डीएवीवी ने सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए भेजे 14 टीचिंग विभागों के प्रस्ताव

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Jan 16, 2020, 07:50 AM IST
खराब था अनुभव: 8 विभागों को मिलना था दर्जा, सिर्फ दो को मिल पाया था

पिछले सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए यूनिवर्सिटी का अनुभव खराब था। उसने 8 विभागों के प्रस्ताव भेजे थे। सालभर तक कई बार भोपाल में प्रेजेंटेशन भी हुए, लेकिन 26 नवंबर को जब घोषणा हुई तो 2 विभागों को यह दर्जा मिला। ग्रांट भी 40 करोड़ के बजाय महज दो करोड़ रुपए की दी गई। वर्ल्ड बैंक प्रोजेक्ट के तहत उच्च शिक्षा विभाग गुणवत्ता उन्नयन परियोजना में सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए प्रदेश की बाकी यूनिवर्सिटी को इसके मुकाबले ग्रांट भी कई गुना ज्यादा मिली थी।

इन विभागों को दिया गया था दर्जा

डीएवीवी के कॉमर्स एंड मैनेजमेंट और डेटा साइंस एंड फॉर कॉस्टिंग को एक्सीलेंस का दर्जा मिला था। इसके अलावा प्लेसमेंट सेल को अलग से इस प्रोजेक्ट में जोड़ा गया था। कॉमर्स एंड मैनेजमेंट के लिए महज 70 लाख और डेटा साइंस एंड फॉर कॉस्टिंग के लिए महज 1 करोड़ 2 लाख रुपए की ग्रांट मिली थी। प्लेसमेंट सेल को जरूर 5 लाख रुपए अलग से दिए गए थे। चौंकाने वाली बात यह थी कि भोपाल की बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी के छह विभागों और प्लेसमेंट सेल को यह दर्जा दिया गया था और उन्हें 11 करोड़ रुपए की कुल ग्रांट मिली थी, जबकि ग्वालियर के सात विभागों को एक्सीलेंस का दर्जा और लगभग 17 करोड़ रुपए की ग्रांट मिली थी।

भास्कर संवाददाता | इंदौर

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी ने सेंटर फॉर एक्सीलेंस के लिए प्रदेश सरकार को 14 टीचिंग विभागों के नाम भेजे हैं। शासन की तय गाइड लाइन के अनुसार ही यह प्रस्ताव तैयार किए गए हैं। इन विभागों में रिसर्च और अन्य सुविधाओं के लिए यूनिवर्सिटी ने 72 करोड़ रुपए मांगे हैं। संभावना है कि तीन माह में इनमें से ज्यादातर विभागों को सेंटर फॉर एक्सीलेंस का दर्जा मिल जाएगा। इन विभागों को जो राशि मिलेगी, उससे रिसर्च उपकरण खरीदी से लेकर लैब और अन्य जरूरी संसाधनों पर काम होगा।

दरअसल, वर्ल्ड बैंक के प्रोजेक्ट के तहत शासन ने सभी स्टेट यूनिवर्सिटी से इस पर प्रस्ताव मांगे हैं। क्वालिटी रिसर्च के लिए डीएवीवी ने सेल्फ फाइनेंस को छोड़ बाकी विभागों के नाम भेजे हैं। सेल्फ फाइनेंस विभागों को इस बार गाइड लाइन में शामिल नहीं किया गया था, इसलिए प्रबंधन ने आईआईपीएस, आईएमएस जैसे विभागों के प्रस्ताव नहीं भेजे हैं।

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