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पहला अवॉर्ड ‘सफाई’ के नाम**

एक वर्ष पहले
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{आईफा के बदले... पेज 1 से जारी**

सं चालक कहते हैं, हमने सफाई में हैट्रिक लगाई है। अब चौके की बारी है। हमें गर्व है कि सभी ने अपनी जागरूकता का परिचय दिया। यह बात अलग है कि अंदर के लोग बिलबिलाते रहे। कई इलाकों में कचरा गाड़ी समय पर नहीं पहुंची। सबकुछ बाहर ही बाहर होता रहा। फिर भी हमने गढ़ जीत लिया। कोई एक व्यक्ति इस तमगे का जिम्मेदार नहीं है। सभी की मेहनत रंग लाई। नगर निगम का बजट सफाई के नाम पर कितना साफ हुआ यह शोध का विषय है, लेकिन सभी बधाई के पात्र हैं। इसलिए पहला अवॉर्ड ‘सफाई’ के नाम। जो भी जिम्मेदार हो आकर यह अवॉर्ड ले जाए। समारोह में खामोशी छाई हुई थी। कोई आगे बढ़ने को तैयार नहीं था। चार लोग उठे, बोले, हम जनता जनार्दन हैं। यह अवॉर्ड हमें मिलना चाहिए। कुछ सफाईकर्मी खड़े हुए। हमारी वजह से तीन तमगे मिले हैं। हम हकदार हैं। अधिकारियों और राजनेता आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे थे। सफाईकर्मियों की दलील भारी पड़ रही थी। संचालक ने अतिथियों से संयुक्त अवॉर्ड दिलवाया।

मनमानी का
कलाकारी अवॉर्ड


संचालक ने घोषणा की, आइए बढ़ते हैं दूसरे अवॉर्ड की ओर...। जैसा कि आप सभी जानते हैं AICTSL ने अपनी मनमानी का उदाहरण देते हुए सिटी बसों का किराया बढ़ा दिया। जब लोगों ने पूछा तो जवाब मिला कि स्लैब में परिवर्तन किया गया है, किराया नहीं बढ़ा। लोगों ने कहा, कैसी बात करते हैं जनाब। विजय नगर से अरबिंदो तक 10 रुपए लगते थे। आपने डबल कर दिए। अरबिंदो से विजय नगर तक के 10 रुपए लगते थे। आपने 20 रुपए कर दिए। और कहते हैं किराया नहीं बढ़ा। आप यह तो बताइए किराया कम कहां का हुआ। यह सिर्फ कागजी कलाकारी है। संचालक ने कहा, इस वर्ष होली का यह मनमाना अवॉर्ड AICTSL को जाता है। आइए, अवॉर्ड लीजिए। अवॉर्ड लेने कोई नहीं आया। संचालक ने कहा, कोई बात नहीं हमारे चंगु-मंगू आपका अवॉर्ड कोरियर से भिजवा देंगे।

जनप्रतिनिधियों को इस साल का
मौनी अवॉर्ड


संचालक ने कहा, हमारे जनप्रतिनिधियों ने जनहित के मुद्दों पर चुप्पी साध रखी थी। वे चाहते तो शहर की बहुत-सी समस्याओं का समाधान हो सकता था। उन्होंने कुछ नहीं किया। जब AICTSL ने किराया बढ़ाया तब भी वे जनता के लिए, जनता के नहीं हुए। यशवंत सागर का अवैध मछली व्यापार यहीं पर सब्जियों की अवैध खेती, अवैध खनन, नाले के पानी से सब्जी उगाना, अपने फायदे के लिए बगीचों को मैरिज गार्डन बना देना सहित ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर हमारे जनप्रतिनिधि मौनी बाबा बने रहे। लिहाजा होली के इस अवसर पर चंगु-मंगू मित्रमंडल की ओर से अपने जनप्रतिनिधियों को मौनी अवॉर्ड।

आरटीओ को रंग भरा अनदेखा अवॉर्ड

संचालक ने माइक पर घोषणा की, जिस अवॉर्ड का आपको बेसब्री से इंतजार था उसकी घड़ी निकट आ गई है। इस अवॉर्ड के लिए हमने जनता से SMS मंगवाए थे। अवॉर्ड के लिए पुलिस और आरटीओ में कड़ी प्रतिस्पर्धा थी। अंतत: अनदेखी के मामले में आरटीओ ने बाजी मार ली। बसों की रफ्तार पर नकेल नहीं कसी गई। नतीजतन, कई हादसे हुए और हो रहे हैं। बसों के प्रेशर हाॅर्न लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। जब आचार संहिता लगी थी तब प्रेशर हाॅर्न उतार दिए गए थे। संहिता खत्म होते ही व्यवस्था पुराने ढर्रे पर आ गई। कुछ बसें तो स्पीड के मामले में इतनी बदनाम हो गई हैं कि उन्हें देखते ही अन्य वाहन चालक सड़क की पटरी पर चले जाते हैं। उससे दूर हो जाते हैं। अवैध बसों के संचालन का जिक्र करना यहां मुनासिब नहीं है। पुलिस थानों में बैठने और पीने के पानी की व्यवस्था हो गई। आरटीओ में ऐसा कुछ नहीं हुआ। इसलिए पुलिस आरटीओ से पिछड़ गई। कई मामलों में यह विभाग पिछड़ गया। फिर भी इस बार का अनदेखी के लिए दिया जा रहा है अनदेखा अवॉर्ड आरटीओ को।

कोना-कोना अवॉर्ड

संचालक ने कहा, इंदौर की यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए बहुतेरे प्रयास किए गए। सभी ने इसमें योगदान देने की कोशिश की। प्रयास यही है कि जिस तरह सफाई में नंबर वन रहे, उसी तरह ट्रैफिक में भी हम अव्वल आएं। पुलिस का ढर्रा नहीं बदला। जनता जनार्दन का कहना था कि पुलिस को अवॉर्ड मिलना चाहिए। लिहाजा उन किरदारों को जो चौराहे पर खड़े होने के बजाए इधर-उधर कोने में बतियाते रहते हैं जिनके सामने वाहन गुत्थम-गुत्था होते हैं। उन्हें यह अवॉर्ड दिया जा रहा है।

नर्मदा प्रोजेक्ट की फूटी लाइन को
टूटा-फूटा अवॉर्ड


मंच संचालक ने पहले मां नर्मदा को नमन किया। किसी कवि की चार पंक्तियां सुनाई फिर कहा, यह हमारे शहर का सौभाग्य है कि यहां मां नर्मदा का आगमन हुआ। मां नर्मदा की पवित्रता को कलुषित करने वालों को भला होली के अवसर पर कैसे बख्शा जा सकता है। बार-बार नर्मदा पाइप लाइन का फूटना यह दर्शाता है कि काम कैसे हो रहा है। एक बार में ही काम ढंग का हो गया होता तो दोबारा करने की नौबत ही नहीं आती। जनता जनार्दन की फरमाइश पर होली के इस रंगारंग अवसर पर नर्मदा प्रोजेक्ट से जुड़े उन लापरवाह लोगों को आमंत्रित किया जाता है जिनकी वजह से गंदा पानी लोगों के घर पहुंच रहा है। फूटी लाइन का यह अवॉर्ड उन्हीं लोगों को समर्पित है। आइए...। कोई भी व्यक्ति अवॉर्ड लेने नहीं आया। तब दो-चार लोग उठे और बोले, लाइए यह अवॉर्ड हमें दे दीजिए, जब पाइप लाइन फूटेगी, तब यह अवॉर्ड उन्हें सौंप देंगे।

शिक्षा विभाग में कामचलाऊ
प्रभारी अवॉर्ड


मंच संचालक आगे कुछ बोलते इसी बीच दर्शकों ने शोर मचाना शुरू कर दिया। संचालक ने कहा, आप इस तरह शोर मचाएंगे तो हमें पता नहीं चलेगा कि आप चाहते क्या हैं? एक व्यक्ति उठा और बोला, सब लोगों का कहना है, होली के अवसर पर आपने शिक्षा विभाग को कैसे छोड़ दिया। कामचलाऊ व्यवस्था के कारण अव्यवस्था का आलम है और आप अन्य विभागों को अवॉर्ड दिए जा रहे हैं। उसने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, एक व्यक्ति स्कूल जाता नहीं और उसे हर माह वेतन मिलता है। एक व्यक्ति ऐसा भी है, जिसके घर हाजिरी रजिस्टर पहुंच जाता है। बिना देखे-भाले स्कूल को मान्यता दे दी जाती है। खेल मैदान के नाम पर छत पर प्रतियोगिता होती है और बच्चा गिर जाता है। सीधे चलने वालों को उल्टा चलाया जा रहा था। कोई देखने-सुनने वाला नहीं है। ऐसे में समिति का फर्ज बनता है कि कामचलाऊ जिम्मेदारों को अवॉर्ड देना चाहिए। मंच संचालक ने चंगु-मंगू की ओर इशारा किया। दोनों ने कहा, इस विभाग के लिए अलग से ट्रॉफी बनाई गई है। संचालक ने एक अधिकारी का नाम पुकारा वे अवॉर्ड लेने के लिए आगे बढ़े, इसी बीच एक जागरुक अभिभावक खड़ा हुआ और बोला, रुकिए जनाब, यह वो नहीं हंै जिनका नाम लिया गया है। अवॉर्ड लेने वाला बोला, आप सही फरमा रहे हैं। मैं वो नहीं हूं। मैं कामचलाऊ व्यवस्था का प्रभारी हूं।

...और समारोह में फैल
गई अफरा-तफरी


चंगु-मंगू ने जायका अवॉर्ड का अच्छा खासा प्रचार किया था। एक-एक दफ्तर में जाकर सीढ़ियां नापी थीं। कई दिनों तक यह देखा था कि इन दफ्तरों में व्यवस्था कैसी चल रही है। बहुत मन था कि सभी को अवॉर्ड दें। चंगु-मंगू के पास कोई ऐसा दयालु नहीं था जो ट्रॉफी बनाने के लिए पैसा दे दे या पूरा कार्यक्रम प्रायोजित कर दे। नतीजतन, उन्होंने अपने बलबूते पर कार्यक्रम रख लिया। पीडब्ल्यूडी वाले भी वहां मौजूद थे। उन्होंने अवॉर्ड के लिए अपना हक जताया। स्वास्थ्य विभाग वाले भी अपने कई कर्मचारियों को लेकर गए थे। एमवाय से भी कुछ लोग यह उम्मीद लेकर आए थे कि उन्हें होली के अवसर पर लापरवाही बरतने वाला कोई अवॉर्ड मिलेगा लेेकिन उन्हें नहीं मिला। वन विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, पीआईयू और खासतौर पर पुलिस विभाग को भी चंगु-मंगू ने बख्श दिया था। शोर-शराबे के बीच इस युगल जोड़ी ने कहा, पूरा शहर आपके कार्यकलापों से अच्छी तरह वाकिफ है। जब तक आपके मामले बड़े अधिकारियों या सरकार तक नहीं पहुंचते तब तक आप टस से मस नहीं होते। इस होली पर आपको सिर्फ हिदायत का गुलाल दिया जा रहा है। उम्मीद की जा रही है कि ढर्रा बदल लें। वर्ना आपको भी इसी तरह सम्मािनत किया जाएगा।

(जायका अवॉर्ड आपको कैसा लगा हमें इस नं. 8889644411 पर फीडबैक दें)

indore | tuesday 10 march | 2020

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