराए जाएं, ताकि वे मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रहें। -
जेएल राठौर, निवासी- सेंचुरी इंक्लेव