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मां को कोरोना, बीमार बेटे को ले भाई दिनभर चक्कर लगाता रहा, छह अस्पतालों ने भगाया

News - आठ अस्पतालों से नीता सिसौदिया ग्राउंड रिपोर्ट... गाेकुलदास : पॉजिटिव को दूसरे अस्पताल भेजा, अब...

Mar 27, 2020, 07:35 AM IST
Indore News - mp news corona to mother brother carrying sick son kept wandering all day six hospitals banished
आठ अस्पतालों से नीता सिसौदिया ग्राउंड रिपोर्ट...

गाेकुलदास : पॉजिटिव को दूसरे अस्पताल भेजा, अब कार्रवाई

खातीवाला टैंक क्षेत्र की जिस 55 वर्षीय महिला में कोरोना का संक्रमण मिला था, उसे गोकुलदास अस्पताल ने भर्ती करने से मना कर दिया था। एेसे में संक्रमित महिला को 10-12 किमी दूर अरबिंदो अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती होना पड़ा। इस बीच, महिला के बेटे ने शहर के सभी बड़े अस्पतालों में जाकर बात की लेकिन किसी ने भी भर्ती करने के लिए हां नहीं की। अब स्वास्थ्य विभाग ने गाेकुलदास अस्पताल को नोटिस जारी कर तीन दिन में जवाब मांगा है।

भास्कर सवाल: मरीजों से भाग क्यों रहे अस्पताल?

टीबी अस्पताल : देर शाम तक कोई सैंपल लेने नहीं आया तो मरीज का रिश्तेदार बरामदे में टहलता रहा

पॉजिटिव मरीज का रिश्तेदार, सैंपल देने के लिए बैठाया। मुंह पर रूमाल। जबकि वो संक्रमित एरिया। ऐसे ही बाहर घूम रहा क्योंकि कोई सुनवाई ही नहीं हुई।

इंदौर|खजराना क्षेत्र निवासी 70 वर्षीय महिला में बुधवार देर रात को कोरोनावायरस के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। सुयश अस्पताल में भर्ती है। उनका 45 वर्षीय बीमार बेटे का भी चरक अस्पताल में इलाज चल रहा था, लेकिन मां में कोरोना संक्रमण का पता लगते ही अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। उनके रिश्तेदार जुबैर मुलतानी बताते हैं कि अस्पताल वाले बोले- एमवायएच ले जाओ। हम पहले उन्हें मयूर अस्पताल ले गए। वहां उन्हें लेने से मना कर दिया। इसके बाद बांबे हॉस्पिटल ले गए। वहां भी भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद सुयश अस्पताल आए। यहां भी वैसा ही बर्ताव हुआ। फिर चोइथराम अस्पताल ले गए। वहां भी रिफ्यूज कर दिया। इसके बाद एमवायएच ले गए। यहां भी सुनवाई नहीं हुई। पूरा दिन मरीज को लेकर घूमते रहे। शहर के छह अस्पताल भटके लेकिन मां संक्रमित होने से बेटे को भर्ती नहीं किया गया। अगर इस बीमारी का प्रकोप बढ़ेगा तो क्या हालत होगी। एम्बुलेंस सेवा ने भी हमें परेशान करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। एम्बुलेंस 108 को फोन लगाया तो बोले कि 104 नंबर पर लगाओ।


यहां कोरोना पॉजिटिव आए दस मरीजों के रिश्तेदारों को एमआर टीबी अस्पताल में सैंपल देने के लिए भेजा गया। यहां उन्हें सामान्य फ्लू की ओपीडी में ही खड़ा कर दिया। वार्ड बॉय को मास्क पहना दिया गया, लेकिन बिना सुरक्षा साधन के वे मरीजों को वार्ड तक लाते ले जाते रहे जबकि यहां पॉजिटिव और संदिग्ध मरीजों को भी रखा गया है। यहां इंदौर सहित आसपास के जिलों से मरीज पहुंच रहे हैं लेकिन कोई भी व्यक्ति पूरी तरह सुरक्षित होकर नहीं आ रहा है। कई बार भीड़ इतनी हो जाती कि लोग पास-पास खड़े होते जा रहे थे। दोपहर में पॉजिटिव मरीजों के परिजन को अस्पताल भेजा गया ताकि उनके सैंपल लेकर जांच की जा सके। रानीपुरा क्षेत्र के एक मरीज को अस्पताल लाने से लेकर जांच होने तक एक दोस्त भी साथ था। उसे वार्ड में भर्ती किया गया। शाम तक जब कोई सैंपल लेने नहीं आया तो वह खुद उठकर बरामदे में चहलकदमी करता नजर आया। हैरानी यह है कि यहां कोई रोकने-टोकने वाला भी नहीं था।

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