आभूषण शुद्ध‌ता की गारंटी से बिकने पर सराफा बाजार पर विश्वास बढ़ने की आशा

News - 14, 18 एवं 22 कैरेट पर हॉल मार्किंग अनिवार्य करने का सराफा व्यापारियों ने स्वागत किया है। इमानदारी से लगाए गए हॉल...

Dec 04, 2019, 08:50 AM IST
Indore News - mp news expectation to increase confidence on bullion market if jewelery is sold with guarantee of purity
14, 18 एवं 22 कैरेट पर हॉल मार्किंग अनिवार्य करने का सराफा व्यापारियों ने स्वागत किया है। इमानदारी से लगाए गए हॉल मार्किंग के आभूषणों पर केवल बनवाई चार्ज का फर्क पड़ेगा। यदि आभूषण महंगे लगेंगे तो इसका सीधा मतलब होगा बिना हॉल मार्किंग के आभूषणों में मिलावट है। हॉल मार्किंग वालों को जांच की पूर्ण व्यवस्था करना होगा, जिससे छेोटे-छोटे गांव में सोने की बिक्री बड़ी मात्रा में होने लगी है, उन गांव के ग्राहक ठगे न जावे। बड़े शो रूम में डिजाइन अधिक मिलेगी। मिलावट के मामले में सराफा बाजार सदियों से बदनाम रहा है। सोने में ग्रामीण क्षेत्रों की मांग घटी है। सस्ता होने के बाद ही मांग बढ़ना संभव है। वर्तमान ग्रामीण अर्थ व्यवस्था ठीक नहीं होने से भी मांग में गिरावट आई है। दक्षिण भारत में मांग निकलने की आशा रखी जाती है।

एक वर्ष बाद अनिवार्य

अंतत: केंद्र सरकार ने वर्ष 2021 से आभूषणों पर हॉल मार्किंग अनिवार्य कर दिया है। अब कुछ चुनिंदा कैरेट के आभूषण हॉल मार्किंग से ही बिक सकेंगे। इसका कार्यान्वयन चरणबद्ध तरीके से शुरू होगा। यह बात सत्य है कि हॉल मार्किंग के आभूषणों में हेराफेरी की गुंजाइश कम होगी, बशर्ते दुकानदार से पक्का बिल लेना पसंद करेंगे। खाद्य‌ एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री ने बताया कि सोने के आभूषण एवं कलाकृतियां की हॉल मार्किंग अनिवार्य की जा रही है। 15 जनवरी 2020 को अधिसूचना जारी होगी और 15 जनवरी 2021 से लागू हो जावेगी। अभी तक सराफा व्यापारी यह मानकर चल रहे हैं कि पुराने आभूषणों की बिक्री के लिए 6 माह का समय दिया जावेगा, किंतु पूरे एक वर्ष का समय दिया गया है। यह अवधि इतनी लंबी है कि किसी भी आभूषण विक्रेताओं को शिकायत करने का अवसर नहीं मिलेगा। इसके अलावा इस अवधि में निजी उद्य‌मियों द्वारा नए जांच केंद्र एवं हॉल मार्किंग केंद्र की स्थापना ऐसे स्थान पर कर सकेंगे जहां आभूषण एवं कलाकृतियां की मांग हो।

पंजीकरण कराना होगा

इस एक वर्ष की अवधि में जौहरियों का पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर ली जावेगी और खेरची विक्रेता गैर-हॉल मार्किंग, वाला मौजूदा स्टॉक बेचकर समाप्त कर सकेंगे। इस अवधि के बाद ऐसे स्टॉक को गलाना होगा। उल्लेखनीय है कि देश में 3 लाख से अधिक आभूषण विक्रेता है एवं करीब 26 हजार आभूषण विक्रेताओं ने पंजीकरण करवा रखा है। अभी तक सराफा बाजार मिलावट की वजह से बदनाम है। वर्षों से टांके एवं अन्य मिलावट करके ग्राहकों से अधिक धन राशि ली जाती रही है। कभी-कभार जब बाजार में बेचने की स्थिति बनती है उस समय आभूषणों की क्या स्थिति है वह सामने आती है। पिछले वर्षों में जलगांव आभूषण खरीदने इसलिए भी जाते थे कि वहां विश्वास के आभूषण मिलते थे। यह बात अलग है कि प्रत्येक व्यक्ति बाहर जाकर खरीदी नहीं कर सकते हैं या ये फिर भी जिनकी क्षमता है वे तो जाते थे। उन वर्षों में आज जितने बड़े-बड़े शोरूम भी नहीं थे। सराफा बाजार में नकद का कारोबार होने से कच्चे पाने पर लिखकर दिया जाता है, उसको मान्यता नहीं है।

स्वर्ण उद्य‌ोग की छबि बदलेगी

31 अक्टूबर 2019 तक देश भर में 234 जिलों में 877 जांच परख एवं हॉल मार्किंग केंद्र है तथा अभी तक 26 हजार ने करीब जौहरी बीआईएस पंजीकरण प्राप्त कर चुके हैं। विश्व स्वर्ण परिषद के प्रबंध निदेशक के अनुसार इस स्वर्ण उद्य‌ोग पर भरोसा लौटेगा और भारतीय स्वर्ण उद्य‌ोग की छबि में बदलाव आएगा तथा जांच परख और शुद्धता के प्रमाणीकरण में और ज्यादा रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। जानकारों का मानना है कि जांच परख केंद्रों की वर्तमान में जो संख्या है, वह काफी कम है। ऐसे छोटे-छोटे जिलों जहां आभूषणों की बिक्री अधिक होती है, वहां जांच-परख केंद्रों की स्थापना करना होगी। कोई भी जौहरी जांच-परख के लिए शहर से बाहर जोखिम लेकर जाना पसंद नहीं करेंगे और यह संभव भी नहीं है। अत: सरकार को अभी से सर्वे कराकर जांच-परख केंद्र स्थापित करने की योजना तैयार कर लेना चाहिए अन्यथा यह योजना फेल होने में देर नहीं लगेगी।

आयात शुल्क में वृद्धि

नेपाल सरकार ने 50 ग्राम तक वजन वाली सोने की छड़ों के आयात पर 10 ग्राम पर 7500 रुपए (नेपाली मुद्रा) का सीमा शुल्क लगाने जा रही है, पूर्व में 6200 रुपए लगता था। इसी तरह 50 से 100 ग्राम वाली छड़ों पर प्रति दस ग्राम 8500 रुपए और 100 ग्राम से अधिक छड़ों पर 10,000 रुपए सीमा शुल्क वसूला जावेगा जो पहले प्रति 10 ग्राम पर 8500 रुपए था। नेपाल में सोने का आयात शीर्ष संगठन के माध्यम से होता है। इसके अलावा आयात निर्धारित कोटे के आधार पर होता है। प्रति दिन 20 किलो ग्राम सोने के आयात की अनुमति है। नेपाल के केंद्रीय बैंक-नेपाल राष्ट्र बैंक वाणिज्यिक बैंकों को 20 किलो ग्राम प्रतिदिन आयात करने की अनुमति दे रखी है। यदि बाजार में मांग अधिक है तो अधिकतम 5 किलो की वृद्धि की जा सकती है। उल्लेखनीय है कि स्थानीय मांग को पूरा करने के लिए जौहरियों को 30 से 40 किलो ग्राम सोने की जरूरत पड़ती है। नेपाल के कोटे से कुछ मात्रा में सोना तस्करी रूप से भारत आ रहा है। इस वजह से नेपाल में कमी महसूस होती है।

चीन से तस्करी आयात

नेपाल के अधिकारी चालू खाते पर नकारात्मक प्रभाव को लेकर चिंतित थे। नेपाल में चीन से पहले ही तस्कर आयात हो रहा है। तस्कर आयात का कुछ भाग भारत को भेजा जा रहा था। भारत में जुलाई में बजट में सोने पर आयात शुल्क 12.5 प्रतिशत कर देने से तस्करी आयात बढ़ गया था। पिछले वर्ष 100 टन से अधिक सोना तस्कर रूप में भारतीय बाजारों में आया है।

सराफा बाजार में गरीब वर्ग ठगने से बचेंगे

बड़े जौहरियों का मानना है कि विशेषकर गरीब वर्ग को लाभ होगा जो खरीदे आभूषण की शुद्धता की जांच नहीं करवा पाते हैं। इससे ग्राहकों का विश्वास मजबूत होगा। कारोबार संगठित हो जावेगा। वर्तमान में बड़े-बड़े शो रूम्स प्रतिस्पर्धा चलती रहती है, वह भी शायद समाप्त होती नजर आएगी और कारोबार अधिक संगठित होगा। जौहरियों का मत है कि पूरे देश में ऐसी जागरूकता पैदा करना चाहिए, जिससे ग्राहक हॉल मार्किंग वाले आभूषणों की मांग करें। आभूषण विक्रेताओं को इस बात का ध्यान देना होगा कि शुद्धता के नाम पर इतना महंगा न कर दें जिससे हॉल मार्किंग बदनाम हो जावे। ऐसे व्यापारी जो हॉल मार्किंग का कारोबार नहीं करेंगे, आभूषण महंगे होने की हवा उड़ाकर इस अभियान को ठेंस पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ेंगे। हालांकि मुंबई के कुछ जौहरी कह रहे हैं कि हॉल मार्किंग वाले आभूषण महंगे नहीं होंगे, यदि ऐसा होता है तब ग्राहक हॉल मार्किंग की ओर आकर्षित हो सकेंगे।

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