कोरोना का खौफ: गुजरात काम के लिए गए मजदूर पैदल लाैट रहे घर

Jhabua News - कोरोना के कारण पूरा देश लाॅकडाउन है। समय रहते जो लोग अपने घर पहुंचे गए, वो ठीक। लेकिन जो नहीं पहुंच पाए, वो हर जतन...

Mar 27, 2020, 07:41 AM IST
Jhabua News - mp news corona39s awe gujarat workers go home for work

कोरोना के कारण पूरा देश लाॅकडाउन है। समय रहते जो लोग अपने घर पहुंचे गए, वो ठीक। लेकिन जो नहीं पहुंच पाए, वो हर जतन कर रहे हैं। गुजरात में फंसे जिले के सैकड़ों मजदूरों को जब कोई साधन नहीं मिला तो वो पैदल ही आने लगे। अब तक 500 से ज्यादा मजदूर इस तरह अपने घर लौट चुके हैं। दो-दो दिन तक लगातार पैदल चलने के बाद घर पहुंच पा रहे हैं। कई ऐसे हैं, जो ऑटो रिक्शा से सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर अपने घर पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। दो दिन पहले सूरत से राजस्थान जा रहे ऐसे 8 लोग मिले थे। गुरुवार को भी 5 ऑटो से उज्जैन जाने के लिए लोग निकले। ये भी गुजरात से आ रहे थे।

बुधवार शाम से गुजरात से पैदल आने वाले मजदूर जिले की सीमा में पहुंचने लगे। हाईवे पर पूरा-पूरा दिन चलने के बाद वो पिटोल बॉर्डर पहुंचे। यहां उनकी स्क्रीनिंग करने और सामान को सैनिटाइज करने के बाद अंदर आने दिया गया। जिले में आने के बाद भी कोई साधन नहीं मिला। गुरुवार तड़के 4 बजे 100 से ज्यादा महिला-पुरुष शहर से गुजरे। इनमें से कुछ देवझिरी के थे, कुछ मोहनपुरा के और बाकी कालीदेवी के आसपास के गांवों के। इसके बाद दिनभर ये सिलसिला चला। उन्होंने बताया, और भी लोग पीछे आ रहे हैं। ये कतारें बहुत लंबी हैं।

विधायक ने लिखा पत्र : झाबुआ विधायक कांतिलाल भूरिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान को इन मजदूरों की मदद के लिए पत्र लिखे। इनमें मांग की गई कि झाबुआ और आलीराजपुर के गुजरात में फंसे मजदूर पैदल लौट रहे हैं। कई सारे गुजरात में फंसे हुए हैं। इसलिए वो जहां है, उनके रहने, खाने और मूलभूत सुविधाओं का इंतजाम सरकार को करना चाहिए।

कोरोना 21 दिन के
लॉकडाउनका दूसरा दिन


कलेक्टर की कार में कलेक्टर, एसपी, ड्रायवर और गार्ड

ऑटो से आए, डर लगा ताे गांव के रास्ते चले गए


बच्चे गोद में, सामान सिर पर


सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष सिर पर भारी वजन वाले सामान के बोरे और बच्चों को कंधों और गोद में लेकर कई मील पैदल चल रहे हैं। लोग लेकिन मजबूरी में उनकी इस पदयात्रा से कई सवाल खड़े हो रहे हैं। समय रहते उन्हें या तो सरकारी मदद से घर तक पहुंचाया जाना था। या वो जहां थे, वहीं उनके रहने-खाने की व्यवस्था की जाती। इस तरह से भीड़ का आना संक्रमण फैलने की चिंता में डालता है।


गुरुवार दोपहर गुजरात की ओर से 5 ऑटो में लगभग 15 लोग पहुंचे। ये गुजरात से उज्जैन जाने के लिए निकले थे। शहर की तरफ आए और सीमा सील थी तो ऑटो घुमा लिए। फिर ग्रामीण सड़क की ओर चले गए। यहां से रास्ता पूछते हुए आगे गए। इनमें महिलाएं भी थी। परिवार वालों ने बताया, उज्जैन में ही रहते हैं। इसके अलावा कहीं कोई आसरा नहीं है।


कोराेना के खतरे से बचाव के लिए और सोश्यल डिस्टेंस मैंटेन कराने के लिए नियम तय किए हैं। कलेक्टर ने आदेश जारी किए कि बाइक पर एक व्यक्ति और कार में ड्राइवर सहित दो से ज्यादा लोग नहीं बैठ सकते। गुरुवार को कलेक्टर-एसपी सहित सारे अफसरों ने थांदला गेट पर जमा होकर लोगों से इस नियम का पालन कराया। बाइक पर दो से ज्यादा सवारी हुई तो चाबियां निकलवाकर गाड़ी रख ली। हर आने-जाने वाली कार चेक की गई कि दो से ज्यादा लोग तो नहीं हैं, लेकिन इसी दौरान कलेक्टर की कार में खुद कलेक्टर, एसपी, ड्राइवर और गार्ड सहित 4 लोग बैठे थे। एसडीएम की कार में भी एसडीएम के अलावा ड्राइवर और गार्ड थे। हो सकता है, इमरजेंसी ड्यूटी के लिए ज्यादा कर्मचारियों को एक गाड़ी में बैठना पड़ता हो, लेकिन कलेक्टर की कार के पीछे-पीछे एसपी साहब की कार चल रही थी। इसमें ड्राइवर और गार्ड थे।

इधर, कार में दो से ज्यादा लोग तो गाड़ी खड़ी कराई, लेकिन अफसरों की कार में 4 लोग

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