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किसी डिज़ीज़ को क्योर करने के लिए जो काम एक बड़ा प्रोटीन करता है, वही काम मिल कर छोटे-छोटे प्रोटीन भी कर सकते हैं

एक वर्ष पहले
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स्टूडेंट्स को बताई केस स्टडीज़, नैनो स्केल मटेरियल की दी जानकारी

सिटी रिपोर्टर . इंदौर

हमारी बॉडी में प्रोटीन मॉलिक्यूल्स अलग-अलग तरीकों से काम करते हैं। रिसर्चर्स अकसर ड्रग बनाने के लिए प्रोटीन को टारगेट करते हैं जिससे बॉडी एक्टिविटी हो और क्योर हो सके। ड्रग डिज़ाइनिंग के लिए एक्सपेरिमेंटट्स, बायोइन्फोमेटिक्स, डेटा साइंस की इनपुट इस्तेमाल कर सकते हैं या कम्प्यूटेशन कर सकते हैं। जब ये सारी टेक्निक्स एक साथ कम्बाइन हाेते हैं ताे रिजल्ट्स बेहतर मिलते हैं। यह बात डाॅ. वेणुका गाेयल ने डीएवीवी के स्कूल ऑफ केमेस्ट्री में हुए सेमिनार में कही। प्रोटीन मॉलिक्यूल्स की स्टडी की जानकारी देते हुए उन्होंने मल्टी डूमेन प्रोटीन और मल्टी प्रोटीन कॉम्प्लेक्स के बारे में बताया कि किसी डिज़ीज़ को क्योर करने के लिए कभी-कभी जो काम एक बड़ा प्रोटीन करता है, वही काम छोटे-छोटे प्रोटीन मिलकर भी कर सकते हैं।

न्यू फेसेट्स ऑफ रिसर्च इन केमिकल साइंस विषय पर हुए इस सेमिनार के प्रथम सत्र में गुजरात विद्यापीठ की कुलपति प्रो. अनामिका शाह ने रोल ऑफ कोलैबोरेटिव एफर्ट इन ड्रग डिस्कवरी इन इंडिया पर बात करते हुए कुछ केस स्टडीज भी बताई। प्रो. अनामिका ने ड्रग डिस्कवरी फील्ड में एजुकेशनल, इंडस्ट्रियल और विभिन्न रिसर्च इंस्टिट्यूशन के प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि दवाओं की रिसर्च में ये सभी संस्थाएं समन्वयित प्रयास कर रही हैं और आने वाले समय में भी करेंगी।

दूसरे सत्र में हैदराबाद विश्वविद्यालय तेलंगाना के केमिस्ट्री डिपार्टमेंट के प्रो. कालीदास सेन ने \\\"कॉन्फाइंड एटम्स एंड मॉलिक्यूल्स के बारे में बात की। साथ ही नैनो स्केल मटेरियल के बारे में
जानकारी दी। उन्होंने हाइड्रोजन मॉडल के ज़रिए बताया कि कैसे छोटे पदार्थ के बढ़ने पर इलेक्ट्रॉनिक गुणों में तीव्र परिवर्तन होता है। डॉ. विनोद कुमार ने क्लिक इन्स्पायर्ड सिंथेसिस के केमिकल
रिएक्शन के बारे में बताया। स्टूडेंट्स ने भी रिसर्च पेपर पढ़े। कार्यक्रम का उदघाटन डीएवीवी कुलपति डॉ. रेणु जैन ने किया।
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