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सैकड़ों बाशिंदों से छिन सकती है बिजली-पानी, सफाई की सुविधा**

एक वर्ष पहले
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सहकारिता विभाग के अफसर मनमानी कर रहे हैं। ताजा मामला बिचौली मर्दाना इलाके की कॉसमॉस सिटी का है। इस कॉलोनी की रहवासी सहकारी संस्था मर्यादित का गठन 28 जुलाई 2018 को हुआ था। सोसायटी पर नगर निगम, सुरक्षा एजेंसी, बिजली कंपनी इत्यादि की 9 लाख 40 हजार रुपए की देनदारियां हो गई थीं। आर्थिक मामलों में लापरवाही के चलते इसे जनवरी 2019 को भंग कर रिसीवर बैठा दिया गया। छह महीने रिसीवर दिलीप सिंह चौहान ने कामकाज संभाला लेकिन वे सिर्फ टाइम पास करते रहे। उन्होंने जांच करना तो दूर भंग कमेटी के पदाधिकारियों से दस्तावेज तक नहीं लिए। जून में नई कमेटी बनाकर उसे संस्था की बागडोर सौंपकर रिसीवर ने इतिश्री कर ली। अब सहकारिता अफसर नई कमेटी पर दबाव बना रहे हैं कि संस्था का ऑडिट कराओ वरना इसे भी भंग कर दिया जाएगा। जबकि पदाधिकारियों को संस्था के दस्तावेज उपलब्ध ही नहीं कराए हैं।

रहवासी आशंकित, उनका क्या होगा

कॉसमॉस सिटी में 2BHK और 3BHK के 270 फ्लैट हैं। औसत हर फ्लैट में चार लोग निवास करते हैं। यानी सैकड़ों रहवासियों को अब बिजली, पानी, सफाई और सुरक्षा जैसी सुविधाएं ठप पड़ने की आशंका सता रही है। आरोप है, हटाए गए पदाधिकारी नई कमेटी को पुराना हिसाब-किताब नहीं सौंप रहे हैं। इसके चलते ऑडिट नहीं हो रहा है। यदि कमेटी भंग हो गई तो पुरानी देनदारियों के साथ ही नई उधारी भी जुड़ जाएगी। कुछ माह पहले नगर निगम ने कचरा गाड़ी नहीं भेजने की धमकी दी थी। बिजली कट सकती है और सुरक्षा एजेंसी गार्ड हटा सकती है। पानी के टैंकर आना बंद हो जाएंगे।

मेंटेनेंस का गणित गड़बड़ाया

जून 2019 में जब रिसीवर ने नई कमेटी को प्रभार सौंपा था तब पानी के टैंकर वाले के 8 लाख 4750 रुपए बकाया थे। सिक्युरिटी एजेंसी के 1 लाख 17 हजार 880 रुपए की देनदारी है। इसी तरह पंप सेट, सीसीटीवी मेंटेनेंस, कर्मचारियों का वेतन, कचरा वाहन, बिजली के भी लाखों रुपए चुकाने हैं। कमेटी की उलझन यह है कि एक तरफ कुछ रहवासी मेंटेनेंस की राशि नियमित नहीं दे रहे और दूसरी तरफ ऑडिट नहीं हो रहा है। 2BHK फ्लैट की मासिक मेंटेनेंस राशि 1470 रुपए और 3BHK के 1860 रुपए हैं। जब नई कमेटी मेंटेनेंस राशि जमा करने के लिए दबाव बनाती है तो उसे रहवासियों की ओर से लीगल नोटिस थमा दिया जाता है कि
बिजली-पानी बंद नहीं कर सकते।

सहकारिता विभाग के अफसरों की मनमानी के चलते कॉसमॉस सिटी के सैकड़ों बाशिंदों के समक्ष मूलभूत सुविधाएं छिनने का संकट खड़ा हो गया है। अनियमितता के आरोप में संस्था की समिति भंग कर रिसीवर बैठाया गया लेकिन वे सिर्फ टाइम पास करते रहे।

दस्तावेज नहीं देंगे तो फंसेंगे

कॉसमॉस सिटी रहवासी संस्था की भंग कमेटी के पदाधिकारियों ने मुझे जो रिकॉर्ड सौंपा था वह नई कमेटी को सौंप दिया। मेरे पास कोई दस्तावेज नहीं है। यदि पुरानी कमेटी के पदाधिकारी आर्थिक लेनदेन के दस्तावेज नहीं सौंपेगे तो फंसेंगे। ऑडिटर अपनी रिपोर्ट में लिख देंगे कि पुराने रिकॉर्ड के बिना ऑडिट किया गया है। दोषी पदाधिकारियों को नोटिस जारी कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

दिलीप सिंह चौहान, रिसीवर, सहकारिता विभाग, इंदौर

मामले का समाधान करेंगे

संस्था के पदाधिकारी ऑडिट नहीं करा रहे हैं। अध्यक्ष बोल रहे हैं कि उन्हें कैशबुक, वाउचर इत्यादि महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। रिसीवर ने बताया कि उन्होेंने नए और पुराने पदाधिकारियों को साथ बैठाकर आवश्यक कागजात उपलब्ध कराने की सहमति करा दी थी। यह सही है कि यदि नई कमेटी को पुराना रिकॉर्ड नहीं मिलेगा तो ऑडिट नहीं हो पाएगा। मामले का समाधान करेंगे।

राजेश मालवीय, ऑडिटर, सहकारिता विभाग, इंदौर

ऑडिटर फोन पर धमका रहे

सहकारिता विभाग के ऑडिटर राजेश मालवीय फोन पर धमका रहे हैं कि मूल दस्तावेज लेकर उनके दफ्तर पहुंचें और 2018-19 का ऑडिट कराएं। ऐसा नहीं किया तो कमेटी भंग कर दी जाएगी। रिसीवर ने दस्तावेज नहीं सौंपे हैं। करीब साढ़े नौ लाख की अनियमितता की ऑडिट रिपोर्ट पुरानी कमेटी को ही सौंपना थी। हम नोडल अधिकारी से गुहार लगाएंगे। मनोज बंसल, राजेश वैष्णव और
आशीष सक्सेना, कॉसमॉस सिटी रहवासी संस्था

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