फूलों से महकेगा फाग.. आज रंगों के संग होली मिलन
सुबह 11 बजे से शाम तक चलेंगे होली मिलन के समारोह
शहर में शनिवार को रंगपंचमी मनाई जाएगी। एक बार फिर हुरियारों की टोलियां सड़कों पर गुलाल उड़ाते हुए निकलेंगी। हुरियारों के चल समारोह पुराना शहर के सुभाष चौक, शैतान सिंह मार्केट शाहपुरा, कोलार, बैरागढ़ व भेल के विभिन्न क्षेत्रों से निकलेंगे। कई स्थानों पर होली मिलन कार्यक्रम होंगे। इनमें फागोत्सव होगा, जिसमें फाग गीत होंगे और लोग गुलाल व फूलों से होली खेलेंगे। विभिन्न सामाजिक संगठनों ने लोगों से कोरोना वायरस के खतरे को ध्यान में रखते हुए सावधानी बरतने की अपील की है।
पुराना शहर - हिंदू उत्सव समिति के तत्वावधान मेंे सुभाष चौक से सुबह 11 बजे रंगपंचमी चल समारोह शुरू होगा। अध्यक्ष कैलाश बेगवनी ने बताया कि इसमें कई झांकिया होंगी, जो इतवारा, मंगलवारा, घोड़ा नक्कास होते हुए हनुमानगंज पहुंच कर समाप्त होगा।
सुभाष चौक से शुरू हुअा था रंगपंचमी चल समारोह, एक जगह हाेता था होलिका दहन
नवाबी रियासत के दौर में होली का चल समारोह प्रारंभ हो गया था। रंगपंचमी की शुरुअात इसके दो तीन साल बाद सुभाष चौक से हुई थी, लेकिन तब कुछ युवा ढोल-बाजों के साथ ही इसे निकालते थे। पीपल चौक में एक ही जगह सार्वजनिक रूप से होलिका दहन होता था। तब लोग अपने घरों के अांगन में ही होलिका दहन कर पूजा करते थे। अाजादी के बाद सड़कों पर होलिका दहन का सिलसिला शुरू हुअा। हिंदू उत्सव समिति के पूर्व अध्यक्ष चतुरनारायण शर्मा ने वर्ष 1973 से बडे रूप में होली व रंगपंचमी चल समारोह निकालने की शुरुअात कर दी। पं. एम मेहता ने बताया कि होलिका दहन की चौक से शुरुअात पं. उद्ववदास मेहता भाई जी ने कराई थी। हिंदू उत्सव समिति के पूर्व अध्यक्ष एडवोकेट संजय गुप्ता ने पहली बार सार्वजनिक रूप से होली मिलन समारोह नगर निगम के सहयोग से यादगारे शाहजहांनी पार्क में रंगपंचमी की शाम 31 मार्च 1994 को अायोजित किया था। तब तांगे में लाउड स्पीकर लगाकर सारे शहर को अाने का एेलान कराया गया था। सभी का इत्र छिड़ककर व गुलाल लगाकर स्वागत किया गया था।
नवाब के निवास पर होता था होली मिलन चंदन के पावडर से खेली जाती थी होली
भोपाल में रंग पर्व होली से रंगपंचमी तक मनाने की परंपरा नवाबी दौर में ही शुरू हो गई थी। यानी करीब 150 साल पहले। वहीं होली मिलन की शुरुअात शाहजहां बेगम के जमाने में हुई थी। बेगम शाहजहांनाबाद स्थित ताजमहल में लोगों को बुलाकर होली का उत्सव मनाती थीं। इसके बाद अंतिम नवाब हमीदुल्ला खां ने इस परंपरा को कायम रखा और वे अहमदाबाद पैलेस में होली मिलन कार्यक्रम करते रहे, जिसमें शहर के विभिन्न वर्गों के लोग व उनके यहां कार्यरत औहदेदार शामिल होते थे। सही मायनों में शहर में होली चल समारोह की शुरुअात 1950 में और इसके दो साल बाद 1952 में रंगपंचमी का चल समारोह निकाला जाने लगा। मैं कभी कभी भोपाल नवाब हमीदुल्ला खां के यहां होली मिलन में तो नहीं गया, लेकिन अपने बुजुर्गों से सुना है कि नवाब अपने निवास पर होली मिलन के दौरान लोगों के होली खेलने का इंतजाम करते थे, जिसमें चंदन का पाउडर और गुलाब के अरक से बने रंग से होली खेली जाती थी, जो लोग होली नहीं खेलते थे, उन्हें गुलाल लगाया जाता था। बाद में वे मिठाई और तोहफे भेंट करते थे। यह अायोजन नवाब के शासनकाल के प्रमुख रहे राजा अवधनारायण बिसारिया की देखरेख में होता था।
यहां होंगे होली मिलन
अग्रवाल समाज : अग्रवाल स्नेह सम्मेलन समिति द्वारा शनिवार को मानस उद्यान गुफा मंदिर में शाम साढ़े पांच बजे से होली मिलन।
भृगु समाज : शिवाजी नगर स्थित भगवान परशुराम मंदिर में समाज का होली मिलन शनिवार को सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक होगा।
राजपूत समाज : मप्र राजपूत समाज का होली मिलन शनिवार को चार इमली स्थित महाराणा प्रताप भवन में सुबह 10.30 बजे से होगा।
1952 में निकला था शहर में रंगपंचमी का पहला चल समारोह
नया भोपाल- नया भोपाल त्योहार समिति द्वारा देवी अहिल्याबाई होल्कर चौराहा, शाहपुरा शैतान सिंह मार्केट से सुबह 10.30 बजे चल समारोह प्रारंभ होगा।
कंटेंट : राजेश चंचल
सावधानी बरतने की अपील
गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल, ब्राह्मण समाज के राकेश चतुर्वेदी, कुशवाह समाज के नारायण सिंह कुशवाह, स्वर्णकार समाज के राजेश वर्मा सोनी व कायस्थ समाज के सुनील श्रीवास्तव ने अपील की है कि वे पर्व मनाएं, पर कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए सतर्कता भी बरतें।
ओएन श्रीवास्तव, पूर्व राज्यपाल
देवीसरन, पूर्व नगर निगम अायुक्त