पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने का आदेश देने की मांग की
निर्भया के एक दोषी पवन गुप्ता ने चौथे डेथ वारंट पर अमल से 8 दिन पहले फांसी से बचने का एक और पैंतरा आजमाया। पवन ने गुरुवार को अदालत में याचिका दायर कर कहा कि पिछले साल जब वह मंडोली जेल में बंद था, तो दो पुलिसकर्मियों ने उससे 26 और 29 जुलाई को मारपीट की थी। इससे उसके सिर में गंभीर चोटें आईं। उसने पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश देने की मांग की। उसकी इस मांग पर मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट प्रियांक नायक ने मंडोली जेल प्रशासन को नोटिस देकर 8 अप्रैल तक जवाब मांगा है। बता दें कि निर्भया के दोषी फांसी की सजा टलवाने के लिए लगातार पैंतरेबाजी कर रहे हैं। इस साल जनवरी से लेकर अब तक दोषियों की फांसी 3 बार टल चुकी है। अब चारों दरिंदों को 20 मार्च को सुबह साढ़े 5 बजे फांसी दी जानी है।
दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को दोषी पवन के पिता हीरा लाल गुप्ता की उस याचिका को को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने कहा था कि 16 दिसंबर, 2012 को घटना के दौरान मौजूद गवाह का बयान विश्वसनीय नहीं है। इससे पहले इसी साल 27 जनवरी में हीरालाल की इसी याचिका को दिल्ली की निचली अदालत ने भी सुनवाई से इनकार कर दिया था।