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केरवा के अासपास ग्रीन बफर को डी-नोटिफाई किए जाने से पूरे इलाके की हरियाली पर संकट

एक वर्ष पहले
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लंबेे इंतजार के बाद आए भोपाल मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में बड़े तालाब के अलावा शहर के ग्रीन कवर को लेकर किए गए प्रावधान भी सवालों के घेरे में आ गए हैं। लैंडस्कैप आर्किटेक्चर की एक्सपर्ट सविता राजे का मानना है कि इन प्रावधानों से शहर की हरियाली पर विपरीत असर पड़ेगा, जबकि बेहतर आबोहवा बेस्ट लिवेबल सिटी के कंसेप्ट का एक जरूरी पैरामीटर है।

दावों के अनुरूप नहीं मास्टर प्लान के प्रावधान

मास्टर प्लान में हरियाली को लेकर किए गए दावे

{ मास्टर प्लान- 2031 में ग्रीन एरिया को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 32 प्रतिशत करने का दावा किया गया है।

{ यह भी कहा गया है कि लेक और रिवर फ्रंट के साथ सभी जलस्रोतों के बफर जोन को संरक्षित किया जाएगा।

{ बफर जोन में ग्रीन टीडीआर देंगे।

लेकिन प्लान में जो प्रावधान किए
गए हैं उनके नतीजे इन दावों के
एकदम विपरीत आने की आशंका जताई जा रही है।

दुनियाभर में हरियाली को बचाने के लिए तोड़े जा रहे पुराने निर्माण

आश्चर्यजनक यह है कि यह सब तब किया जा रहा है जब पूरी दुनिया में हरियाली और जलस्रोतों के संरक्षण के उदाहरण हमारे पास मौजूद हैं। सियोल में शियोनजिशियोन नदी के चारों ओर 1950 से 53 के बीच हाईवे बना दिया था और यहां हाईराइज बिल्डिंग तन गईं थीं। यहां शहर का सीवर मिक्स होने लगा था नतीजा नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया था। 2003 में इस हाईवे को तोड़ दिया गया। अब यह नदी कोरिया जाने वाले पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन गई है। इसी तरह सिंगापुर में बिशन पार्क 2.7 किमी लंबी कांक्रीट ड्रेनेज चैनल को साइनस नदी के रूप में रिस्टोर किया गया है।

पूज्य सिंधी पंचायत का तर्क- तालाब किनारे रोड से होगा बैरागढ़ का विकास

भोपाल| पूज्य सिंधी पंचायत के महासचिव माधु चांदवानी ने बड़े तालाब के किनारे लालघाटी से बैरागढ़ होते हुए भैंसाखेड़ी तक प्रस्तावित सड़क से बैरागढ़ का विकास होगा। इस सड़क से न तो हरियाली का नुकसान होगा और न तालाब को कोई फर्क पड़ेगा। चांदवानी ने कहा कि कुछ लोग बैरागढ़ के विकास को रोकना चाहते हैं, इसलिए वे बड़े तालाब के नाम पर भ्रम फैला रहे हैं। सड़क बन जाने के बाद वहां ढाबे आदि खुलने के लिए जगह ही नहीं है।

22 गांवों में निर्माण
पर लगी रोक हटाएं


जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के कार्यकारी अध्यक्ष अनोखी मानसिंह पटेल ने कलेक्टर तरुण पिथोड़े को सौंपे एक पत्र में कैचमेंट एरिया के नाम पर 22 गांवों की जमीन पर निर्माण पर लगी रोक को हटाने की मांग की है। इस रोक के कारण किसान पलायन कर रहे हैं। पटेल ने कहा कि शहरी क्षेत्र में कैचमेंट का दायरा 50 मीटर और ग्रामीण में 250 मी. रखा है, यह भेदभाव क्यों?

हकीकत ये कि...10 साल में 26 फीसदी कम हो गया भोपाल का ग्रीन कवर

इस तरह बिगड़ेगा पूरा ईकोलॉजी सिस्टम

जलस्रोतों के चारों तरफ रोड बनाने के प्रस्ताव से होने वाले नुकसान को इस तरह समझा जा सकता है कि तालाब और झील की मछलियां किनारे पर साफ जगह में अंडे देती हैं, सड़क बनने पर इस पर विपरीत असर पड़ेगा। मेंढक, पानी और मिट्टी दोनों में रहता है, उसके लिए जगह नहीं बचेगी। कुल मिलाकर इकोलॉजी सिस्टम बिगड़ जाएगा। जो पूरे क्लाइमेट को बिगाड़ेगा।

भोपाल मास्टर प्लान-2031

डिकेडल डीफॉरेस्टेशन ऑफ भोपाल सिटी 2009 से 2019 की रिपोर्ट के अनुसार भोपाल में पिछले दस साल में शहर का ग्रीन कवर 26 फीसदी कम हुआ है। इसमें से 13 फीसदी की गिरावट तो पिछले तीन सालों में तीन सालों में हुई है। पांच साल में भोपाल में 2.50 लाख ऐसे पेड़ काटे जा चुके हैं, जिनकी उम्र 40 वर्ष से अधिक थी। 95 हजार 850 पेड़ तो उन 9 स्थानों पर काटे गए हैं, जहां कोई सरकारी या व्यावसायिक निर्माण प्रोजेक्ट चल रहे हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शहर के बीच से ही हरियाली को खत्म किया जा रहा है। नतीजतन शहर का तापमान बढ़ रहा है।


भो पाल मास्टर प्लान-2031 के ड्राफ्ट में केवल बड़े तालाब ही नहीं बल्कि शहर के सभी जलस्रोतों और उनके आसपास की हरियाली पर संकट नजर आ रहा है। पूरी दुनिया जलस्रोतों के संरक्षण के लिए उनके आसपास से सड़कें और बड़े निर्माण खत्म कर रही है। हरियाली बढ़ाने के जतन किए जा रहे हैं और हम शहर के बीच में हमारे पास मौजूद जंगल को खत्म कर रहे हैं। केरवा की पश्चिम दिशा में जहां पहले ग्रीन बफर था इसे डी-नोटिफाई कर दिया है। बफर जोन खत्म होने पर यहां लैंडयूज चेंज की अनुमति मिल जाएगी और रेसीडेंशियल ही नहीं बल्कि कमर्शियल एक्टिविटी भी शुरू हो सकती है। केरवा की उत्तर दिशा में तो रेसीडेंशियल लैंडयूज का प्रावधान कर दिया गया है। तालाब, नदी और सभी डैम के आसपास हदबंदी के लिए सड़क बनाने का प्रस्ताव बिल्कुल वैसा ही है, जैसे इन जलस्रोतों को ‘माला’ पहनाई जा रही है।

पहाड़ियां, झील और हरियाली भोपाल की पहचान है। इन तीनों से मिलकर शहर की आबोहवा शुद्ध होती है। मास्टर प्लान - 2031 के ड्राफ्ट को देखा जाए तो प्लान तैयार करने से पहले की गई स्टडी में स्वीकार किया गया है कि इन सबके संरक्षण की जरूरत है, लेकिन ड्राफ्ट तैयार करते समय लगता है इसे भूल गए। पिछले दिनों केरवा डैम रोड पर जिस ग्रीन एरिया से रेस्त्रां हटाए गए थे। अब उसे पीएसपी (सार्वजनिक, अर्ध सार्वजनिक) किया जा रहा है। यानी यहां बड़े इंस्टीट्यूट और सरकारी दफ्तर आदि भी आ सकते हैं। यह प्रावधान तो इस पूरे क्षेत्र की हरियाली पर ही संकट खड़े कर देगा।

सविता राजे, एसो. प्रोफेसर, आर्किटेक्चर एंड प्लानिंग (मैनिट)

एक्सपर्ट रिपोर्ट**
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