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किसान बोले- जहां पैदा हुए, वहीं घर बनाने की नहीं मिलती मंजूरी
मास्टर प्लान-2031 के जारी हुए ड्राफ्ट में लालघाटी क्षेत्र के बड़े तालाब से सटी हलालपुर की ओर जाने वाली सड़क का लैंडयूज बदल दिया गया, इसे अब रेसीडेंशियल क्षेत्र दिखाया गया है। यानी अब यहां मकान निर्माण की अनुमति मिल सकेगी, यहां पर कैचमेंट का दायरा 50 मीटर रखा गया। जबकि सालों से नीलबड़-रातीबड़ कृषि क्षेत्र में रह रहे लोगों को कोई राहत नहीं दी गई। यहां पर अभी-भी कैचमेंट का दायरा 250 मीटर ही रखा गया है। इसके चलते लोगों को मकान बनाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। इसके चलते 22 गांव के करीब 50 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। यह आपत्ति बुधवार को नीलबड़ और रातीबड़ क्षेत्र में रहने वाले किसानों ने कलेक्टर तरुण पिथोड़े के सामने दर्ज कराई।
भोपाल मास्टर प्लान-2031
समस्या के समाधान
का मिला आश्वासन
किसानों ने कलेक्टर से कहा कि बड़े तालाब के किनारे बसे गांवों में उनकी जमीनें हैं, यहां की जमीनों को पेयजल आपूर्ति के लिए शासन ने अधिग्रहण कर लिया है। लेकिन यहां निर्माण की अनुमति नहीं दी जा रही है। कलेक्टर ने आश्वासन दिया है कि जल्द ही इस समस्या का समाधान कराएंगे।
रेसीडेंशियल क्षेत्र घोषित की जाए यहां की आबादी
किसान लियाकत खान का कहना है कि कैचमेंट एरिया के नाम पर 22 गांवों की जमीन पर निर्माण पर लगी रोक को हटाने की मांग की है। उनकी मांग है कि जिन 22 गांव में कैचमेंट के नाम पर निर्माण पर रोक लगा रखी है, उसे हटाकर रेसीडेंशियल क्षेत्र घोषित किया जाए।
शहरी क्ष्रेत्र में 50 मी. व ग्रामीण इलाके में 250 मी. का है दायरा