पहले ज्वाइनिंग के लिए तरसाया, अब वेतन के लाले

News - इंदौर

Jan 16, 2020, 07:56 AM IST
Indore News - mp news first yearned for joining now salaries
इंदौर
प्रदेशभर की जिला पंचायतों, संभाग आयुक्त कार्यालयों और पंचायती राज विभाग संचालनालय में कार्यरत कम्प्यूटर ऑपरेटरों ने डीबी स्टार को बताया कि वे तीन महीने से वेतन की गुहार लगा रहे हैं। जिलों से लेकर भोपाल तक के हर अधिकारी से कई बार मिल चुके हैं। जिम्मेदार अधिकारी हर बार कोई न कोई बहाना बनाकर उन्हें टाल देते हैं। अब कह रहे हैं कि ऑपरेटरों को वेतन देने के लिए कोई बजट ही नहीं है। कर्मचारियों का कहना है कि जब अन्य विभाग में नियुक्त कर्मचारियों को नियमित वेतन मिल रहा है तो पंचायती राज के कर्मचारियों के लिए बजट क्यों नहीं? ज्वाइनिंग देने से पहले अफसरों ने वेतन के लिए बजट मंजूर क्यों नहीं कराया?

कब तक उधार लेकर काम चालएं

कर्मचारियों ने बताया कि वे अपने घरों से सैकड़ों किमी दूर जिला स्तर के शहरों में नौकरी कर रहे हैं। कई कर्मचारियों की पारिवारिक आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। पहले महीने तो घर वालों से मदद ले ली लेकिन अब मकान किराया से लेकर राशन और दूध-सब्जी के लिए भी रुपए नहीं हैं। नए शहर में होने से किसी से ज्यादा जान-पहचान भी नहीं है, इसलिए अब उन्हें उधारी में कोई सामान देने को राजी नहीं है। मकान मालिक लगातार किराए के लिए तगादा लगा रहे हैं। वेतन कब मिलेगा इसे लेकर भी उन्हें कोई ठोस आश्वासन नहीं दिया जा रहा है। परिजन अलग परेशान हैं। उन्हें मदद करना तो दूर हर महीने घर आने-जाने का किराया भी चुकाना पड़ रहा है। यदि एक-दो महीने और वेतन नहीं मिला तो पार्ट टाइम प्राइवेट जॉब करने को मजबूर हो जाएंगे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री से गुहार लगाई है कि उन्हें वेतन दिलाया जाए।

अब तो कोई आचार संहिता भी नहीं

लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के चलते परीक्षा के 6 महीने बाद 12 दिसंबर 2018 को मेरिट लिस्ट जारी की गई थी। नियम अनुसार लिस्ट जारी होने के तीन महीने में ज्वाइनिंग मिल जाना चाहिए लेकिन पंचायती राज विभाग के अफसरों ने 10 माह बाद सितंबर-अक्टूबर 2019 को नियुक्ति दी। तब चुनाव आयोग से अनुमति मिलने में देरी का बहाना बनाया गया था। अब न तो आचार संहिता है और न ही आयोग से किसी तरह की मंजूरी लेना है फिर भी पगार अटका रखी है। सवाल यह है कि क्या शासन ने अकेले पंचायती राज विभाग के तहत नियुक्त ऑपरेटरों का बजट ही विभाग को नहीं दिया?

अब तो हमारे सामने भूखे मरने की नौबत आ गई है

 पंचायती राज विभाग के अधिकारियों ने पहले हमें नियुक्तिके लिए चक्कर कटवाए और अब वेतन के लिए तरसा रहे हैं। वेतन के लिए हम संचालनालय में कई बार अधिकारियों से मिल चुके हैं। कहा जाता है कि बजट ही नहीं है तो वेतन कहां से दें। चार महीने से पगार नहीं मिलने के कारण अब भूखों मरने की नौबत आ गई है।

बीएल वर्मा, अभिषेक गुहा, रंजीत अखंड, सुनील खाती (पीड़ित कर्मचारी)

तकनीकी परेशानी दूर कर कर्मचारियों को जल्द देंगे वेतन

 पंचायती राज विभाग के तहत नियुक्त कम्प्यूटर ऑपरेटरों के वेतन के लिए सप्लीमेंट्री बजट में प्रस्ताव कर चुके हैं। फिलहाल वित्त ‌विभाग से मंजूर नहीं हो पाया है। दरअसल, फाइनेंस में कुछ टेक्निकल इश्यु आ रहा है, जिसे जल्द ही हल कर लेंगे। कर्मचारियों को नियुक्ति दी है तो वेतन भी देंगे। उन्हें वेतन तो मिलना ही है, उसे रोका नहीं जा सकता। उम्मीद है, जल्द ही बजट आ जाएगा।

संदीप यादव, आयुक्त, पंचायती राज विभाग, मप्र

X
Indore News - mp news first yearned for joining now salaries
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना