पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

पाचन संबंधी समस्याएं और वजन कम करने में उपयोगी अग्निसार क्रिया

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
सावधानी


हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग, हर्निया के पेशेंट इसका अभ्यास न करें। स्त्रियां मासिक धर्म और गर्भावस्था के दौरान इस आसन को न करें। इस आसन की शुरुआत एक्सपर्ट की निगरानी में करें।

यह क्रिया हमेशा खाली पेट ही करनी चाहिए। अल्सर या पेट में दर्द होने पर इसे न करें। अगर पेट से संबंधित बीमारी हो तो इसका अभ्यास किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही करें।


यह पेट के सभी रोगों के लिए उपयोगी है। इसके नियमित अभ्यास से आप पेट दर्द, कब्ज, एसिडिटी, जलन से छुटकारा पा सकते हैं।

इस क्रिया की करने से शरीर से हानिकारक पदार्थ बाहर निकल जाते हैं और त्वचा स्वस्थ रहती है। यह आपकी खूबूसरती बढ़ाने में मदद करता है।

यह लिवर के साथ-साथ आंत, किडनी एवं पेंक्रियाज को सक्रिय बनाता है और भोजन को पचाते हुए अवशोषण में आपकी मदद करता है।

इसका नियमित रूप से अभ्यास करने पर पेट की चर्बी ही कम नहीं होती, बल्कि आप अपने वजन को भी काफी हद तक कम कर सकते हैं।

इसे करने से शरीर में अशुद्ध रक्त एकत्रित नहीं हो पाता और वेरिकोस वैन्स की समस्या नहीं होती है।

लाभ


इसे करने का तरीका

सिद्धासन या सुखासन की स्थिति में बैठ जाएं। अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर को सीधा रखें। फिर मुंह से गहरी सांस को बाहर निकालते हुए पेट को अंदर की तरफ खींचें। अब जितनी देर हो सके सांस को रोकें और पेट की मांसपेशियों को अंदर बाहर की तरफ हिलाएं-डुलाएं यानी पेट को नाभि वाले स्थान से बार-बार झटके से अंदर और बाहर की ओर 20 से 40 बार करें।

इस समय अपना ध्यान नाभि के पीछे रीढ़ पर रखें। यथाशक्ति करने के बाद सामान्य अवस्था में आ जाएं। सांस सामान्य होने के बाद फिर से यह क्रिया दो से तीन बार दोहराएं। इस क्रिया को आप खड़े होकर या लेटकर अपनी सुविधा के अनुसार किसी भी तरह से कर सकते हैं।

अग्निसार का सम्बन्ध मूलतः नाभि क्षेत्र से है, और इसका सबसे अधिक असर नाभि क्षेत्र पर होता है। यह आपके पाचन तंत्र को साफ एवं स्वस्थ रखते हुए पूरे शरीर को बीमारियों से बचाता है। यह आपके पेट को ठीक रखते हुए पाचन में मदद करता है। साथ ही पाचक रस के स्राव में बड़ी भूमिका निभाता है।

Expert**

निकिता रसेला

योग विशेषज्ञ
खबरें और भी हैं...