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महू-सनावद ट्रैक के लिएफॉरेस्ट लैंड की बाधा दूर

एक वर्ष पहले
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महू-सनावद के बीच ब्रॉडगेज लाइन के लिए फॉरेस्ट लैंड की बड़ी बाधा दूर हो गई है। रेलवे को वन विभाग की 70 फीसदी जमीन के लिए प्रथम चरण की मंजूरी मिल गई है। अफसरों के मुताबिक दूसरे चरण की अनुमति मिलते ही टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी।

महू से सनावद तक 63 किमी के हिस्से में बड़ी लाइन के लिए वन विभाग की जमीन मिलने का रास्ता साफ हो गया है। महू से सनावद के बीच ब्रॉडगेज ट्रैक के दायरे में वन विभाग की 264 हेक्टेयर जमीन आ रही है। यहां वन विभाग के पेड़ लगे हैं, जो इंदौर और बड़वाह फॉरेस्ट रेंज के तहत आते हैं। रेलवे लंबे समय से इस जमीन के अधिग्रहण में लगा था, लेकिन मामला अनुमति पर अटका था। अब इसे लेकर बड़ी बाधा दूर हो गई है।

पश्चिम रेलवे के डिप्टी चीफ इंजीनियर (कंस्ट्रक्शन) संदीप खंडेलवाल ने बताया कि फॉरेस्ट लैंड में अधिग्रहण की अनुमति दो चरणों में होती है। फॉरेस्ट लैंड के कुल 264 हेक्टेयर क्षेत्र में से 208 हेक्टेयर जमीन को लेकर प्रथम चरण की अनुमति मिल गई है। यह वन विभाग की कुल जमीन का 70 फीसदी है। खंडेलवाल के मुताबिक दूसरे चरण की अनुमति जल्द हो सकती है। उसके बाद सेक्शन के लिए टेंडर बुलाए जाएंगे। बता दें कि यह ट्रैक अकोला-महू-खंडवा-रतलाम के नाम से जाना जाता है। रतलाम से महू तक बड़ी लाइन डल चुकी है। खंडवा से सनावद के बीच 54 किमी का पूरा हिस्सा जल्द ही ब्रॉडगेज हो जाएगा। महू-सनावद तक 63 किमी ट्रैक ब्रॉडगेज होना बाकी है।

अब निजी जमीन का ही पेंच

महू-सनावद बड़ी लाइन की जद में करीब 45 हेक्टेयर जमीन निजी भूमि है। इसका भी अधिग्रहण होना है, लेकिन मामला लंबे समय से उलझा हुआ है। अफसरों का कहना है कि यह कार्रवाई राज्य सरकार के राजस्व विभाग के स्तर पर होगी।

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