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डीएफओ ने सड़क निर्माण रोकने का दिया आदेश ठेकेदार ने चार गुना बढ़ाई काम की रफ्तार

एक वर्ष पहले
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प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना द्वारा सुंदरदेव से गुलाई तक सड़क का निर्माण किया जा रहा है। वन क्षेत्र में बनाई जा रही इस सड़क में ठेकेदार व विभाग द्वारा वन नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। घने वन क्षेत्र में किसी प्रकार कैंप लगाने, उत्खनन, ब्लास्टिंग करने पर प्रतिबंध है। रात में वाहन ले जाना भी मना है। सड़क निर्माण के टेंडर में भी इन शर्तों का उल्लेख है। ठेकेदार कंपनी आरएसके द्वारा इन सभी शर्तों को दरकिनार करने की जानकारी मिलने पर डीएफओ ने जांच होने तक निर्माण रोकने का आदेश जारी किया। आदेश की जानकारी मिलते ही कंपनी ने काम रोकने की बजाय चार गुना तेजी सड़क निर्माण शुरू कर दिया है।

वन क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य में वनों व वन्य प्राणियों की सुरक्षा को देखते हुए किसी प्रकार का कैंप लगाने, रात में वाहनों के आवागमन, उत्खनन, ब्लास्टिंग व आग लगाने पर प्रतिबंध है। सुंदरदेव से गुलाई तक करीब 14 किमी सड़क निर्माण में ठेकेदार द्वारा इन सभी नियमों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है। वनों में जगह-जगह कैंप लगाए हैं, वाहनों की आवाजाही भी निर्बाध रूप से जारी है। सुगाही और धामा गांव के बीच पुलिया निर्माण के लिए ब्लास्टिंग किया गया। इसकी जानकारी भी वन कर्मचारियों को 8 फरवरी को मिली थी। मौके पर जा रही रहे थे कि रास्ते में ट्रैक्टर क्रमांक आरजे-22 आरए-7091 मिला जिसमें ब्लास्टिंग उपकरण लगे हुए थे। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी प्रशिक्षु एसडीओ दिनेश वास्केल को दी। उन्होंने प्रकरण बनाकर वरिष्ठ अफसरों को भेजा। हालांकि ट्रैक्टर बाद में सुपुर्दगी पर छोड़ दिया गया। वास्केल द्वारा भेजे प्रकरण पर डीएफओ कार्यालय से तत्काल काम रोकने के आदेश जारी किए। आदेश के तीन दिन बाद भी ठेकेदार कंपनी और तेजी से काम करने में जुट गई है। विभागीय सूत्रों के अनुसार प्रशिक्षु एसडीओ को किसी वरिष्ठ अफसर ने काम चालू रखने के मौखिक आदेश दिए हैं।

पता कहता हूं क्या हुआ

डी एस कनेश, डीएफओ खंडवा

मुद्दा बना रहा वन विभाग

आरके शर्मा, जीएम प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना खंडवा

खदान स्वीकृति के बगैर ही भवन निर्माण में नदी की रेत का उपयोग


खालवा | सामान्य वन परिक्षेत्र खालवा के वनग्राम सोहागी में विभाग द्वारा भवन निर्माण कराया जा रहा है। इसमें वनक्षेत्र की नदियों की काली रेत का उपयोग हो रहा है। वन नियम के अनुसार विभाग के किसी भी निर्माण कार्य में रायल्टी वाली या स्वीकृत खदान की ही रेत का उपयोग किया जा सकता है। यदि वनक्षेत्र की नदियों की रेत का उपयोग करना हो तो उसके लिए भी विधिवत अनुमति लेना आवश्यक होता है। लेकिन 10 लाख के इस भवन निर्माण में इस नियम का पालन नहीं किया जा रहा है। हाल ही में पदस्थ हुए प्रशिक्षु एसडीओ दिनेश वास्केल ने पिछले दिनों जंगल से रेत ले जा दो ट्रैक्टर-ट्रॉली जब्त किए थे। इन्हें राजसात करने का प्रतिवेदन भी बनाया था। ट्रैक्टर खनिज विभाग के सुपुर्द किए गए हैं। रेत माफिया के दो भंडारण भी सील किए। अब देखना है अपने ही विभाग द्वारा बनाए नियम के उल्लंघन पर क्या कार्रवाई करते हैं। इस संबंध में डिप्टी रेंजर रामप्रसाद उइके ने कहा इस्टीमेट में स्थानीय रेत का उपयोग लिखा है। इसलिए इसका उपयोग कर रहे हैं। प्रशिक्षु एसडीओ दिनेश वास्केल ने कहा अगर ऐसा हो रहा है तो मैं खुद जाकर जानकारी लेता हूं।

इधर, वन विभाग कर रहा नियमों का उल्लंघन

भवन निर्माण में नदी की मिट्टी वाली रेत का उपयोग किया जा रहा है।

सुंदरदेव-गुलाई मार्ग का निर्माण रोक के बावजूद तेजी से चल रहा है।
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